शिलान्यास के 15 साल बाद भी नहीं बना फुटबॉल स्टेडियम

Updated at : 21 Jan 2019 5:23 AM (IST)
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शिलान्यास के 15 साल बाद भी नहीं बना फुटबॉल स्टेडियम

चास : चास प्रखंड क्षेत्र के रामडीह में 15 वर्ष बाद भी बिनोद बिहारी महतो फुटबॉल स्टेडियम नहीं बन सका है. वर्ष 2004 में यहां डीपीएलआर की जमीन पर तत्कालीन विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री समरेश सिंह के प्रयास से योजना का शिलान्यास किया था. स्टेडियम का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने किया था. इसके […]

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चास : चास प्रखंड क्षेत्र के रामडीह में 15 वर्ष बाद भी बिनोद बिहारी महतो फुटबॉल स्टेडियम नहीं बन सका है. वर्ष 2004 में यहां डीपीएलआर की जमीन पर तत्कालीन विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री समरेश सिंह के प्रयास से योजना का शिलान्यास किया था.
स्टेडियम का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने किया था. इसके बाद वर्ष 2009 में चार एकड़ 22 डिसमिल जमीन पर तत्कालीन चंदनकियारी विधायक हारू रजवार के विधायक मद से 18 लाख रुपये से चहारदीवारी का निर्माण करवाया था.
फिलहाल चहारदीवारी जगह-जगह टूट कर गिर रही है. गौरतलब हो कि चास शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में एक भी खेल मैदान नहीं है. इसके कारण इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए बोकारो सिटी या अन्य जगह जाना पड़ता है.
वर्तमान मंत्री की भी नहीं है नजर : राज्य के भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र से आते हैं. इनके पास खेलकूद मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है. इसके बावजूद भी श्री बाउरी ने इस स्टेडियम को विकसित करने की दिशा में किसी प्रकार का प्रयास नहीं किया.
सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर स्टेडियम के पास विधायक मद से स्टेज का निर्माण का निर्माण हो रहा है. इस स्टेडियम को विकसित करने व जीर्णोद्धार कराने की दिशा में जिला फुटबॉल एसोसिएशन भी गंभीर नहीं है. इसके कारण आज तक यह स्टेडियम उपेक्षा का शिकार बना हुआ है.
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
चास-चंदनकियारी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है. स्टेडियम की कमी के कारण खिलाड़ियों को काफी परेशानी होती है. जिम्मेदारों को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए.
दिलीप महतो, पुंडरू
सरकार की घोषणाएं सिर्फ हवा-हवाई साबित हो रही है. बिनोद बिहारी महतो फुटबॉल स्टेडियम का जीर्णोंद्धार करने की जरूरत है. जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन पहल करें.
चंदन महतो, भंड्रो
अगर सरकार के पास सही मायने में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधन मुहैया कराने की इच्छाशक्ति होती तो रामडीह का फुटबॉल स्टेडियम उपेक्षा का शिकार नहीं होता. इसकी तस्वीर कुछ और ही होती.
अश्विनी महतो, पुपुनकी
खेल के क्षेत्र पर सरकार का कोई विशेष ध्यान नहीं है. चास ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को बेहतर खेल मैदान नहीं मिल पा रहा है. इसके कारण कई प्रतिभाएं दब कर रह जा रही है.
लालदेव महतो, रामडीह
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