सारठ पुलिस-पब्लिक झड़प : आधी रात को पुलिस ने मचाया तांडव

सारठ : घटना के चौथे दिन भी ग्रामीणों में खौफ देखा गया. बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा. देर रात हुई पुलिस कार्रवाई से ग्रामीण इस कदर सहमे रहे कि घर से बाहर कदम तक रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाये. * भटकते रहे परिजन घटना में जिन्हें आरोपित बनाया गया था उनके परिजन समेत […]
सारठ : घटना के चौथे दिन भी ग्रामीणों में खौफ देखा गया. बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा. देर रात हुई पुलिस कार्रवाई से ग्रामीण इस कदर सहमे रहे कि घर से बाहर कदम तक रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाये.
* भटकते रहे परिजन
घटना में जिन्हें आरोपित बनाया गया था उनके परिजन समेत ग्रामीण दिन भर न्याय के लिए इधर-उधर भटकते रहे. प्रखंड से जिला तक लोग विभिन्न जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों तक घटना से अवगत कराया व मामले में त्वरित कार्रवाई करने की मांग की.
अबतक मामले में कोई पहल नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा जा रहा है. पूजा के दौरान पुलिस-पब्लिक भिड़ंत में पुलिस की कार्रवाई से विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी देखी गयी. मंगलवार का पूरा दिन सारठ में यह चर्चा गर्म रहा. लोगों ने मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए निर्दोषों को बचाने की अपील की.
* नाबालिगों को भी नहीं बख्शा
पुलिस ने जिन 32 लोगों को नामजद बनाया है. उनमें पांच नाबालिग हैं. लेकिन वह भी पुलिसिया कार्रवाई का शिकार हो गये. इनमें बबलू कुमार दे,सुमन कुमार दे,छोटन दे, विष्णु कुमार गुप्ता एंव गुडडू गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
* आधी रात को पुलिस ने मचाया तांडव
पीडि़तों का कहना है घटना के बाद आधी रात एसपी राकेश बंसल की मौजूदगी में पुलिस लोगों के घरांे में दरवाजा तोड़ कर घुसी. महिलाओं व बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया. इंटर की छात्रा अन्ना कुमारी व दसवीं की हृदय रोग से पीडि़त छात्रा पुतुल दे, 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला शर्मा दे, मुक्ता दे को भी पुलिस ने नहीं बख्शा. इनके साथ भी मारपीट की गयी. शर्मा दे ने कहा कि पुलिस बर्बर तरीके से उनके सामने बच्चों को पीट रही थी. हाथ पैर गिड़गिड़ा कर छोड़ने की अपील की मगर नहीं माने.
* शांति समिति द्वारा नहीं हुई कोई पहल
दुर्गा पूजा से पूर्व सारठ में बनी शांति समिति भी महज खानापूर्ति ही बनकर रह गयी. पूजा के दौरान हुई इतनी बड़ी घटना होने के बाद इसे शांत करने को लेकर शांति समिति की ओर से भी कोई पहल नहीं की गयी. शांति समिति सदस्य भी घटना के बाद गायब ही दिखे. शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए समिति सदस्यों ने कोई सहयोग नहीं किया. जिससे गठित समिति की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि समिति चाहती तो मामले को शांत करा सकती थी.
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