31 साल में पूरा नहीं हुआ पहला कोल्ड स्टोरेज, दूसरे की हो गयी घोषणा

Updated at : 27 Jul 2018 9:59 AM (IST)
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31 साल में पूरा नहीं हुआ पहला कोल्ड स्टोरेज, दूसरे की हो गयी घोषणा

कृषि मंत्री ने की चंदनकियारी में कोल्ड रूम खोलने की घोषणा सीपी सिंह बोकारो : बोकारो में कृषि क्षेत्र की हालत खस्ता है. भले ही किसानों की आय दोगुनी करने की बात सरकार की ओर से की जाती है, लेकिन बोकारो में कृषि की स्थिति सुधारने के लिए कोई समुचित पहल होती नहीं दिख रही […]

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कृषि मंत्री ने की चंदनकियारी में कोल्ड रूम खोलने की घोषणा
सीपी सिंह
बोकारो : बोकारो में कृषि क्षेत्र की हालत खस्ता है. भले ही किसानों की आय दोगुनी करने की बात सरकार की ओर से की जाती है, लेकिन बोकारो में कृषि की स्थिति सुधारने के लिए कोई समुचित पहल होती नहीं दिख रही है. इतना ही नहीं चास स्थित बाजार समिति में 1976-77 में कोल्ड स्टोरेज की नींव रखी गयी थी, जो वर्तमान में भी अधूरा है.
इधर बुधवार को प्रदेश के कृषि मंत्री रंधीर सिंह ने चंदनकियारी प्रखंड में कोल्ड रूम खोलने की बात घोषणा कर दी. प्रशासनिक उदासीनता के कारण चास कृषि बाजार समिति परिसर में 31 वर्ष पूर्व लाखों की लागत से बन रहा कोल्ड स्टोरेज आज तक पूरा नहीं हुआ.
गौरतलब है कि बिस्कोमान पटना द्वारा 1.33 एकड़ भूमि में कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कार्य बाजार समिति परिसर में शुरू कराया गया था. उस समय इसकी प्राक्कलित राशि 40 लाख रुपये थी. जानकर हैरानी होगी कि मिश्रित कृषि (धान, गेंहू व सब्जी) के लिहाज से चंदनकियारी जिला के अन्य प्रखंड से पिछड़ा है. साथ ही चंदनकियारी जिला के एक कोना में है. इससे जिला के अधिकतर किसानों को दूरी की विषमता झेलनी होगी. बावजूद इसके चंदनकियारी में कोल्ड रूम खोलने की घोषणा अचरज भरा लग रहा है.
हर दिन उगाओ, हर दिन बेचो के सिद्धांत पर काम करते हैं सब्जी उत्पादक
जिला में कसमार व पेटरवार प्रखंड की पहचान सब्जी उत्पादक के रूप में है. वहीं चंद्रपुरा प्रखंड का तेलो, जरीडीह का तांतरी-पिछरी भी सब्जी का उत्पादन करता है. जिला की जरूरत का ज्यादातर हिस्सा इन्हीं प्रखंड से आता है. लेकिन, सुविधा के अभाव में किसान को हर दिन उगाओ-हर दिन बेचो के सिद्धांत पर काम करना पड़ता है. स्थानीय हटिया व नजदीक के बाजार में किसान औने-पौने दाम में बेचने को विवश होते हैं. सड़न के हिसाब से इन्हीं क्षेत्रों में कोल्ड रूम या स्टोरेज की सबसे ज्यादा जरूरत है.
अाधिकारिक रूप से इस मामले में जानकारी नहीं मिली है. अखबार के माध्यम से ही जानकारी प्राप्त हुई है. स्थल चयन को लेकर कुछ नहीं बोल सकता, यह कैबिनेट स्तर का फैसला है. इस फैसले में हमारी रायशुमारी भी नहीं हुई है. पहले विभाग की ओर से पेटरवार क्षेत्र में निर्माण कराने की मांग की गयी थी.
राजीव कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी
चास प्रखंड में 7846 हेक्टेयर, चंदनकियारी में 5377, जरीडीह में 2530, कसमार में 2351, पेटरवार में 3262, गोमिया में 5093, बेरमो में 641, नावाडीह में 3569, चंद्रपुरा में 3289 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है. वहीं जिला में सबसे अधिक पेटरवार प्रखंड 887 हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है. चास प्रखंड में 837, चंदनकियारी 698, जरीडीह 437, कसमार 730, गोमिया 520, बेरमो 192, नावाडीह 514 व चंद्रपुरा में 425 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है. जिले में 9500 हेक्टेयर भूमि में चना की खेती होती है. इसमें चास में 1345, जरीडीह 800, चंद्रपुरा 500 आदि प्रखंडों में चना की खेती होती है.
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