होल्डिंग नंबर लेना है बाबू तो छूट जायेगा पसीना
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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चार माह में सिर्फ 40 को मिला होल्डिंग नंबर देवघर : नगर निगम से होल्डिंग नंबर लेने में लोगों का पसीना छूट रहा है. होल्डिंग टैक्स जमा करने के बाद भी अपना होल्डिंग नंबर लेने के लिए बहुत पापड़ बेलना पड़ रहा है. लोगों को निगम कार्यालय से लेकर एसपीएस कंपनी का कार्यालय का चक्कर […]
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चार माह में सिर्फ 40 को मिला होल्डिंग नंबर
देवघर : नगर निगम से होल्डिंग नंबर लेने में लोगों का पसीना छूट रहा है. होल्डिंग टैक्स जमा करने के बाद भी अपना होल्डिंग नंबर लेने के लिए बहुत पापड़ बेलना पड़ रहा है. लोगों को निगम कार्यालय से लेकर एसपीएस कंपनी का कार्यालय का चक्कर कई बार लगाना पड़ता है. इसकी प्रक्रिया जटिल होने से निगम कर्मी भी परेशान हो रहे हैं. कभी नेटवर्क समस्या, तो कभी कर्मियों की कमी. इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है. इसी का नतीजा है कि चार माह में लगभग 40 लोगों को ही होल्डिंग नंबर मिला है. नगर निगम चार माह पहले से हल्ला मचा कर लोगों से होल्डिंग टैक्स की बकाया राशि वसूल कर रहा है.
चार माह के दौरान 39 हजार से अधिक लोगों ने होल्डिंग टैक्स जमा कर दिया है. अब उन्हें होल्डिंग नंबर लेने के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है. लोगों को आसानी से होल्डिंग नंबर नहीं मिल रहा है.
जनता का बढ़ जायेगा एकाएक बोझ: एसपीएस कंपनी के कंप्यूटर में टैक्स लेने के लिए दो साल का ही अपडेट है. उसके बाद का टैक्स नहीं लिया जा रहा है. वह 2016-2017 व 2017-2018 का टैक्स ले सकती है. जनता टैक्स देकर अपना बोझ कम करना चाहे भी तो 2019 का टैक्स नहीं दे सकती है. तीन माह बाद नया सेशन शुरू हो जायेगा. ऐसे में नया साल का टैक्स बकाया शुरू हो जायेगा.
होल्डिंग नंबर लेना है टफ वर्क: होल्डिंग नंबर लेना किसी बड़े युद्ध से लड़ने से कम नहीं है. यह चार जगहों से गुजरता है. इसके बाद ही होल्डिंग नंबर शुरू होता है.
39 हजार लोगों ने जमा किया है सैफ
सिस्टम की जटिल प्रक्रिया से नहीं मिल रहा है होल्डिंग नंबर
मेमो नंबर बन कर है तैयार
क्या है प्रक्रिया
सैफ भरने के बाद सिस्टम में अपलोड होता है. इसके बाद सैफ नंबर जारी होता है. इसके बाद एसपीएस के स्टॉफ स्पॉट वेरिफिकेशन करते हैं. उसके बाद मेमो नंबर जेनरेट किया जाता है. यह निगम टैक्स दारोगा के पास आयेगा. यहां से जांच के उपरांत सिटी मैनेजर के पास जायेगा. वहां सारी जांच होने के बाद फाइनल रूप से सीइओ के टेबुल पर जायेगा. इसके बाद होल्डिंग नंबर जारी किया जाता है.
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