Chaibasa News : गुरुजी के प्रयास से झारखंड अस्तित्व में आया : डॉ विश्वास

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 05 Aug 2025 10:58 PM

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नोवामुंडी कॉलेज. शोकसभा कर दो मिनट का मौन रखा गया

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नोवामुंडी. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर मंगलवार को नोवामुंडी कॉलेज में शोकसभा का आयोजन किया गया. प्राचार्य डॉ मनोजीत विश्वास की अध्यक्षता में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया. प्राचार्य डॉ विश्वास ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जमीन से जुड़े नेता थे. उनके अथक प्रयासों के कारण ही झारखंड अस्तित्व में आया. वे जीवन भर आदिवासियों, दलितों और गरीबों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे. इस अवसर पर प्रो साबिद हुसैन, डॉ मुकेश सिंह, दिवाकर गोप, राजकरण यादव, कुलजिंदर सिंह, नरेश पान, धनीराम राम महतो, संतोष पाठक, तन्मय मंडल, डॉ क्रांति प्रकाश, लक्ष्मी मोदक, हीरा चातोम्बा, सुमन चातोम्बा, प्रतिभा सोमकुंवर टीकाराम, मंजू लता, दयानिधि प्रधान, जगन्नाथ प्रधान, रामबहादुर चौधरी, गुरुचरण बलमुचू, अनिमेष बिरुली आदि उपस्थित थे.

अधिवक्ताओं ने दिशोम गुरु को दी श्रद्धांजलि

जिला बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं द्वारा शोकसभा का आयोजन किया गया. इसमें अधिवक्ताओं द्वारा उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी. उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना की गयी. बार एसोसिएशन के महासचिव फादर अगस्तीन कुल्लू एवं अधिवक्ता राजाराम गुप्ता ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया. कहा कि गुरुजी हमारे राज्य के पथ प्रदर्शक थे. झारखंड निर्माण में गुरुजी की अहम भूमिका थी. मौके पर निरंजन प्रसाद साव, सतीश चंद्र महतो, कैसर परवेज, किशोर महतो, गौरांग महतो, सरफराज खान, आशीष सिन्हा, सत्यव्रत ज्योतिषी, बैद्यनाथ आयकत, अभिषेक राय समेत काफी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे.

गुरुजी का मार्गदर्शन हमें सदा सही दिशा देगा : दुर्गा देवगम

नोवामुंडी स्थित आदिवासी एसोसिएशन क्लब में मंगलवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा देवगम की अध्यक्षता में शोकसभा की गयी. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी गयी. गुरुजी की तस्वीर पर पुष्प अर्पण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा देवगम ने कहा कि गुरुजी का जाना झारखंड के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उनका जीवन संघर्ष, सेवा और नेतृत्व से परिपूर्ण रहा. गुरु जी का मार्गदर्शन हमें सदैव दिशा दिखाता रहा रहेगा. मौके पर केंद्रीय सदस्य अभिषेक सिनकु, सचिव आलोक अजय टोपनो .संजू सचिव सोनू हरिवंश, सलीम, आनंद सिंह,हीरा मोहन पूर्ति, कामरान राजा, नितेश करूवा,शमशाद आलम ,रिमू बहादुर, विपिन पूर्ति ,मोहम्मद तबारक , शेख करीम, मनोज लागूरी,मनीष करूवा,कृष्ण दास, एरियश कुजूर ,सलमान अली ,राजू पूर्ति, सुबोध, गोवर्धन चौरसिया ,शंकर बोबोनगा ,वीर सिंह मुंडा ,शंभू हंसदा ,प्रकाश बार जो ,किसन बोबोनगा, पार्वती किड्डो, नरेंद्र ,रोहित पांडे, विवेक महतो ,काजल हेम्ब्रं, प्रकाश बारजो आदि मौजूद थे.

‘दिशोम गुरु का सपना था कि झारखंड का युवा शिक्षित हो’

शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत एस्पायर संस्था ने सदर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) वालंटियर्स के रूप में योगदान देने वाले 144 युवाओं को सम्मानित किया. इसके लिए तुइबीर पंचायत भवन में प्रखंड युवा सम्मेलन किया गया. युवाओं को मतकमहातु पंचायत मुखिया जुलियाना देवगम, पूर्व वार्ड पार्षद बेला जेराई और उत्क्रमित मध्य विद्यालय नीमडीह के प्रधानाध्यापक कृष्णा देवगम के हाथों प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया. मुखिया जुलियाना देवगम ने कहा कि एस्पायर संस्था के युवा वंचित बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़कर रोचक तरीके से शिक्षा प्रदान करने का काम कर रहे हैं. शिक्षक कृष्णा देवगम ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग एस्पायर संस्था अच्छे से कर रही है. उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सपना था कि झारखंड के हर युवा शिक्षित हो, नशा से दूर रहें और प्रकृति प्रेमी बनें. बेला जेराई ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ना वर्तमान समय की मांग है. संस्था के प्रखंड समन्वयक गुरुचरण बानरा ने कहा कि युवाओं का शिक्षण कार्य से जुड़कर जीवन का अहम कड़ी है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर श्रद्धांजलि दी गयी. मौके पर रायदास उरांव, मनीषा सिंह कुंटिया, विकास नाग, सुरेश सावैंया, लक्ष्मी सावैयां, करिश्मा सिंकू आदि उपस्थित थे.

गुरुजी के अधूरे सपने को पूरा करने का लिया संकल्प

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर खरसावां के झामुमो कार्यालय में शोकसभा का आयोजन किया गया. मौके पर दिवंगत शिबू सोरेन की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी. दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया. बासंती गागराई ने कहा कि दिवंगत शिबू सोरेन ने न केवल झामुमो की नींव रखी, बल्कि एक समतामूलक और स्वाभिमानी झारखंड की कल्पना को साकार किया. उनकी सादगी, सिद्धांतवाद और संघर्ष की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है. अब उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही अब हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है. गुरुजी का निधन अपूरणीय क्षति है. इस दौरान कालीचरण बानरा, नायडू गोप, भवेश मिश्रा, अनूप सिंहदेव, अरुण जामुदा, रानी हेंब्रम, खिरोद प्रामाणिक, मो सलाम, खिरोद महतो, रमेश महतो, राजू मुस्ताक, धनु मुखी, सुरेश मोहंती, सोवित दाश समेत काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे.

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