मधुपुर : भट्ठी में खुद को तपाकर लोहे को ढालने वाले कारीगर खुद बदहाल, सरकार से सुविधाएं मिलने का इंतजार

मधुपुर : लोहा हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा है. यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत भी है. लेकिन जीवन के औजार को ढालने वाले लोहार आज बदहाली के कगार पर हैं. पाथरोल स्थित राउतडीह गांव में करीब 300 विश्वकर्मा परिवार लोहे से कई तरह की सामग्री बनाकर गुजर बसर करते हैं. लेकिन, उपेक्षा […]
मधुपुर : लोहा हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा है. यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत भी है. लेकिन जीवन के औजार को ढालने वाले लोहार आज बदहाली के कगार पर हैं. पाथरोल स्थित राउतडीह गांव में करीब 300 विश्वकर्मा परिवार लोहे से कई तरह की सामग्री बनाकर गुजर बसर करते हैं.
लेकिन, उपेक्षा के कारण ये तंगहाली भरी जिंदगी जीने को विवश हैं. सरकार से मदद नहीं मिलने के कारण अब इनका हुनर भी जवाब देने लगा है. यहां के बनाये हुए लोहे की कढ़ाई, कुदाली, छनोटा, चापर, छुरी, हंसुवा, पिंजरा, तावा आदि लौह सामग्री बिहार, बंगाल व दूसरे राज्य भेजे जाते हैं.
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