चला बुलडोजर, टूटा घर, बिखर गये सपने

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देवघर: शनिवार को देवघर एयरपोर्ट पर प्रशासन द्वारा अधिग्रहित जमीन पर दखल लेने के दौरान मकान में रहने वाले लोगों का दर्द उस समय सामने आया, जब तिनका-तिनका जोड़कर बनाया गया उनका मकान पल भर में टूट गया. सबसे अधिक कष्ट में वैसे परिवार थे, जिन्हें भू-दान में सरकार से जमीन प्राप्त हुई व उसके […]

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देवघर: शनिवार को देवघर एयरपोर्ट पर प्रशासन द्वारा अधिग्रहित जमीन पर दखल लेने के दौरान मकान में रहने वाले लोगों का दर्द उस समय सामने आया, जब तिनका-तिनका जोड़कर बनाया गया उनका मकान पल भर में टूट गया. सबसे अधिक कष्ट में वैसे परिवार थे, जिन्हें भू-दान में सरकार से जमीन प्राप्त हुई व उसके एवज में उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया. भू-दान पर मकान बनाने वाले परिवारों को न तो मकान और न ही मुआवजा मिल सकता है.

प्रशासन का बुलडोजर चलने के बाद बेघर महिला, पुरुष, बच्चे व बुजुर्ग अपने आशियाना को देखकर फूट-फूट कर रो रहे थे. सोनी कुमारी अपने 21 दिन की दुधमुंहे बच्चे को लेकर धूप में घर के सामान के साथ बैठ कर रो रही थी, सोनी को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इस दुधमुहें बच्चे को लेकर कहां जाये. प्रशासन ने रहने के लिए तो कोई व्यवस्था भी नहीं की है. घर के पुरुष अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर एक खाली पड़ी जमीन में बांस-बल्ला लगाकर टेंट बना रहे थे. इस टेंट में भी रात में ठंड और अगर बारिश हो जाये तो क्या करेंगे, इसकी चिंता सोनी की तरह अन्य महिलाओं को सता रही थी, जिनके दुधमुहें बच्चे हैं.

कोई खिलौना, तो कोई बर्तन समेटने में लगा
बाबूपुर गांव के ग्रामीण बताते हैं कि शनिवार को अचानक प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर पहुंच गयी. गांव की महिला मालती देवी घर ढहने के बाद अपने बर्तन खोज रही थी. मालती कहती हैं कि उनके बच्चे रोज की तरह घर में भोजन कर रहे थे. जैसे ही गांव में बुलडोजर घुसने का हल्ला हुआ तो बच्चे भोजन भी पूरा नहीं कर पाये व डर से भोजन छोड़कर भागे. प्रशासन ने बर्तन हटाने के मौका भी नहीं दिया व बच्चे का बर्तन मलवे में दब गया. एक बच्ची आशियाना टूटने के बाद उसने अपना खिलौना को खोज निकाला व अपने साथ ले गयी. जैसे-जैसे बुलडोजर आगे बढ़ रहा था, सभी मेहनत व मजदूरी से एक-एक तिनका जोड़कर खड़ा किये आशियाने का सामान निकालने में लगे थे.
55 वर्ष पहले शादी कर आयी थी, कई दुख काटे, अब टूटा घर
डोमामारनी गांव की 70 वर्षीय सुदामी देव्या अपने टूटे मिट्टी की घर में अंतिम बार बैठकर खूब रोयी. सुदामी देव्या ने कहा कि उसे घर का मुआवजा तो मिला है, लेकिन उस घर से अलग होने का दुख अभी भी है. जिस घर में 55 वर्ष पहले शादी कर आयी, कई दुख काटे. आज पल भर में उस घर से हमेशा के लिए जुदा रही हैं. ऐसा लग रहा है कि एक बार कोई बेटी अपने घर से ससुराल के लिए जा रही है. सुदामी देव्या कहतीं है कि वह अपने पति का बनाये घर की मिट्टी अपने साथ ले यादों के लिए जायेंगी. डोमामारनी के दीपक गुप्ता को विस्थापित सूची में नहीं रखने पर दुख है.
भूदानी जमीन वालों ने की मुअावजा देने की मांग
बाबूपुर गांव के कैलाश दास, चांदो देवी, मालेश्वर नापित, मनोज दास, बुधन मांझी, रंजू मांझी, धनेश्वर मांझी, बालकृष्ण मांझी, मुकेश मांझी, नकुल, प्रमिला देवी, कुसमी देवी, मून्ना मांझी ने कहा कि भू-दान यज्ञ कमेटी द्वारा उनके पूर्वजों को ही भू-दान में जमीन मिली थी, पूर्वजों ने घर भी बनाया था. हमलोगों ने मेहनत व मजदूरी कर पाई-पाई जोड़कर घर को सही ढंग से बनाया, लेकिन प्रशासन की आेर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया. यहां तक कि भू-दान जमीन वाले को घर का भी मुआवजा नहीं दिया गया. ऐसी परिस्थिति में हमलोग खुले आसमान में रहने को विवश हो जायेंगे. प्रशासन केा कम से कम घर का मुआवजा देना चाहिए.
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