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Bokaro News: शारदा सिन्हा के निधन पर बोकारो के कलाकारों ने जताया शोक

Updated at : 06 Nov 2024 10:36 PM (IST)
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Bokaro News: शारदा सिन्हा के निधन पर बोकारो के कलाकारों ने जताया शोक

Bokaro News: कलाकारों ने कहा : संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति, जिले में मिथिला सांस्कृतिक परिषद सहित अन्य संस्थाओं के आयोजित कार्यक्रमों में शारदा सिन्हा ने दी थी प्रस्तुति

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बोकारो, सुप्रसिद्ध लोकगायिका शारदा सिन्हा के निधन पर बोकारो के कलाकारों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. उनके निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. मैथिली महाकाव्य ‘ऊं महाभारत’ के रचयिता, हिंदी-मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार, मंच उद्घोषक बुद्धिनाथ झा ने शोक जताते हुए कहा कि गायिका शारदा सिन्हा के साथ जुड़ाव बहुत पहले से था. देश के कई मंचों पर, खासकर दरभंगा में कई बार उनके कार्यक्रमों में मंच उद्घोषक की भूमिका निभायी. शारदा सिन्हा जब मंच पर गायन प्रस्तुत करती थीं, तो आमतौर पर लगातार 14-15 गीत प्रस्तुत करने के बाद ही विराम लेती थीं. लेकिन, वे एकमात्र उद्घोषक थे, जिनको वे कार्यक्रम के बीच-बीच में उद्घोषणा करते रहने का आग्रह करती थीं. वे कहती थीं कि विद्यापति के गीतों के उनके गायन से अधिक श्रोता बुद्धिनाथ झा द्वारा संचालन के क्रम में पढ़े विद्यापति के गीतों की पंक्तियों के प्रभावी वाचन से प्रभावित होते हैं. श्री झा ने बताया कि शारदा सिन्हा बोकारो में कई बार कार्यक्रम प्रस्तुत की थीं. मिथिला सांस्कृतिक परिषद सहित अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शारदा सिन्हा ने अपने गायन की यादगार प्रस्तुति दी थीं. उन्होंने मैथिली व भोजपुरी भाषा के लोकगीत, छठ गीत, संस्कार गीत, भक्ति व विद्यापति गीत गाकर अपार लोकप्रियता हासिल की थी. उनकी गायकी व आवाज की खासियत है कि उनके गाये गीतों को सुनकर श्रोता पहली बार में ही मोहित हो जाते हैं.

छठ व शारदा सिन्हा का स्वर पर्याय बन गया है, जो कभी भी मिटने वाला नहीं : डॉ संजय

संस्कार भारती के अखिल भारतीय मंत्री डॉ संजय कुमार चौधरी ने कहा कि छठ महापर्व और शारदा जी का स्वर पर्याय बन गया है, जो कभी भी मिटने वाला नहीं है. सभी पीढ़ी के लोग उनके गाये गीतों को पसंद करते हैं. दशक पहले एक समाचार विशेष के कार्यक्रम में मुझे संचालन करना था और शारदा दीदी का कार्यक्रम था. बस उतनी सी बात थी. किंतु मंच और मंच के पीछे दीदी का एक सहज और सरल रूप से परिचित हुआ. वरिष्ठ शास्त्रीय गायक पं राणा झा ने कहा कि शारदा सिन्हा का यूं चला जाना संगीत जगत में एक गहरा शून्य छोड़ गया है. लोकसंगीत को बहुत बड़ी क्षति हुई है. गायक अरुण पाठक ने कहा कि मैथिली व भोजपुरी भाषा के भक्ति, लोक व संस्कार गीतों को गाकर लोगों के दिलों में राज करने वाली शारदा सिन्हा जी का असामयिक निधन बहुत दु:खद है. वह मैथिली व भोजुपरी लोकगीतों की अप्रतिम गायिका थीं. आज जब छठ पर्व पर सभी जगहों पर उनके गाये छठ गीत गूंज रहे हैं, तो ऐसे में उनका यूं चला जाना सभी संगीतप्रेमियों को उदास कर गया. डॉ राकेश रंजन, नीरज चौधरी, पं बच्चनजी महाराज ने भी दु:ख जताया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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