ऑटो वालों ने खुद बढ़ाया भाड़ा, फिर प्रशासन से भी बढ़वाया

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बोकारो : सर, पेट्रोल-डीजल की कीमत में आग लगी हुई है. एजेंटों की मनमानी भी बढ़ गयी है. ऐसे में अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो ऑटो चलाना मुश्किल हो जायेगा. इस फरियाद के साथ ऑटो चालक चास एसडीओ के पास गये और लगभग हर रूट में किराया दो रुपया बढ़ाने की बात पर सहमति […]

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बोकारो : सर, पेट्रोल-डीजल की कीमत में आग लगी हुई है. एजेंटों की मनमानी भी बढ़ गयी है. ऐसे में अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो ऑटो चलाना मुश्किल हो जायेगा. इस फरियाद के साथ ऑटो चालक चास एसडीओ के पास गये और लगभग हर रूट में किराया दो रुपया बढ़ाने की बात पर सहमति बनी. गुरुवार से बढ़ा किराया लागू भी हो गया. इससे पहले दो दिन हड़ताल कर ऑटो चालकों ने प्रशासन पर दबाव भी बनाया.
लेकिन, सवाल है कि किराया कम ही कब था? इससे पहले 31 अगस्त 2016 को किराया हर रूट में बढ़ाया गया था. इसके बाद बीच में ऑटो चालकों ने स्वयं ही किराया बढ़ा दिया था. प्रशासन का इसकी भनक तक नहीं लगी. फिर अपने द्वारा बढ़ाये गये किराया को पुराना किराया बता कर फिर से किराया बढ़ाने की मांग की गयी. इस पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया.
तो क्या एजेंटी बना कारण : ऑटो किराया में इजाफा का एक कारण एजेंट चार्ज बताया गया. ऑटो चालकों ने बताया विभिन्न पड़ाव स्थलों में एजेंटों को हर फेरा के साथ पैसा देना पड़ता है. एक दिन में औसतन एक ऑटो चालक को 100-150 रुपया पड़ाव शुल्क के नाम पर देना पड़ता है. हद तो तब हो जाती है, जब चालकों से यह पड़ाव शुल्क टोल टैक्स के नाम पर लिया जाता है. 2016 की बैठक में भी यह मांग उठी थी कि पड़ाव शुल्क को खत्म किया जाये. लेकिन, कुछ नहीं हुआ. इस बार भी चालकों ने पड़ाव शुल्क खत्म करने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है.
इस तरह हुआ खेल
अखंड भारत नव निर्माण सेना की माने तो 2016 के किराया चार्ट के अनुसार चास से सेक्टर नौ का किराया 12 रुपया तय किया गया था. इस बार किराया 13 रुपया दिखाया गया और इसे बढ़ा कर 18 रुपया करने की मांग की गयी. मतलब एक रुपया का इजाफा ऑटो चालकों की ओर से पहले ही कर दिया गया था. चास से सिवानमोड़ का किराया 2016 में 12 रुपया तय किया गया था. ऑटो चालकों ने इस बार किराया 15 रुपया दिखाया और 20 रुपया करने की मांग की. मतलब ऑटो चालकों ने स्वयं तीन रुपया पहले ही बढ़ा लिया था. हर रूट में यही खेल किया गया.
डीजल महंगा हुआ, पर मोबिल सस्ता
यह सही है कि अगस्त 2016 के मुकाबले डीजल की कीमत में इजाफा हुआ है. इस आधार पर किराया भी बढ़ाना चाहिए. लेकिन, इस दौरान ऑटो के अन्य जरूरी पार्ट्स की कीमत में कमी आयी है. जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद मोबिल की कीमत में भी 10 प्रतिशत कमी आयी. मैकेनिकल पार्ट्स की कीमत में गिरावट आयी है. इस दौरान महंगाई दर भी काबू में ही रही. जरूरी खाद्य सामग्री की कीमत यथावत रही. ऐसे में किराया में इजाफा कुछ संगठनों के गले नहीं उतर रहा है.
कौन लेता है पड़ाव शुल्क
चास नगर निगम क्षेत्र में ननि पड़ाव शुल्क लेता है. बोकारो रेलवे स्टेशन में भी पड़ाव शुल्क लिया जाता है. जैनामोड़ में भी सरकारी स्तर पर पड़ाव शुल्क लिया जाता है. ऑटो चालकों की माने तो कई स्थानों पर बिना वजह शुल्क लिया जाता है. यह शुल्क ना तो राज्य सरकार के खाता में जाता है और ना ही बीएसएल प्रबंधन के खाता में. दबंग शुल्क निर्धारण करते हैं. नहीं देने पर मारपीट तक की नौबत आ जाती है.
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