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डहुरी डैम में लगे फाटक व चैनल खराब, बह कर बर्बाद हो रहा पानी

Updated at : 05 Dec 2024 8:34 PM (IST)
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डहुरी डैम में लगे फाटक व चैनल खराब, बह कर बर्बाद हो रहा पानी

डहुरी डैम का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. डैम में लगे फाटक व चैनल के खराब होने से पानी बहकर बर्बाद हो रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है.

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चतरा. डहुरी डैम का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. डैम में लगे फाटक व चैनल के खराब होने से पानी बहकर बर्बाद हो रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है. नहर भी कई जगह पर टूटी हुई है, जिसके कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है. हजारों एकड़ खेत खाली पड़े हैं. किसान बारिश के पानी पर आश्रित हो गये हैं. वे सिर्फ खरीफ फसल ही उगा पा रहे हैं. बहुत कम किसान रबी व नकदी फसल की खेती कर रहे हैं. डैम की देखरेख का जिम्मा जल पथ प्रमंडल हजारीबाग का है. विभाग की लापरवाही के कारण किसानों को डैम का लाभ नहीं मिल रहा हैं. किसानों को अभी से ही गर्मी के मौसम में होनेवाली नकदी फसल की चिंता सता रही है. 88 हेक्टेयर में फैले डहुरी डैम का निर्माण 1982 में हुआ था. शुरुआती दौर में उक्त डैम से टिकर, लेम, दारियातु पंचायत के करीब 2400 एकड़ खेत सिंचित होता है. किसानों ने कई बार विभाग को डैम में लगे खराब फाटक व चैनल को ठीक करने की मांग की गयी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया. डैम बनने के पांच-छह साल तक उक्त पंचायत के किसान तरह-तरह की खेती कर अच्छी आमदनी करते थे. अब किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा हैं, जिसके कारण पलायन करने को मजबूर हैं.

सिमटता जा रहा है डैम का दायरा

88 हेक्टेयर में फैला डहुरी डैम का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा हैं. लोग डैम के जमीन को अतिक्रमण करते जा रहे हैं. डैम के जमीन में गेहूं समेत अन्य फसल उगाये जा रहे हैं. विभाग का ध्यान इस ओर नहीं हैं, जिसके कारण डैम का दायरा दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा हैं.

डहुरी के लोगों को नहीं मिलता है लाभ

डैम डहुरी गांव के लोगों की जमीन में बना है, लेकिन डहुरी गांव के ही लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता है. डैम का पानी कसियाडीह, टिकर, चंगेर, दारियातु, बरवाडीह समेत गांवों में जाता हैं, लेकिन डहुरी तक पानी नहीं पहुंचता हैं. डहुरी के अमृत यादव ने कहा कि डैम भले ही डहुरी में बना हैं, लेकिन इसका लाभ उन्हें नहीं मिलता. भरत यादव ने कहा कि जब डैम बना था तब लगा था कि खेतों तक पानी पहुंचेगा और फसल उगा सकेंगे, लेकिन कोई लाभ नहीं मिल पाया.

किसानों ने कहा

टिकर के किसान मनोज कुमार दांगी ने कहा कि डैम बनने के बाद कुछ सालों तक खेतों में कई तरह के फसल उगाकर अच्छी आमदनी करते थे. धीरे-धीरे नहर टूटती चली गयी. खेतों तक पानी पहुंचना बंद हो गया. बरसाती पानी से ही फसल उगा पाते हैं. अशोक दांगी ने कहा कि जब खेतों तक पानी पहुंचता तब विभाग को टैक्स देते थे. आलू, टमाटर, मटर, करेला समेत अन्य फसल उगाते थे. विनोद दांगी ने कहा कि पानी के अभाव में खेती नहीं कर पा रहे हैं. पलायन करना पड़ रहा हैं.

जेई ने कहा

जलपथ प्रमंडल के जेई संजय कुमार महतो ने कहा कि डैम में लगे फाटक व चैनल को बनाने के लिए कई बार विभाग को पत्राचार किया गया हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं. फाटक व चैनल की मरम्मत होने से किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

डीसी ने कहा

उपायुक्त रमेश घोलप ने कहा कि डहुरी डैम की मरम्मत का मामला संज्ञान में है. जलपथ प्रमंडल के पदाधिकारियों से संपर्क किया जा रहा हैं. डैम की मरम्मत के लिए राशि उपलब्ध करायी जायेगी. विभाग से डैम सौंदर्यीकरण के लिए भी प्रस्ताव मांगा जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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