भगवान महावीर के उपदेश सार्वकालिक व सार्वभौमिक

Updated at : 20 Apr 2024 11:55 PM (IST)
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भगवान महावीर के उपदेश सार्वकालिक व सार्वभौमिक

बोकारो-चास का जैन समाज आज मानयेगा भगवान महावीर का 2623वां जन्मोत्सव, जैन मिलन केंद्र-सेक्टर 02 डी बोकारो में सामूहिक रूप से हाेगा आयोजन

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बोकारो. बोकारो-चास का जैन समाज ‘जीओ और जीने दो’ का संदेश देने वाले भगवान महावीर का 2623वां जन्मकल्याणक महोत्सव व भगवान महावीर का 2550 वां निर्वाणोत्सव वर्ष आज यानी 21 अप्रैल को मनाएगा. जैन मिलन केंद्र-सेक्टर 02 डी बोकारो में सामूहिक रूप से जन्मोत्सव मनाया जाएगा. सुबह 11:40 बजे से दोपहर एक बजे तक साध्वी महाराज का प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम व शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट छात्रों का सम्मान समारोह होगा. सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक रक्तदान शिविर लगेगा. दोपहर एक बजे से जीमण होगा. जैन मिलन के अध्यक्ष संजय बैद व महामंत्री आलोक जैन ने शनिवार को बताया कि तैयारी पूरी हो चुकी है. कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव 21 अप्रैल को पूरे विश्व में एक साथ मनाया जाएगा.

उपदेश हमेशा प्रासंगिक : श्याम सुंदर जैन

श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के झारखंड प्रांतीय महामंत्री श्याम सुंदर जैन- बोकारो ने कहा : तीर्थंकर भगवान केवल ज्ञानी होते हैं. उनके ज्ञान में तीनों लोक के तीनों काल के समस्त पदार्थों की समस्त पर्याय युगपत झलकती हैं. इसलिए उनके उपदेश हमेशा प्रासंगिक होते हैं. वे सार्वकालिक होते हैं, सार्वभौमिक होते हैं. अहिंसा तीन काल में हमेशा अहिंसा ही रहेगी, उसका कभी स्वरूप नहीं बदलने वाला. भगवान महावीर ने अपने जीवन में यह कभी नहीं कहा कि हम सब एक हैं, बल्कि सदैव यही कहा कि हम सब एक जैसे है. उनके इस समता मूलक उपदेश ने प्राणी मात्र के हृदय में सहअनुभूति का भाव जागृत कर दिया- परस्परोपग्रहो जीवानाम्. भगवान ने कहा था कि किसी भी प्राणी को कष्ट मत पहुंचाओं और दूसरों के साथ भी ठीक ऐसा ही व्यवहार करो, जैसा तुम स्वयं दूसरों से अपने प्रति अपेक्षा करते हो.

महावीर का अनेकांत का सिद्धांत जैन दर्शन को सर्व धर्मो में गौरवपूर्ण स्थान प्रदत कराता है

श्याम सुंदर जैन ने बताया कि भगवान ने कहा कि आप अपने लिए उतनी ही वस्तुओं का संग्रह करें, जितनी कि आपकी आवश्यकता हो. आपके द्वारा आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह दूसरों के अधिकार को छीनता है और इससे समाज के बीच वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है. भगवान ने कहा कि जो मैं कहता हूं, उसे आप अपने तर्क की कसौटी पर कसकर अनुभूति से स्वीकार करना, अन्यथा यह सत्य तुम्हारा नहीं बन पाएगा. भगवान महावीर का अनेकांत का सिद्धांत जैन दर्शन को सर्वधर्मों में गौरवपूर्ण स्थान प्रदत कराता है. भगवान ने सद गृहस्थों के लिए पंचाणुव्रत का उपदेश दिया है. उल्लेखनीय कि भगवान महावीर का निर्वाण संवत देश और दुनिया के समस्त संवतों में सबसे प्राचीन है – 2550 वर्ष. महावीर प्रभु ने 50 से अधिक देश में पद विहार कर धर्म का उपदेश दिया. उनका का उपदेश हर काल में प्रासंगिक है. मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है…जीओ और जीने दो…अहिंसा परमो धर्म…जैसे उनके परोपकारी संदेश सदैव जीवंत रहेंगे.

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