विडंबना: हाल शहर के बीचोबीच स्थित मैक्सी स्टैंड का, रोज चलती हैं 125 गािड़यां सुविधा के नाम पर शून्य

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देवघर : शहर का एक मात्र मैक्सी स्टैंड से नगर निगम को हर माह हजारों का राजस्व मिलता है, बावजूद स्टैंड अपेक्षित बना हुआ है. यहां से हर दिन करीब पांच हजार यात्रियों का आना-जाना होता है. 50 किलोमीटर के दायरे में हर दिन 100 से 110 वाहनों का विभिन्न ग्रामीण इलाके लिए परिचालन होता […]

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देवघर : शहर का एक मात्र मैक्सी स्टैंड से नगर निगम को हर माह हजारों का राजस्व मिलता है, बावजूद स्टैंड अपेक्षित बना हुआ है. यहां से हर दिन करीब पांच हजार यात्रियों का आना-जाना होता है. 50 किलोमीटर के दायरे में हर दिन 100 से 110 वाहनों का विभिन्न ग्रामीण इलाके लिए परिचालन होता है, लेकिन निगम की ओर से यहां यात्रियों व गाड़ियों के लिए किसी भी तरह की मूलभूत सुविधा का इंतजाम नहीं किया गया है. निगम को स्टैंड से हर माह करीब 40 हजार रुपये की कमाई होती है, लेकिन महीने में एक पैसे खर्च नहीं है.
प्रत्येक वाहन से 15 रुपये वसूलता है निगम : हर दिन प्रत्येक वाहन से निगम द्वारा पार्किंग शुल्क के नाम पर 15 रुपये शुल्क वसूला जाता है. इस हिसाब से स्टैंड से निगम को हर दिन 1500 से दो हजार रुपये की आय होती है.
नहीं है किसी तरह की सुविधा : स्टैंड में निगम की ओर से यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं दी गयी है. मार्च में शौचालय निर्माण का शिलान्यास किया गया, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी आज तक पूरा नहीं हो पाया है. पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. यात्री शेड व यूरिनल की व्यवस्था नहीं है. स्टैंड में लाइट की भी व्यवस्था नहीं है.
हर दिन पांच हजार लोगों का हाेता है आवागमन : मैक्सी स्टैंड में हर दिन करीब पांच हजार लोगों का आवागमन होता है. करीब सौ से 110 गाड़ियां हर दिन खुलती है. इससे वाहन मालिकों को हर दिन करीब एक लाख रुपये की आय होती है.
क्या कहते हैं एसोसिएशन के सदस्य
एसोसिएशन की ओर से प्रत्येक वाहन से छह रुपये शुल्क लिया जाता है. इसके एवज में गाड़ियों का बेहतर परिचालन रात में गार्ड की व्यवस्था व वाहन चालक व खलासी की समस्या के निदान करने के लिए हरदम तैयार रहती है.
मिथिलेश कुमार राय, कोषाध्यक्ष, मैक्सी स्टैंड एसोसिएशन
निगम की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए हमलोग रात में यहां नहीं रुकते हैंं एसोसिएशन की वजह से ही बेहतर परिचालन संभव है.
विनोद यादव, चालक
स्टैंड में बिजली, पानी व शौचालय आदि की व्यवस्था नहीं हाेने की वजह से यहां रात में रहने में काफी परेशानी होती है.
उदय शंकर राय, चालक
कहां-कहां के लिए खुलती हैं गाड़ियां
दर्दमारा, चांदन, कटोरिया, सारवां, सारठ, मधुपुर, बलियाचौकी, अंधरीगादर, माधोपुर, चकाई, सोनो, मोहनपुर, हंसडीहा, घोरमारा, तालझारी, बासुकिनाथ, बसडीहा, तपोवन आदि
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