बोकारो के गोमिया में हाथियों का तांडव: महुआ चुनने गई महिला को पटककर मारा, जंगल में डेरा जमाए 16 गजराज

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Bokaro Elephant Attack

जंगल में जमा हुए ग्रामीण जहां महिला की हुई है मौत

Bokaro Elephant Attack: बोकारो के गोमिया में हाथियों का कहर जारी है. रविवार को महुआ चुनने गई 48 वर्षीय ठकनी देवी को हाथियों के झुंड ने कुचलकर मार डाला. पिछले 5 दिनों से इलाके में 15-16 हाथियों का दल सक्रिय है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर है. वन विभाग ने फौरी राहत के तौर पर 25 हजार रुपये दिए हैं, लेकिन क्या केवल मुआवजे से थम जाएगा हाथियों का यह खूनी खेल? देखिए पूरी रिपोर्ट

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Bokaro Elephant Attack, बोकारो (रामदुलार पंडा की रिपोर्ट): बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत जगेश्वर और तिलैया के बीच स्थित जंगल में रविवार सुबह हाथियों के हमले में एक महिला की मौत हो गई. मृतका की पहचान स्वर्गीय मेघनाथ महतो की पत्नी ठकनी देवी (48 वर्ष) के रूप में हुई है. घटना सुबह करीब 10 बजे की है, जब महिला जंगल में महुआ चुनने गई थी. काफी देर तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, जिसके बाद जंगल में उनका शव बरामद हुआ.

15-16 हाथियों का झुंड बना है काल

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले पांच दिनों से इस इलाके में 15 से 16 हाथियों का एक विशाल झुंड डेरा डाले हुए है. हाथियों की सक्रियता के कारण आसपास के गांवों में लगातार दहशत बनी हुई थी. इस ताजा हमले ने वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है. पिछले वर्ष भी तिलैया रेलवे गेट के पास हाथियों ने दो युवकों की जान ले ली थी. महुआटांड़ क्षेत्र में अब तक हाथियों के हमलों में करीब 10 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

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मुआवजा और वन विभाग की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की. विभाग की ओर से मृतका के आश्रितों को तत्काल सहायता के रूप में 25,000 रुपये की राशि प्रदान की गई है. अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कागजी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद शेष 3.75 लाख रुपये की मुआवजा राशि भी परिजनों को सौंप दी जाएगी. फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट भेज दिया गया है.

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के झुंड को तुरंत आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मुआवजा समस्या का समाधान नहीं है, जब तक हाथियों के दल को जंगल के भीतर सुरक्षित रूप से वापस नहीं भेजा जाता, तब तक ग्रामीणों की जान पर खतरा बना रहेगा.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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