2025 तक कोल इंडिया में रह जायेंगे एक लाख कर्मी, सालाना 14 हजार कर्मी घट रहे कोल इंडिया में

Updated at : 25 Mar 2019 5:54 AM (IST)
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2025 तक कोल इंडिया में रह जायेंगे एक लाख कर्मी, सालाना 14 हजार कर्मी घट रहे कोल इंडिया में

राकेश वर्मा, बेरमो : कर्मियों की घटती संख्या किसी भी प्रतिष्ठान की सेहत के लिए शुभ नहीं. यह प्रतिष्ठान की दिलचस्पी, प्राथमिकता व प्रवृत्ति का भी संकेत है. सार्वजनिक प्रतिष्ठान कोल इंडिया लि. आज इसी स्थिति से दो चार हो रही है. 1971 में कोकिंग तथा 1972 में नन-कोकिंग कोल का दो चरणों में हुए […]

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राकेश वर्मा, बेरमो : कर्मियों की घटती संख्या किसी भी प्रतिष्ठान की सेहत के लिए शुभ नहीं. यह प्रतिष्ठान की दिलचस्पी, प्राथमिकता व प्रवृत्ति का भी संकेत है. सार्वजनिक प्रतिष्ठान कोल इंडिया लि. आज इसी स्थिति से दो चार हो रही है. 1971 में कोकिंग तथा 1972 में नन-कोकिंग कोल का दो चरणों में हुए कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के वक्त इसका मैन पावर सात लाख से भी ज्यादा था.

फिलहाल यह घट कर करीब 2 लाख 96 हजार रह गया है. एक आंकड़ा के अनुसार सभी अनुषंगी इकाइयों को मिलाकर सालाना 14 हजार कोलकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इस घटते ग्राफ से वर्ष 2025 तक कोल इंडिया का मैन पावर मुश्किल से एक लाख रह जाने की आशंका जतायी जा रही है.
कोर एरिया आउटसोर्सिंग के हवाले : एक आकलन के अनुसार पिछले पांच वर्ष के दौरान कोल इंडिया में कोलकर्मियों की संख्या करीब 70 हजार घटी है. रोजाना घटते मैनपावर की तुलना में नयी बहाली नहीं हो रही है. आज भी कोयला उद्योग में माइनिंग स्टाफ की काफी कमी है.
स्वीपरों की बहाली 90 के दशक से बंद है. आउटसोर्सिंग के इस दौर में प्रोडक्शन की 60-70 फीसद जिम्मेवारी ठेका मजदूरों पर रह गयी है. किसी-किसी अनुषंगी कंपनी (यथा एमसीएल) में तो उत्पादन कार्य में 80 फीसद ठेका मजदूर लगे हुए हैं.
उत्पादन में नौ गुणा इजाफा
1972-73 में राष्ट्रीयकरण के दौरान कोल इंडिया का मैन पावर करीब सात लाख था. उस वक्त कोल इंडिया का उत्पादन मात्र 70 मिलियन. फिलहाल यह कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई सीसीएल का सालाना उत्पादन के बराबर है.
वर्तमान में कोल इंडिया का मैन पावर घटकर दो लाख 96 हजार के करीब रह गया है. मौजूदा आउटसोर्सिंग दौर में कोल इंडिया का सालाना उत्पादन 650 मिलियन टन तक पहुंच गया है. यानी जब मैन पावर करीब 40 फीसद रह गया है तो प्रोडक्शन करीब नौ गुणा बढ़ गया है.
ट्रेड यूनियन में अस्तित्व की आशंका
कोल सेक्टर की सेंट्रल ट्रेड यूनियनों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि जब मैन पावर घट कर एक लाख रह जायेगा तो ट्रेड यूनियन के पास बार्गेनिंग क्षमता घट जायेगी. जुझारू तेवर के मजदूर भी करीब-करीब रिटायर हो गये हैं. ऐसे में अब आंदोलन को लेकर मजदूरों में पुराना तेवर भी नहीं रह जायेगा.
… फिर भी भीड़ से हट कर
देश भर के पब्लिक सेक्टर में कोल इंडिया ही एक ऐसी कंपनी जहां आज भी कर्मी की मौत के तत्काल बाद आश्रितों को नियोजन का प्रावधान है.
जमीन अधिग्रहण के बदले भी इस कंपनी में नियोजन का प्रावधान है, पर फिलहाल इसे काफी पेचीदा कर दिया गया है. गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मियों को मेडिकली अनफिट कर उनके आश्रित को नौकरी देने का प्रावधान है.
हालांकि 90 के दशक की तुलना में मेडिकल अनफिट केस में नौकरी देने का प्रावधान काफी कम (लगभग समाप्त) हो गया है. स्पेशल फिमेल वीआरएस के तहत महिला कर्मियों के आश्रित पुत्र को को भी नौकरी देने का प्रावधान है. यह स्कीम फिलहाल बंद है.
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