कसमार, कसमार क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आयी है. राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की शुक्रवार को हुई बैठक में कसमार-बरलंगा पथ निर्माण से जुड़ी वन भूमि उपयोग, मुआवजा और अंतर विभागीय हस्तांतरण को लेकर स्वीकृति दे दी गयी है. लंबे समय से वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण यह सड़क परियोजना अधूरी थी, लेकिन अब इसके पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. कैबिनेट ने पथ निर्माण विभाग अंतर्गत बरलंगा-नेमरा-पिरगुल-कसमार (एनएच-23 से पश्चिम बंगाल सीमा तक) कुल 27.306 किलोमीटर लंबाई के पथ के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण की प्रगतिशील योजना को मंजूरी दी है. इसके साथ ही वन भूमि, गैर-मजरुआ, खासमहल, जंगल-झाड़ी और डीम्ड फॉरेस्ट श्रेणी की जमीन के हस्तांतरण एवं मुआवजा भुगतान को भी स्वीकृति मिली है. इस परियोजना का कार्य कर रही एजेंसी गंगा कंस्ट्रक्शन के अधिकारी नरेंद्र पांडेय ने कहा कि लगभग चार किलोमीटर का कार्य वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण रुका हुआ था. अब निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा और एक वर्ष के भीतर सड़क को तैयार कर लिया जायेगा. इस निर्णय से कसमार, जरीडीह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खुशी की लहर है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क अधूरी रहने से उन्हें रोजमर्रा के आवागमन, इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. अब सड़क के पूर्ण होने से न केवल दूरी कम होगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी. झामुमो प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार हेंब्रम समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने फैसले का स्वागत किया है
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