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किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब से निकाल लेंगे 31.8 करोड़

Updated at : 13 Mar 2018 4:57 AM (IST)
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किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब से निकाल लेंगे 31.8 करोड़

देवघर : प्राइवेट स्कूलों में अब भले ही किताबों व कॉपियों की बिक्री नहीं हो रही है, लेकिन बाजार में दुकानदार को खड़ा कर स्कूल प्रबंधन ने वर्चस्व कायम किये हुए है. बल्कि नकद में पुस्तकों व कॉपियों की बिक्री कर दुकानदार मोटी कमाई कर रहे हैं. अनुमान के मुताबिक, नया सत्र शुरू होने से […]

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देवघर : प्राइवेट स्कूलों में अब भले ही किताबों व कॉपियों की बिक्री नहीं हो रही है, लेकिन बाजार में दुकानदार को खड़ा कर स्कूल प्रबंधन ने वर्चस्व कायम किये हुए है. बल्कि नकद में पुस्तकों व कॉपियों की बिक्री कर दुकानदार मोटी कमाई कर रहे हैं. अनुमान के मुताबिक, नया सत्र शुरू होने से पहले ही आइसीएसइ, सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त सहित अन्य स्कूलों की किताब व कॉपियों के नाम पर अभिभावकों की जेब से दुकानदार करीब 32 करोड़ रुपये निकाल लेगा.

आइसीएसइ व सीबीएसइ से संबंद्ध स्कूलों की किताबें न्यू ज्ञान गंगा देवघर में कैश में ही बेची जा रही है. यहां कार्ड अथवा ऑनलाइन पेमेंट का कोई इंतजाम नहीं है. न ही किताब, कॉपी, स्टेशनरी की बिक्री पर कोई छूट दे रहा है. वहीं टावर चौक के समीप बुक शॉप में सीबीएसइ से संबंद्ध स्कूलों की किताबों की बिक्री पर दस से 15 फीसदी तक छूट दी जा रही है. यहां कार्ड के जरिये पेमेंट का भी इंतजाम है.

स्कूलों की भी मनमानी : एक खास दुकान से ही किताब खरीदने का दबाव
प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकें कैश में बेचकर दुकानदार हो रहे हैं मालामाल
डायस रिपोर्ट के अनुसार, मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की संख्या 30
गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की संख्या 235 है
औसतन एक प्राइवेट स्कूलों में चार सौ छात्रों का एडमिशन है
आओ जाने बच्चों व किताबों का गणित
झारखंड शिक्षा परियोजना कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या 30 है. गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की संख्या 235 है. औसतन एक प्राइवेट स्कूल में चार सौ छात्र-छात्राओं का एडमिशन मान लिया लें तो कुल एक लाख छह हजार छात्र-छात्राओं का नामांकन सभी प्रकार के प्राइवेट स्कूलों में है. अब किताब-कॉपियों पर प्रत्येक छात्रों का खर्च तीन हजार रुपये औसतन मान लें तो 31.80 करोड़ रुपये अभिभावकों के जेब से निकल जायेगा.
क्या कहते हैं बुकसेलर
‘आइसीएसइ व सीबीएसइ बोर्ड की किताबें बेची जा रही है. ऑनलाइन पेमेंट के लिए अप्लाई किया गया है. अभी कैश में कारोबार किया जा रहा है. किताबों में किसी प्रकार की छूट नहीं है. सिर्फ कॉपियों में दस फीसदी की छूट दी जा रही है. स्कूल का नाम प्रिंटेट कॉपी काउंटर से बेचा जा रहा है. कॉपी में नाम कैसे प्रिंट किया गया है. इस बारे में मालिक ही जानकारी दे पायेंगे.’
विनोद सिंह, स्थानीय प्रबंधक, न्यू ज्ञान गंगा देवघर
‘एनसीइआरटी की किताबों के अलावा प्राइवेट बोर्ड से संबंधित किताबे काउंटर पर उपलब्ध है. 10 से 20 फीसदी तक छूट भी दिया जा रहा है. नकद के अलावा कार्ड के जरिये पेमेंट लिया जा रहा है.’
राजेंद्र गुप्ता, प्राेपराइटर, नवयुग बुक शॉप देवघर.
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