Bokaro News : स्वच्छता पैमाने पर ग्रामीण क्षेत्र दिखा रहे हैं बोकारो को राह

Bokaro News : चार साल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व तरल अपशिष्ट प्रबंधन मामले में जिला में अप्रत्याशित वृद्धि
Bokaro News : सीपी सिंह, बोकारो. स्वच्छता क्षेत्र में बोकारो का ग्रामीण क्षेत्र जीरो से हीरो बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है. एक अप्रैल 2022 की तुलना में 19 मार्च 2026 यानी लगभग चार साल में बोकारो ने विभिन्न मापदंड में लंबी छलांग लगायी है. स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण 2.0 के तहत बोकारो के 95 प्रतिशत से अधिक गांव ने खुद को ओडीएफ प्लस घोषित किया है. जिले में कुल 691 गांव हैं, इनमें से 670 गांव ने खुद को ओडीएफ प्लस घोषित किया है. जबकि एक अप्रैल 2022 को यह संख्या मात्र आठ थी. 211 गांव ने खुद को स्वच्छता क्षेत्र में ओडीएफ प्लस मॉडल विलेज के रूप में घोषित किया है. अप्रैल 2022 को यह संख्या मात्र एक थी. जिला के विभिन्न गांव में अपशिष्ट प्रबंधन की संख्या 242 हो गयी है. जबकि, अप्रैल 2022 में यह मात्र एक थी. इसी तरह तरल अपशिष्ट प्रबंधन की संख्या 11 से बढ़कर 670 हो गयी है. गांव के इतर शहरी निकाय क्षेत्र में कुछ खास हासिल नहीं हुआ है. जिला के चास नगर निगम व फुसरो नगर परिषद क्षेत्र में ना तो तरल अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में कुछ हुआ और ना ही सॉलिड अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में कुछ हुआ है. जबकि, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी क्षेत्र में भी इन दोनों योजना पर काम करना है. कभी जगह अभाव तो कभी तकनीकी कारणों से दोनों जगह मामला अटका हुआ है. हालांकि, फुसरो नगर परिषद में तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्लांट बन रहा है. कहा जा सकता है कि स्वच्छता के मामले में जिले को ग्रामीण क्षेत्र ही राह दिखा रहे हैं. विभिन्न गांवों में 934 ड्रेनेज फैसलिटी विकसित जिला के 468 गांव में कचरा कलेक्शन व पृथक्करण शेड का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण 2.0 के तहत हुआ है. योजना के तहत विभिन्न गांव में 4366 सोख्ता गड्ढा का निर्माण किया गया है. 4044 सामुदायिक खाद गड्ढा का निर्माण किया गया है. 508 कचरा संग्रहण व स्थानांतरण वाहन का इस्तेमाल जिला में किया जा रहा है. विभिन्न गांव में मिशन के तहत 934 ड्रेनेज फेसिलिटी विकसित की गयी है. जिला में दो गोबरधन प्लांट भी बनाया गया है. चंद्रपुरा नंबर एक, चास फिसड्डी ग्रामीण स्वच्छता मामले में अगर ओडीएफ प्लस मॉडल गांव प्रतिशत के लिहाज से देखा जाये तो चंद्रपुरा जिले में पहले पायदान पर है. जबकि, चास सबसे पीछे है. ओडीएफ प्लस मॉडल के लिहाज से चंद्रपुरा का 64.29 %, पेटरवार का 44.44, कसमार का 42.86, बेरमो का 33.33, जरिडीह का 28.57, गोमिया का 25.71, नावाडीह का 21.88, चंदनकियारी का 5.71 व चास प्रखंड का शून्य प्रतिशत गांव ओडीएफ प्लस मॉडल वेरिफाइड है. जिले में 57 ओडीएफ प्लस मॉडल वेरिफाइड गांव है. इनमें से 44 पहले वेरिफिकेशन में सफल हुए हैं. क्या होता है ओडीएफ प्लस मॉडल गांव वैसा गांव जो अपनी ओडीएफ स्थिति को बनाए रखे हुए है. जिसमें ठोस कचरा प्रबंधन व तरल कचरा प्रबंधन दोनों की व्यवस्था है. दृश्य स्वच्छता का पालन करता है, यानी सार्वजनिक स्थानों पर न्यूनतम कूड़ा, न्यूनतम रुका हुआ अपशिष्ट जल, कोई प्लास्टिक कचरा डंप नहीं हो. ओडीएफ प्लस सूचना, शिक्षा व संचार संदेश को प्रदर्शित करता है.
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