Chaibasa News : दलमा अभ्यारण्य से पांच औषधीय पौधे लुप्तप्राय
मानसिक रोगों के इलाज में कारगर ‘साइकोएक्टिव’ पौधों पर किया शोध
चाईबासा. कोल्हान विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग में शुक्रवार को शोध की गुणवत्ता को रेखांकित करने वाली पीएचडी ओपन वाइवा का आयोजन किया गया. शोधार्थी पियाली पॉल ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ दारा सिंह गुप्ता के निर्देशन में अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया. उनके शोध ने झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य की औषधीय संपदा को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किये हैं.
शोध का विषय:
पियाली पॉल का शोध झारखंड के दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य की चुनी हुई प्रजातियों के साइकोएक्टिव फ्लोरा और फाइटोकेमिकल एनालिसिस पर आधारित था. इसमें उन्होंने मनो-सक्रिय (साइकोएक्टिव) औषधीय पौधों का गहन वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया. इन पौधों का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य, दर्द निवारण और तंत्रिका संबंधी समस्याओं के उपचार में किया जा सकता है.व्यावसायिक लाभ और खेती का सुझाव:
पियाली पॉल ने बताया कि इन पौधों की खेती और संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि बाजार में इनके वाणिज्यिक उपयोग से स्थानीय स्तर पर बड़ा आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है. उन्होंने इनके व्यवस्थित संरक्षण को एक गंभीर विषय के रूप में प्रस्तुत किया. वाइवा में एक्सटर्नल परीक्षक के रूप में रांची विवि के पूर्व एचओडी प्रोफेसर डॉ ज्योति कुमार उपस्थित रहे. डीन, फैकल्टी ऑफ साइंस, डॉ कृष्णा प्यारे ने भी स्नातकोत्तर विभाग की छात्राओं एवं शोधार्थियों को संबोधित किया. मौके पर विज्ञान संकाय के प्रोफेसर, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.पियाली पॉल ने बताया कि इन पौधों की खेती और संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि बाजार में इनके वाणिज्यिक उपयोग से स्थानीय स्तर पर बड़ा आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है. उन्होंने इनके व्यवस्थित संरक्षण को एक गंभीर विषय के रूप में प्रस्तुत किया. वाइवा में एक्सटर्नल परीक्षक के रूप में रांची विवि के पूर्व एचओडी प्रोफेसर डॉ ज्योति कुमार उपस्थित रहे. डीन, फैकल्टी ऑफ साइंस, डॉ कृष्णा प्यारे ने भी स्नातकोत्तर विभाग की छात्राओं एवं शोधार्थियों को संबोधित किया. मौके पर विज्ञान संकाय के प्रोफेसर, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.
ये पौधे तंत्रिका तंत्र की बीमारियों के लिए रामबाण :
शोध के दौरान यह चिंताजनक निष्कर्ष सामने आया कि अध्ययन के लिए चयनित 5 औषधीय पौधे लुप्तप्राय स्थिति में पहुंच चुके हैं. इन पौधों की संरक्षण की जरूरत है. इन पौधों में मौजूद रसायनों की जांच के लिए जीसी-एमएस और एचएलपीसी जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया. शोध में पाया गया कि ये पौधे तंत्रिका तंत्र की बीमारियों के लिए रामबाण साबित हो सकते हैं, बशर्ते इनका उपयोग नियंत्रित और अल्पमात्रा में किया जाये. शोधार्थी ने इन पौधों के अत्यधिक सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति भी वैज्ञानिक आधार पर सचेत किया है.
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