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World Earth Day 2024: बोकारो में हरियाली तो बढ़ी, लेकिन भूमिगत जल की स्थिति गंभीर, नदियां प्रदूषित

Updated at : 22 Apr 2024 7:55 AM (IST)
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दामोदर (बुढ़ीडीह-वास्तेजी) तट के पास लगी आग

दामोदर (बुढ़ीडीह-वास्तेजी) तट के पास लगी आग

World Earth Day 2024: 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस है. इस वर्ष की थीम प्लेनेट बनाम प्लास्टिक है. बोकारो में हरियाली तो बढ़ी है, लेकिन भूमिगत जल की स्थिति गंभीर है. नदियां प्रदूषित हैं.

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World Earth Day 2024: बोकारो, सीपी सिंह-बोकारो जिले का नाम नदी पर आधारित है. प्राकृतिक रूप से जिला समृद्ध है. 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस है. इस वर्ष की थीम प्लेनेट बनाम प्लास्टिक रखी गयी है. बोकारो में पृथ्वी को सबल बनाने वाली प्राकृतिक इकाई पर प्रदूषण का ग्रहण छाया हुआ है. एक ओर जंगल में इजाफा तो जरूर हुआ है, लेकिन भूमिगत जल के मामले में स्थिति गंभीर हुई है. अप्रैल माह में ही जिस तरह से गर्मी ने परेशान किया है, इससे विश्व पृथ्वी दिवस की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है.

गरगा नदी व दामोदर नद की स्थिति बद से बदतर
बोकारो में अगर बात नद-नदी की करें तो यहां स्थिति खराब है. बोकारो जिले में दामोदर नद व गरगा नदी प्रदूषण की मार झेल रही हैं. पानी पीने योग्य तो दूर, नहाने लायक भी नहीं है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों की मानें तो गरगा व दामोदर दोनों की स्थिति बद से बदतर है. रिपोर्ट में तेलमच्चो पुल के पास गरगा नदी के पानी का सैंपलिंग किया गया था. इसमें गरगा नदी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 5.5 से 7.2 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला. जबकि पानी में किसी भी हाल में इसकी मात्रा 05 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसी तरह बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 4.3 से 4.9 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला, जो कि किसी भी हाल में 03 मिली ग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए.

बोकारो के वन क्षेत्र में हुई है 2.45 वर्ग किमी की वृद्धि
भूजल स्तर व नदी प्रदूषण के इतर जंगल क्षेत्र में बोकारो ने उपलब्धि हासिल की है. बोकारो में हरियाली तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी मानक दर से पीछे है. इंडियन फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 की माने तो जिला के वन क्षेत्र में 2.45 वर्ग किलोमीटर का इजाफा हुआ है. वर्तमान में 576 वर्ग किमी में जंगल है, जो कि भौगोलिक क्षेत्रफल का 19.98 प्रतिशत है. जबकि, पर्यावरण के लिहाज से कुल भूमि का 33 प्रतिशत हिस्सा जंगल होना चाहिए. जिला में 60.99 वर्ग किमी अति घना जंगल, 231.94 वर्ग किमी मध्यम जंगल व 283.07 खुला क्षेत्र का जंगल है. हालांकि 2023 की रिपोर्ट अभी आनी शेष है.

खतरे की घंटी: भविष्य उपयोग के लिए मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल
भारत सरकार की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार बोकारो जिला की स्थिति बिगड़ती ही जा रही है. जिला में भविष्य में उपयोग के लिए मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल ही बचा है. एक साल में बोकारो जिला में भविष्य उपयोग के लिए भूजल की स्थिति में 8152.23 एचएएम की कमी आयी है. 2022 की रिपोर्ट की मानें तो बोकारो जिला में 20653.26 एचएएम भविष्य उपयोग के लिए था. जबकि 2023 की रिपोर्ट में यह घटकर 12501.03 एचएएम हो गया है. एक साल में भूजल दोहन का चरण 30 से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया.

भूजल रिचार्ज में आयी कमी चिंता का सबब
बोकारो लिए चिंता का कारण सिर्फ यह नहीं है कि भविष्य उपयोग के लिए भूजल में कमी आ रही है. असली चिंता का कारण यह है कि भूजल रिचार्ज भी नहीं हो रहा है. 2022 के मुकाबले 2023 में 8986.74 एचएएम की कमी आयी है. 2023 में कुल 22520.76 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ है, जबकि 2022 में यह 31507.50 एचएएम था. 2023 के रिपोर्ट के अनुसार मानसून समय में वर्षा से 18003.58 एचएएम व अन्य स्त्रोत से 1458.23 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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