Bokaro News : सादगी, संघर्ष और समर्पण का दूसरा नाम थे छत्रुराम महतो

Published by : ANAND KUMAR UPADHYAY Updated At : 16 Nov 2025 10:31 PM

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Bokaro News : छत्रुराम महतो की प्रथम पुण्यतिथि पर विशेष : पेटरवार प्रखंड के गागी गांव में एक साधारण परिवार से जन्मे छत्रुराम महतो ने अपनी जीवनयात्रा की शुरुआत शिक्षक के रूप में की.

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दीपक सवाल/नागेश्वर महतो, कसमार/पेटरवार, राजनीति अक्सर शोर, चमक और शक्ति-संघर्ष से भरी दिखायी देती है, पर कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जो शांत प्रवाह की तरह समाज में बदलाव लाते हैं. गोमिया विधानसभा की राजनीति का एक ऐसा ही उज्ज्वल नाम था- छत्रुराम महतो. यह नाम किसी पद या चुनाव का पर्याय मात्र नहीं, बल्कि ईमानदारी, सौम्यता और संघर्षशीलता का प्रतीक था. पेटरवार प्रखंड के गागी गांव में एक साधारण परिवार से जन्मे छत्रुराम महतो ने अपनी जीवनयात्रा की शुरुआत शिक्षक के रूप में की. चॉक और ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे जनसेवा के व्यापक मंच तक पहुंचा. समाज की पीड़ा को समझने की यह निरंतर साधना ही उन्हें राजनीतिक धरातल पर विशिष्ट और विश्वसनीय बनाती गयी.

शिक्षक से समाज सुधारक और फिर जननेता

1950-60 के दशक में जब ग्रामीण इलाकों में शिक्षा मुश्किल और राजनीतिक चेतना सीमित थी, तब युवा छत्रुराम महतो ने देखा कि समाज को बांधकर रखने वाली असमानताएं, रूढ़ियां और राजनीतिक उपेक्षा किस प्रकार लोगों की प्रगति रोक रही हैं. इसी पीड़ा ने उन्हें शिक्षक की भूमिका से आगे बढ़ाकर समाज सुधारक बना दिया. उन्होंने गांव-गांव घूमकर लोगों को संगठित किया, शिक्षा, एकता और राजनीतिक जागरूकता की राह दिखायी. कुर्मी विकास समिति का गठन इसी भावना का विस्तार था, जिसने विशाल सामाजिक आधार तैयार किया और आगे चलकर उन्हें सक्रिय राजनीति की ओर ले गया.

निर्दलीय उम्मीदवार से जनसंघ के नायक तक

उनका पहला चुनावी संघर्ष हार में समाप्त हुआ, पर इस हार ने उनके जनसंपर्क को और मजबूत कर दिया. 1972 में जब वे जनसंघ के टिकट पर विधानसभा पहुंचे, तब पूरे इलाके में एक नयी उम्मीद जगी. लोग बताते हैं कि छत्रुराम महतो चुनाव जीतें या हारें, उनका व्यवहार, उनकी सादगी और जनता के बीच उनकी उपलब्धता कभी नहीं बदली. आपातकाल के दौरान 21 महीनों तक जेल में रहना उनकी प्रतिबद्धता की अग्निपरीक्षा थी. पर उन्होंने इसका कभी राजनीतिक दोहन नहीं किया. हमेशा कहा कि जो हर लड़ाई जनता के लिए लड़े, उसे जेल नहीं, तपस्या समझनी चाहिए. छत्रु बाबू ने बतौर विधायक जो विकास कार्य किए, वे आज भी गोमिया क्षेत्र की पहचान हैं. खासकर तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन स्थापना में उनका योगदान मील का पत्थर है, जिसने गोमिया को राष्ट्रीय पहचान दिलायी. वे भाषण से ज्यादा काम में विश्वास रखते थे.

राजनीति में सादगी और सिद्धांत का उदाहरण

आज के राजनीतिक माहौल में जब शोर, प्रचार और टकराव हावी है, छत्रुराम महतो की राजनीति एक ताजगी देती है. वे कभी जातीय या व्यक्तिगत कटुता की भाषा का उपयोग नहीं करते थे. राजनीति उनके लिए प्रतिद्वंद्विता नहीं, सेवा थी. पांच बार विधायक बने, मंत्री रहे, बोर्ड प्रमुख रहे, पर कभी पद का दंभ नहीं आया. 87 वर्ष की आयु में उनका जाना सिर्फ क्षेत्र की क्षति नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है. आज भी लोग कहते हैं- छत्रुराम बाबू जैसा नेता बहुत बिरले में मिलते हैं. उनके मूल्य सादगी, पारदर्शिता, जनसेवा, ईमानदारी, प्रत्येक वर्ग का सम्मान आज भी राजनीति में प्रकाशस्तंभ की तरह हैं.

पेटरवार में श्रद्धाजंलि सभा आज, जुटेंगे अनेक लोग

छत्रुराम महतो की प्रथम पुण्यतिथि सोमवार को पेटरवार में मनायी जाएगी. भाजपा प्रखंड कार्यालय में दोपहर एक बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जायेगा, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है. आयोजन की जानकारी देते हुए उनके बड़े पुत्र एवं जिप सदस्य प्रह्लाद महतो तथा भाजपा प्रखंड अध्यक्ष रविशंकर जायसवाल ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा में स्व महतो के सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक योगदान और सामाजिक सरोकारों को याद किया जाएगा.

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