अब शादी-ब्याह में नहीं होगा प्लास्टिक का इस्तेमाल, जानें क्या है बर्तन बैंक
बर्तन बैंक.
चाईबासा में प्रोजेक्ट बदलाव के तहत बर्तन बैंक की शुरुआत, प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल. जानें इसकी पूरी जानकारी.
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित ‘प्रोजेक्ट बदलाव’ के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और किफायती सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ''बर्तन बैंक'' की स्थापना की गई है. यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में एकल-उपयोग प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर अंकुश लगाने और सामुदायिक स्तर पर संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की जिला प्रोग्राम मैनेजर अशियानी मारकी ने बर्तन बैंक की अवधारणा और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी साझा की है.
पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी
उन्होंने बताया - जिले में जेएसएलपीएस के अंतर्गत गठित 75 क्लस्टर लेवल फेडरेशन में बर्तन बैंक का निर्माण किया गया है. इनके माध्यम से गांव और समूह स्तर पर आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. ग्रामीण क्षेत्रों में अमूमन शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक समारोहों के दौरान बड़े पैमाने पर बर्तनों और भोजन पकाने के साधनों की आवश्यकता होती है. बर्तन बैंक के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को डेकची, कढ़ाई, चूल्हा, गैस चूल्हा, दरी तथा भोजन परोसने एवं पकाने से जुड़े सभी आवश्यक बर्तन बेहद उचित और किफायती दरों पर किराए पर उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे ग्रामीणों को महंगे बाजार से बर्तन किराए पर लेने की बाध्यता से मुक्ति मिलेगी है और उनका वित्तीय बोझ भी काफी कम होगा.
प्लास्टिक से फैलने वाले कचरे को समाप्त करना उद्देश्य
बर्तन बैंक का मुख्य उद्देश्य डिस्पोजल बर्तनों और प्लास्टिक से फैलने वाले कचरे को पूरी तरह समाप्त करना है. अक्सर बड़े आयोजनों में थर्माकोल, प्लास्टिक के कप, प्लेट और चम्मचों का भारी उपयोग होता है, जो बाद में गांव के पर्यावरण और भूमि को दूषित करते हैं. बर्तन बैंक की स्थापना से पुनः उपयोग में आने वाले धातु के बर्तनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक स्थायी समाधान तैयार हो सकेगा. डीपीएम अशियानी मारकी ने सभी ग्रामीणों और समूह की दीदियों से अपील की है कि वे प्लास्टिक को अलविदा कहें और बर्तन बैंक की इस पर्यावरण-अनुकूल पहल का अधिक से अधिक लाभ उठाएं. उन्होंने आश्वासन दिया कि संकुल स्तर पर स्थापित बर्तन बैंकों में बर्तन प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और समयबद्ध रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीणों को तुरंत और निर्बाध सेवा मिल सके.
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लेखक के बारे में
By सुनील कुमार सिन्हा
सुनील कुमार सिन्हा वर्ष 1998 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें विशेष रूप से रेल एवं अन्य समसामयिक खबरों की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता प्राप्त है. उन्होंने स्नातक (ग्रेजुएशन) की शिक्षा प्राप्त की है. अपने लंबे अनुभव, निष्पक्ष दृष्टिकोण और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के माध्यम से उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी एक विश्वसनीय पहचान बनाई है.
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