फुसरो. पेटरवार प्रखंड अंतर्गत पिछरी उत्तरी पंचायत में रविवार को प्रभात खबर, आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर लोगों ने अपनी समस्याओं ने अवगत कराया. कहा कि बड़का तालाब का अस्तित्व नष्ट होता जा रहा है. इसका जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण जरूरी है. वर्तमान में यह तालाब जलकुंभी से पट गया है. लेकिन, जलकुंभी से ज्यादा दुर्गति स्थानीय लोगों द्वारा कर दी गयी है. कुछ लोगों द्वारा अपने घरों का गंदी पानी मुख्य सड़क से बहा दिया जाता है और यह गंदा पानी तालाब में जाकर मिल जाता है. इसके कारण तालाब का पानी दूषित हो गया है. सीसीएल और झारखंड सरकार की लाखों रुपये की योजनाओं से तालाब की चहारदीवारी, सफाई व मिट्टी कटाई का काम वर्षों पूर्व कराया गया था. लेकिन जैसे-तैसे काम हुआ. बीते वर्ष तालाब के जीर्णोद्धार के लिए सीसीएल के कायाकल्प मद से टेंडर निकाला गया था. लेकिन विवाद के कारण टेंडर रद्द हो गया. ग्रामीणों ने बताया कि पिछरी पंचायत होकर की जा रही कोयला व छाई की ओवरलोड ट्रांसपोर्टिंग के कारण हो रहे प्रदूषण से हमलोग परेशान हैं. लोग बीमारी हो रहे हैं. आसपास के खेत खेती लायक नहीं रह गये. आंदोलन करते हैं, लेकिन समस्या दूर नहीं होती है. ट्रांसपोर्टिंग में लगे हाइवा के कारण दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं. इस सड़क पर दर्जनों लोगों की मौत हाइवा की चपेट में आने से हो चुकी है.
क्या कहते हैं लोग
मुखिया कल्पना देवी ने कहा कि तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर सीसीएल ढोरी के पूर्व जीएम, जिला अधिकारी व कई जनप्रतिनिधियों से वार्ता की. लेकिन बस आश्वासन ही मिला. रामभजन लायक ने कहा कि डीएमएफटी फंड से बड़काबांध का जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण कराने को लेकर 30 मार्च को गिरिडीह सांसद को ज्ञापन सौंपा गया है. सांसद ने आश्वस्त किया है. पंकज कुमार मिश्रा ने कहा कि तालाब की हालत से जनप्रतिनिधियों व सीसीएल अधिकारी को अवगत कराया गया है. लेकिन आज तक किसी ने पहल नहीं की. तालाब का अपना अस्तित्व मिटने के कगार पर है. संतोष दिगार ने कहा कि तालाब से इतनी दुर्गंध आती है कि सामने खड़ा होना मुश्किल हो जाता है. कई जनप्रतिनिधियों से बात की गयी, लेकिन दस वर्षों में कोई पहल नहीं हुई. मुकेश प्रसाद साव ने कहा कि तालाब का जीर्णोद्धार कराने के लिए किसी के द्वारा कोई पहल नहीं हुई है. यह हमारे गांव की दुर्भाग्य की बात है. कुछ माह पूर्व डीडीसी आये थे और तालाब की स्थिति को देखकर गये हैं. कल्पना देवी ने कहा कि चुनावों के समय कई नेता आये तो उन्हें भी तालाब का जीर्णोद्धार कराने के बारे में कहा गया. लेकिन किसी ने पहल नहीं की. रितिका देवी ने कहा कि तालाब की दुर्दशा के कारण प्रतिमाओं का विसर्जन भी यहां नहीं किया जाता है. इसके लिए डेढ़ से दो किमी दूर दामोदर नदी जाना पड़ता है. भोंदु दिगार ने कहा कि सरकार द्वारा जल संचयन के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं चलायी जा रही है. लेकिन इस तालाब की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

