आखिरकार मिल ही गया चतरा का लापता छात्र निखिल कुमार, परिजनों ने ली राहत की सांस

Updated at : 15 Mar 2026 7:53 AM (IST)
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Chatra News

शरारत करता चतरा का छात्र निखिल कुमार (बाएं) और मिलने के बाद मां की गोद में (दाएं). फोटो: प्रभात खबर

Chatra News: चतरा के बिंड मुहल्ला माली टोला से लापता 12 वर्षीय छात्र निखिल कुमार सकुशल मिल गया. रविवार सुबह गंदौरी मंदिर के पास बस कंडक्टर की सूचना पर पुलिस व परिजन मौके पर पहुंचे. निखिल के मिलने से परिवार और मुहल्ले के लोगों ने राहत की सांस ली. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू और मो तसलीम की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड में चतरा शहर के बिंड मुहल्ला माली टोला से लापता हुए 12 वर्षीय छात्र निखिल कुमार आखिरकार सकुशल मिल गया. उसके सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही परिजनों और मुहल्ले के लोगों ने राहत की सांस ली. निखिल के मिलने से पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया. निखिल कुमार के पिता का नाम कृष्णा मालाकार है. निखिल शनिवार की सुबह पढ़ाई करने के लिए दीवानखाना स्कूल गया था, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटा. दोपहर लगभग 12 बजे तक जब वह घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई. इसके बाद परिवार के लोग उसकी खोजबीन में जुट गए.

गंदौरी मंदिर के पास बस कंडक्टर ने पहचाना

रविवार की सुबह करीब छह बजे निखिल कुमार चतरा के गंदौरी मंदिर के पास देखा गया. वह वहां किसी बस से कहीं जाने के लिए पहुंचा था. इसी दौरान वहां मौजूद एक बस कंडक्टर ने उसे पहचान लिया. कंडक्टर ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और परिजनों को दे दी. सूचना मिलते ही सदर थाना की पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे. इसके बाद निखिल को अपने साथ घर ले जाया गया. उसके सकुशल मिलने के बाद परिवार के लोगों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी.

घर पहुंचते ही उमड़ी लोगों की भीड़

निखिल के घर लौटते ही उसे देखने के लिए मुहल्ले के लोगों की भीड़ लग गई. लोग लगातार उसके हालचाल जानने के लिए उसके घर पहुंचते रहे. हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि निखिल पूरी रात कहां रहा और वह घर से दूर कैसे पहुंच गया. परिजनों का कहना है कि बच्चे के सुरक्षित मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है. रातभर वे बेहद परेशान रहे और लगातार उसकी तलाश करते रहे.

बच्चे की खोज को लेकर केशरी चौक पर लगा था जाम

निखिल के लापता होने के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में काफी आक्रोश देखा गया. बच्चे की जल्द खोजबीन की मांग को लेकर लोगों ने केशरी चौक पर सड़क जाम कर दिया था. यह जाम शनिवार की रात करीब 11 बजे से शुरू हुआ और लगभग तीन घंटे तक जारी रहा. रात दो बजे तक सड़क जाम रहने के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई थी. इससे राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. सूचना मिलने के बाद पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और जाम कर रहे लोगों से बातचीत की.

पुलिस के आश्वासन के बाद हटाया गया जाम

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और स्थानीय लोगों को बच्चे की जल्द तलाश करने का भरोसा दिलाया. पुलिस ने कहा कि पूरी गंभीरता से बच्चे की खोजबीन की जा रही है. इसके बाद लोगों ने जाम हटा लिया और सड़क पर आवागमन सामान्य हो सका.

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रातभर तलाश में जुटी रही पुलिस

निखिल के लापता होने की सूचना मिलने के बाद सदर थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी थी. पुलिस टीम रातभर उसकी तलाश में लगी रही. परिजनों ने भी थाना में आवेदन देकर निखिल के लापता होने की जानकारी दी थी. बच्चे की खोजबीन में सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह, पुलिस अवर निरीक्षक मनीष कुमार, एएसआई रवि रंजन समेत कई पुलिसकर्मी लगातार लगे हुए थे. अंततः रविवार सुबह निखिल के मिलने के बाद पुलिस और परिजनों ने राहत की सांस ली. पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चा घर से निकलकर कहां गया था और पूरी रात कहां रहा. फिलहाल उसके सुरक्षित मिलने से परिवार और पुलिस दोनों को बड़ी राहत मिली है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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