नहीं बना जोनल कार्यालय, अब हर वार्ड में बनेगा विकास केंद्र

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 May 2018 5:01 AM

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देवघर : नगर निगम के हर तीन चार वार्ड मिला कर एक जोनल कार्यालय बनना था. लेकिन, निगम की ओर से जोनल कार्यालय तो अबतक नहीं बन पाया. अब हर वार्ड में विकास केंद्र बनाने का टेंडर निकाल दिया गया. निगम के अधीक्षण अभियंता के फैसले से वार्ड पार्षद भी हतप्रभ हैं. अब पार्षद इसे […]

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देवघर : नगर निगम के हर तीन चार वार्ड मिला कर एक जोनल कार्यालय बनना था. लेकिन, निगम की ओर से जोनल कार्यालय तो अबतक नहीं बन पाया. अब हर वार्ड में विकास केंद्र बनाने का टेंडर निकाल दिया गया. निगम के अधीक्षण अभियंता के फैसले से वार्ड पार्षद भी हतप्रभ हैं. अब पार्षद इसे लेकर विरोध करें इससे पहले ही टेंडर निकाल कर वह छुट्टी पर चले गये हैं.

निगम की संपूर्ण बोर्ड ने तत्कालीन सीइओ अवधेश कुमार पांडेय के समय जनता की सुविधा के लिए निगम क्षेत्र में सात जोनल कार्यालय बनाने का प्रस्ताव पारित किया था. कार्यालय में निगम की ओर से कुर्सी, टेबुल, पंखा, एक कर्मी व आगंतुक के लिए चाय की व्यवस्था करने की भी बात कही गयी. जोनल कार्यालय बनाने का काम पूरा तो हुआ नहीं, टेंडर भी नहीं निकला और इधर वार्ड विकास केंद्र का टेंडर निकल गया. इसके लिए भी कई वार्डों को छोड़ दिया गया है.

कौन-कौन हैं जोनल अध्यक्ष
रीता चौरसिया, वशिष्ट नारायण सुमन, मृत्युंजय राउत, शुभलक्ष्मी देवी, कन्हैया झा, रवि राउत, सुभाष राणा
जोनल कार्यालय से क्या होता फायदा
जोनल कार्यालय में संबंधित वार्डों की समस्या सुनी जाती. वहां से ही वार्डों की पानी, बिजली, गंदगी की समस्या का हल होता. जनता को नगर निगम जाना नहीं पड़ता.
तीन-चार वार्ड का बनना था एक
जोनल कार्यालय
निगम से एक कर्मी, एक लिपिक, कुर्सी पंखा आदि की होनी थी व्यवस्था
कहते हैं जोनल अध्यक्ष
हर वार्ड के विकास के लिए जोनल कार्यालय बनाने का निर्णय लिया गया है. इसमें वार्डों की समस्या जोनल कार्यालय में ही हल होना था. यह कागज तक ही सिमट कर रह गया. इसके लिए निगम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है.
मृत्युंजय राउत, जोनल अध्यक्ष, क्षेत्र-तीन
बोर्ड की बैठक समय पर नहीं होती है. पारित प्रस्ताव को भी अपने इच्छानुसार लागू किया जाता है. पूरा सिस्टम मजाक बना कर रख दिया है. जोनल कार्यालय बनने से जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए निगम कार्यालय का चक्कर लगाना नहीं पड़ता. इससे निगम पर लोड कम होता.
शुभलक्ष्मी देवी, जोनल अध्यक्ष क्षेत्र चार
निगम का वर्क कम करने के लिए जोनल कार्यालय बनना था. इसमें वार्ड की छोटी-मोटी समस्या की सुनवाई होती. इससे निगम कार्यालय में भीड़ कम लगती. यह एक्ट में भी प्रावधान है. बावजूद अधीक्षण अभियंता रमेश झा ने ध्यान नहीं दिया. वह अपनी मनमर्जी से टेंडर निकाल रहे हैं.
आशीष झा उर्फ कन्हैया, जोनल अध्यक्ष, क्षेत्र-पांच
जोनल कार्यालय बनना अत्यावश्यक है. यह एक्ट में भी प्रावधान है. हमलोगों ने कई बार आवाज उठाया. सरकार ध्यान नहीं दे रही है. थक-हार कर चुप हो गये. अब वार्ड विकास केंद्र भवन बनाने की तैयारी कर रही है. सरकार केवल विधायकों को सुविधा बढ़ाने में व्यस्त है.
रवि राउत, जोनल अध्यक्ष क्षेत्र-छह
वार्ड पार्षद कार्यालय का टेंडर अभी निकला है. जोनल कार्यालय का नहीं निकला है. नये सीइओ के पदभार ग्रहण के समय एक बार शिकायत किये थे. उसके बाद संपर्क नहीं किये हैं. जोनल कार्यालय रहने से जनता को अधिक लाभ होता.
सुभाष राणा, जोनल अध्यक्ष क्षेत्र-सात
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