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Chaibasa News : आरक्षण ने बिगाड़ा अध्यक्ष पद का गणित, वार्ड चुनाव बना सहारा

चक्रधरपुर नगर परिषद चुनाव : सामान्य सीटों पर नये और पुराने चेहरों पर होगा चुनावी घमासान

चक्रधरपुर. चक्रधरपुर नगर परिषद का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहा है, वैसे-वैसे इसकी सियासी तस्वीर दिलचस्प होती जा रही है. इस बार चुनाव में लागू दो महत्वपूर्ण नियमों ने चुनावी समीकरण को उलट-पलट कर रख दिया है. एक ओर जहां अध्यक्ष पद को अनुसूचित जनजाति (अन्य) वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ने की छूट इस शर्त पर कि प्रत्याशी नगर क्षेत्र का मतदाता हो. इसने राजनीतिक रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है.

अध्यक्ष पद का आरक्षण बना बड़ा झटका:

अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की घोषणा के बाद पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार रहे ओबीसी और सामान्य वर्ग के कई नेताओं में गहरी निराशा देखी जा रही है. वर्षों से अध्यक्ष पद की तैयारी कर रहे प्रत्याशी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. आरक्षण के कारण इस बार वे सीधे अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ पा रहे. इससे उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को झटका लगा है.

उपाध्यक्ष पद पर टिकी निगाहें:

सियासत में विकल्पों की कमी नहीं होती. अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हुए कई अनुभवी नेता अब वार्ड पार्षद का चुनाव जीतकर उपाध्यक्ष बनने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. सर्वविदित है कि नगर परिषद का उपाध्यक्ष चयनित वार्ड पार्षदों के मतदान से चुना जाता है. इसके लिए वार्ड पार्षद होना अनिवार्य है. ऐसे में वार्ड चुनाव इस बार सत्ता तक पहुंचने का मुख्य रास्ता बन गया है.पुराने दिग्गज फिर मैदान में:इन्हीं वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी में एक बड़ा नाम कृष्ण देव शाह उर्फ फेंकू साव का है. वे पिछले नगर परिषद चुनाव में अध्यक्ष चुने गये थे, पर इस बार आरक्षण के कारण अध्यक्ष पद से बाहर हो गये हैं. सूत्रों के अनुसार वे दो वार्डों से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर मंथन कर रहे हैं. इसी तरह गत चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे संजय मिश्रा उर्फ बुद्धू पंडित भी किसी सुरक्षित सामान्य वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गये हैं. इनके अलावा भी कई ऐसे नेता हैं, जो पहले अध्यक्ष पद की दौड़ में थे. अब वार्ड पार्षद के जरिए उपाध्यक्ष पद तक पहुंचने की रणनीति बना रहे हैं.

नये चेहरों की भी एंट्री तय:

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार सामान्य सीटों पर नये और पुराने चेहरों का जबरदस्त टकराव देखने को मिलेगा. अनुभवी नेताओं के मैदान में उतरने से जहां मुकाबला कड़ा होगा, वहीं नये प्रत्याशियों के लिए भी यह खुद को साबित करने का बड़ा मौका होगा.

चुनावी माहौल हुआ रोचक:

कुल मिलाकर अध्यक्ष पद के आरक्षण और वार्ड से चुनाव की खुली छूट ने चक्रधरपुर नगर परिषद चुनाव को पूरी तरह नयी दिशा दे दी है. अब असली जंग सिर्फ अध्यक्ष पद के लिए नहीं, बल्कि हर उस वार्ड में होगी, जो भविष्य के उपाध्यक्ष और सत्ता संतुलन की कुंजी साबित हो सकती है.

जनरल वार्ड बने ‘हॉट सीट’

किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ने की छूट मिलने के बाद प्रत्याशियों की नजर उन वार्डों पर टिकी है, जिसे अनारक्षित (सामान्य) रखा गया है. इनमें वार्ड संख्या 5, 7, 9, 10, 12 और 17 प्रमुख रूप से शामिल हैं. इन छह वार्डों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. माना जा रहा है कि इन वार्डों में इस बार मुकाबला बेहद रोमांचक होगा.

आरक्षण की श्रेणी

– अनारक्षित (सामान्य) – (अन्य) : वार्ड संख्या : 5, 7, 9, 10, 12, 17

– अनारक्षित (सामान्य) – (महिला) : वार्ड संख्या : 3, 11, 13, 14, 15, 20

– अत्यंत पिछड़ा वर्ग – (अन्य) (वर्ग-1) : वार्ड संख्या : 1, 18

– अत्यंत पिछड़ा वर्ग – (महिला) (वर्ग-1) : वार्ड संख्या : 6, 19

– पिछड़ा वर्ग – (अन्य) (वर्ग-2) : वार्ड संख्या : 4

– अनुसूचित जनजाति – (अन्य) : वार्ड संख्या : 21, 23

– अनुसूचित जनजाति – (महिला) : वार्ड संख्या : 2, 22

– अनुसूचित जाति – (अन्य) : 8

– अनुसूचित जाति – (महिला) : 16

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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