Bokaro News : जिला में नहीं है एक भी कचरा निस्तारण केंद्र

Bokaro News : बोकारो जिला में एक भी कचरा निस्तारण केंद्र नहीं है.
बोकारो जिला को झारखंड में समृद्ध माना जाता है. जिला में योजनाबद्ध तरीका से बसाया गया बोकारो स्टील सिटी है. नागरीय प्रबंधन के लिए चास नगर निगम व फुसरो नगर परिषद है. बावजूद इसके जिला में एक भी कचरा निस्तारण केंद्र नहीं है. कचरा जहां-तहां डंप किया जाता है. जरूरत के हिसाब कचरा डंप किया जाता है. जिला में हर दिन हजारों किलो कचरा घर व बाजार से निकलता है. लेकिन, इसका सही तरीका से निस्तारण नहीं होता.
बोकारो इस्पात शहर क्षेत्र के सेक्टर 06 से सेक्टर 11 जाने वाली मुख्य सड़क की बायीं तरफ कचरा डंप किया जाता है. बीएसएल लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में कचरा गिराता है. तमाम सेक्टर से कचरा उठा कर यहां डंप किया जाता है. हर माह 90 से 100 एमटी कचरा का उठाव शहर से होता है. इतना सब के बाद भी जमीनी हकीकत यह है कि कचरा का सिर्फ उठाव होता है, निस्तारण नहीं. कचरा को डंप कर उसमें आग लगा दी जाती है. इसके कारण पूरे दिन में धुआं निकलता रहता है. सुबह-सुबह धुआं से धुंध जैसा छा जाता है. इससे विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है. बीएसएल की ओर से 2021 में कचरा निस्तारण प्लांट बनाने की दिशा में पहल शुरू हुई थी. लेकिन, बस पहल ही बन कर रह गयी. चास नगर निगम क्षेत्र का कचरा धनबाद जाने वाली फोर लेन सड़क किनारे फेंका जाता है. बड़ी बात यह कि वर्तमान में चास नगर निगम का जो कार्यालय है, उस जमीन को भी कचरा से ही बराबर किया गया है. चास नगर निगम क्षेत्र से हर माह 120-130 एमटी कचरा का उठाव होता है. सड़क किनारे कचरा डंप होने से वहां से गुजरना दुर्गंध के कारण मुश्किल है. बारिश होने पर स्थित बदतर हो जाती है. चास ननि क्षेत्र में कचरा निस्तारण केंद्र बनाने को लेकर योजना तो कई बार बनी. 2015 में इस दिशा में 10 एकड़ भूमि चिन्हित हुई. लेकिन, विवाद के कारण काम नहीं बना. इसके बाद 2018 में कालापत्थर के पास जगह चिन्हित हुई. लेकिन फिर विवाद हुआ. वर्तमान में अलकुशा के पास कचरा निस्तारण केंद्र के लिए जगह चिन्हित है, वहां बाउंड्री वाल का निर्माण हुआ है.फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के सिंहनगर के पास कचरा डंप किया जा रहा है. हालांकि, स्टाफ क्वार्टर के पीछे व अमलो के पास भी कचरा डंप होता रहा है. जरूरत के अनुसार परिषद कचरा डंप क्षेत्र में परिवर्तन किया जाता है. फुसरो नगर परिषद से हर माह 60-80 एमटी कचरा निकलता है. जानकारी के मुताबिक नगर परिषद के मकोली क्षेत्र में कचरा निस्तारण केंद्र के लिए आठ एकड़ जमीन चयनित की गयी है. लेकिन, यहां वन विभाग ने ऑब्जकेशन लगा दिया है.
कचरा में आग लगने से निकलती है कई जहरीली गैस
जनरल फिजिशियन डॉ रणधीर सिंह (ईएसआईसी-बोकारो के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी) ने बताया : कचरा में आग लगाने से हानिकारक गैस मिथेन, सल्फर, कार्बन डायआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड निकलती हैं, जो बहुत नुकसानदेह होती है. साथ ही ओजोन परत को क्षति पहुंचाती है. इससे कैंसर, जेनेटिक डिजीज, चर्म रोग, सांस की बीमारी, एनिमिया, दांत, दमा, टीबी जैसी बीमारी होती है.खुद नियम तोड़ रहा है प्रशासन
01 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 के तहत, कचरे को स्रोत (घर/कार्यस्थल) पर ही 04 भागों में अलग करना अनिवार्य है. इसमें गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष कचरा शामिल है. खुले में कूड़ा फेंकने या जलाने पर प्रतिबंध है और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. नियमों के उल्लंघन पर, जैसे कि कचरा अलग न करना या खुले में फेंकने पर नगर निगम द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है. यह अलग बात है कि नगर निगम या नगर परिषद खुद कचरा खुला में फेंक रहा है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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