रांची में रामनवमी से पहले क्यों निकलता है मंगलवारी जुलूस, जानिए परंपरा

Updated at : 15 Mar 2026 9:26 AM (IST)
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Ranchi Ram Navami Julus

रांची में रामनवमी जुलूस की परंपरा

Ranchi Ram Navami Julus: रांची में रामनवमी से पहले निकलने वाला मंगलवारी जुलूस करीब 50 साल पुरानी परंपरा है. इसमें सैकड़ों अखाड़े शामिल होते हैं और यह मुख्य रामनवमी शोभायात्रा की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

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Ranchi Ram Navami Julus: रांची में रामनवमी से पहले निकलने वाला मंगलवारी जुलूस शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. हालांकि इसकी शुरुआत कब हुई, इसका कोई स्पष्ट और प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा करीब 50 वर्षों से भी अधिक पुरानी है.

रामनवमी से पहले हर मंगलवार को निकलने वाला यह जुलूस शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना देता है. विभिन्न अखाड़े, धार्मिक समितियां और युवा संगठन इसमें भाग लेते हैं. यह जुलूस मुख्य रामनवमी शोभायात्रा की तैयारी का भी एक अहम मंच माना जाता है, जहां अखाड़े अपने शस्त्र संचालन, पारंपरिक कला और संगठन क्षमता का प्रदर्शन करते हैं.

सुकरा उरांव का रहा विशेष योगदान

रांची में इस परंपरा को जीवित रखने में डंगरा टोली के सुकरा उरांव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वे लगभग 50 वर्षों तक लगातार हर मंगलवारी जुलूस में अपने अखाड़े के साथ शामिल होते रहे. पहले मंगलवारी से लेकर अंतिम मंगलवारी तक उनकी उपस्थिति इस परंपरा की पहचान बन गई थी.

सुकरा उरांव श्री महावीर मंडल रांची के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे. धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण शहर में उनकी विशेष पहचान थी. उनके निधन के बाद हंगरा टोली क्षेत्र में मंगलवारी जुलूस की परंपरा लगभग समाप्त हो गई.

कई संगठनों और अखाड़ों की भागीदारी

मंगलवारी जुलूस को आगे बढ़ाने में कई संगठनों और अखाड़ों का योगदान रहा है. इनमें नवयुवक समिति ग्वाला टोली और बाल मित्र मंडल प्यादा टोली (शिव मंदिर मैकी रोड) प्रमुख रूप से शामिल हैं.

इसके अलावा कई अन्य संस्थाएं भी इस परंपरा का हिस्सा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • श्री चैती दुर्गा चूजा समिति
  • सांस्कृतिक कला संगम, सुभाष चौक
  • भारतीय नवयुवक संघ, अल्बर्ट एक्का चौक
  • महावीर मंदिर, हजारीबाग रोड
  • नवकला महावीर मंदिर, लालपुर
  • श्री महावीर मंडल, कोकर
  • श्री महावीर मंडल, इमली टोला

इन संगठनों ने वर्षों तक इस जुलूस को भव्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है.

हजारों अखाड़ों की भागीदारी

रांची में रामनवमी महोत्सव के दौरान करीब 1500 अखाड़े भाग लेते हैं. हालांकि बदलते समय के साथ कई अखाड़ों की भागीदारी मंगलवारी जुलूस में कम हुई है, लेकिन इसके बावजूद यह परंपरा आज भी शहर की धार्मिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर रामनवमी के उत्सव को और भी भव्य बनाते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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