ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में सभी भूमिका निभायें : डीसी

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ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में सभी भूमिका निभायें : डीसी

राजकीय इटखोरी महोत्सव के दूसरे दिन मां भद्रकाली मंदिर परिसर में इटखोरी तीन धर्मों का समागम, संगम स्थल इटखोरी के पुरातात्विक और सांस्कृतिक महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

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इटखोरी. राजकीय इटखोरी महोत्सव के दूसरे दिन मां भद्रकाली मंदिर परिसर में इटखोरी तीन धर्मों का समागम, संगम स्थल इटखोरी के पुरातात्विक और सांस्कृतिक महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. उद्घाटन डीसी रमेश घोलप ने किया. मौके पर डीसी ने कहा कि मां भद्रकाली मंदिर प्राचीन धार्मिक धरोहर है. यहां के महत्व को जानने, समझने व अनुकरण करने की जरूरत है. यहां के ऐतिहासिक धरोहर को समृद्ध बनाने के साथ संरक्षण करने में सभी अहम भूमिका निभायें. इटखोरी के धार्मिक स्थल को पूरे देश में प्रचार-प्रसार के साथ विकास करने की जरूरत है. संगोष्ठी में जो सुझाव मिले हैं उस सुझाव पर काम कर विकसित करूंगा.

इटखोरी धार्मिक दृष्टिकोण से प्राचीन स्थल है : डॉ नीरज मिश्र

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रांची मंडल के सहायक अधीक्षण पुरातात्विद डॉ नीरज कुमार मिश्र ने कहा कि तीन धर्मों के संगम स्थल इटखोरी धार्मिक दृष्टिकोण से प्राचीन स्थल है. जहां तीनों धर्मों के प्राचीन अवशेष व प्रतिमाएं विराजमान हैं. माता के दरबार मे सत्य की उपासना होती है. इटखोरी में वर्ष 2011-12 में हुई खुदाई में मिले प्राचीन अवशेष यहां मंदिर व बौद्ध मठ होने का भी प्रमाण बताते हैं. यहां पाल काल तक के अवशेष मिले हैं. प्रतिमाएं में वर्णित अभिलेख से हमे पता चलता है कि प्रतिमा कब की है. यहां के पुरातात्विक स्थल में सांस्कृतिक मेल है. इटखोरी के आसपास के क्षेत्रों में मेगालिथ साइट बड़ी मात्रा में विराजमान हैं. इसके अलावा बलबल में मनौती स्तूप के साक्ष्य भी उपलब्ध है.

धार्मिक स्थल के अहमियत को जानने जरूरत : मो अजहर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पटना मंडल के सहायक अधीक्षण पुरतात्विद डॉ मो अजहर साबिर ने कहा कि इटखोरी का धार्मिक स्थल दुनियां के पटल पर अब तक नही पहुंच सका है. यहां के महत्वपूर्ण अहमियत को जानने, पहचानने व इसे विश्व पटल पर लाने की जरूरत है. यहां खुदाई में मिली प्राचीन प्रतिमाएं व अवशेष नालंदा और विक्रमशिला से मिलते-जुलते हैं. इटखोरी के साथ कुंदा व पथलगड्डा में भी प्राचीन अवशेष हैं.

इटखोरी का सांस्कृतिक धरोहर अनूठा : विवेक आशीष

चतरा कॉलेज के व्याख्याता विवेक आशीष बाखला ने कहा कि तीन धर्मों का समागम स्थल को पुरातात्विक शोध की जरूरत है. यहां मौजूद प्राचीन व सांस्कृतिक धरोहर अनूठा है. यहां जैन धर्म के पद चिह्न है. जो इटखोरी के साथ चतरा व पूरे विश्व के लिये उपयोगी है. महोत्सव के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक को बढ़ावा देने का मुख्य कदम के साथ गर्व का पल है. पूर्वजों ने जिस चीजों को रचा व बसाया उस विरासत को हम सबों को संरक्षित रखने की जरूरत है.

निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

डीसी ने भद्रकाली महाविद्यालय के प्राचार्य दुलार हजाम व अशोक कुमार द्वारा लिखे गयी पुस्तक मॉडर्न फाइनेंशियल इकोनॉमी का विमोचन किया. प्राचार्य ने कहा कि यह पुस्तक इंटर व स्नातक विद्यार्थियों के काफी उपयोगी है. कार्यक्रम के दौरान इटखोरी एक दृष्टि विषय पर निबंध प्रतियोगिता हुई, जिसमें बालिका विद्यालय इटखोरी की छात्रा सुमन कुमारी प्रथम, चतरा कॉलेज के आकाश कुमार द्वितीय व चतरा कॉलेज के संजय कुमार ने तृतीय स्थान पर रहे. डीसी ने उन्हें पुरस्कृत किया. इस अवसर पर जिप अध्यक्ष ममता कुमारी, उपाध्यक्ष ब्रजकिशोर तिवारी, सिमरिया एसडीओ सन्नी राज, प्रमुख प्रिया कुमारी, डीईओ दिनेश मिश्र, खेल पदाधिकारी तुसार कुमार आदि मौजूद थे.

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