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झारखंड की गली-गली में टहल रहा बच्चा चोरों का बड़ा गैंग, अंश-अंशिका के बाद 12 बच्चे बरामद

Updated at : 19 Jan 2026 8:37 PM (IST)
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झारखंड की गली-गली में टहल रहा बच्चा चोरों का बड़ा गैंग, अंश-अंशिका के बाद 12 बच्चे बरामद
अंश-अंशिका की चोरी बाद झारखंड पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली.

Ansh Anshika Case: अगर आप झारखंड के किसी शहर या गांव में रहते हैं, तो आपके लिए बेहद चेतावनी भरी खबर है. वह यह है कि आप अपने जिगर के टुकड़ों को अपनी नजर से ओझल न होने दें. झारखंड की गली-गली में बच्चा चोरों का गैंग टहल रहा है. यह गैंग बच्चों को पहले बहलाता-फुसलाता है. चॉकलेट-कुरकुरे खाने के लिए देता है और जब वह समझ जाता है कि बच्चा उसकी चंगुल में फंस गया है, फिर वह उसे चुरा लेता है. इसके बाद बच्चों के मां-बाप छाती पीटते रह जाते हैं. रांची के अंश-अंशिका कांड के बाद पुलिस ने बच्चा चोरों के एक बड़े गैंग का खुलासा किया है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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Ansh Anshika Case: झारखंड में बच्चा चोरों का गैंग गली-गली में टहल रहा है. रांची के धुर्वा में अंश और अंशिका अपहरण कांड के बाद पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए झारखंड में सक्रिय बच्चा चोरों के एक बड़े गैंग का खुलासा किया है. अंश-अंशिका के अपहरण के बाद एसआईटी ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर अब तक कुल 12 अपहृत बच्चों को सकुशल बरामद किया है. इसके साथ ही, इस संगठित गैंग से जुड़े 13 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है.

बिहार-बंगाल समेत तीन राज्यों से जुड़े तार

एसआईटी की ओर से बरामद किए गए 12 बच्चों में छह झारखंड, पांच पश्चिम बंगाल और एक बच्चा बिहार के औरंगाबाद जिले से संबंधित है. इन बच्चों की उम्र चार से 12 साल के बीच बताई जा रही है. रांची के धुर्वा इलाके से अंश और अंशिका की बरामदगी के बाद शुरू हुई जांच में यह सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ था.

बच्चा चोर गैंग का मास्टर माइंड गिरफ्तार

इस मामले में अब तक कुल 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें आठ पुरुष और पांच महिलाएं शामिल हैं. गिरफ्तार लोगों में पहले से पकड़े गए नभ खेरवार के ससुर एंथोनी खरवार और सोनी कुमारी के पिता भी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, विरोधी खेरवार इस पूरे गैंग का मास्टर माइंड है. उसके साथ उसकी पत्नी चांदनी देवी, आशिक गोप और उसकी पत्नी बेबी देवी, उपैया खेरवार और उसकी पत्नी सोनिया देवी समेत कई अन्य लोग बाल तस्करी के इस नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल थे. अब तक कुल 15 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की जा चुकी है.

गरीब बच्चों को बनाते हैं निशाना

रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि आरोपियों ने 12 बच्चों के अपहरण की बात स्वीकार की है. उन्होंने बताया कि यह गैंग पर गरीब और असहाय बच्चों को निशाना बनाता था. पहले उनकी रेकी जाती थी. फिर खाने-पीने या घुमाने का लालच देकर अपने करीब लाया जाता था. इसके बाद मौका मिलते ही उन्हें चुरा लिया जाता था.

चोरों ने बच्चों को बेचने की बात कबूली

पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि गैंग की ओर से कुछ बच्चों को बिहार के औरंगाबाद जिले और पश्चिम बंगाल में बेच दिया गया था. पुलिस को आशंका है कि कई अन्य बच्चों को भी दूसरे राज्यों में भेजा गया हो सकता है. एसएसपी ने कहा कि अन्य बच्चों का सत्यापन कराया जा रहा है और इस कांड में और लोगों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता.

छत्तीसगढ़ तक फैला है बच्चा चोरों का नेटवर्क

आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर रांची के सिल्ली, रामगढ़ के कोठार और लातेहार के बरियातू इलाके से बच्चों की बरामदगी की गई है. पुलिस को इस गैंग की गतिविधियां छत्तीसगढ़ तक फैली होने के भी संकेत मिले हैं. इसे देखते हुए अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री और डीजीपी की निगरानी में चल रही एसआईटी

एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि यह एसआईटी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी तदाशा मिश्रा और एडीजी सह रांची प्रक्षेत्र आईजी मनोज कौशिक के निर्देश में काम कर रही है. टीम का नेतृत्व ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर कर रहे हैं. इसमें सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार सिंह समेत कई डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा शामिल हैं.

14 जनवरी के बाद पकड़ में आया गैंग

इस पूरे मामले में पहली बड़ी सफलता 14 जनवरी को मिली थी, जब नभ खेरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी को गिरफ्तार किया गया था. उनसे पूछताछ के बाद गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी की गई. इसी कड़ी में एक के बाद एक गिरफ्तारियां होती चली गईं और बच्चों की बरामदगी संभव हो सकी.

बच्चा चोरों से पूछताछ जारी

पुलिस का कहना है कि देर रात तक कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है. एसआईटी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और बच्चों को भी मुक्त कराया जा सकता है और इस संगठित बाल तस्करी नेटवर्क की पूरी शृंखला सामने आ सकेगी. पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि अगर कहीं संदिग्ध गतिविधि या लापता बच्चों से जुड़ी जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें.

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पुलिस की गिरफ्त में आए बच्चा चोर

पुलिस ने बच्चा चोरी के मामले में करीब 12 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

  • जवरोधी खेरवार उर्फ अनुराग (27), कोठार, रामगढ़
  • चांदनी देवी (23) पत्नी तवरोधी खेरवार, को्ठार, रामगढ़
  • एंथोनी खरवार (60), नभ खेरवार का ससुर, रामगढ़.
  • प्रमोद कुमार (27), टुट्की नावाडीह, तसल्ली, रांची
  • आशिक गोप (32), टुट्की नावाडीह, तसल्ली, रांची
  • बेबी देवी, पत्नी आशिक गोप, टुट्की नवाडीह, तसल्ली
  • राज स्वानी, शिव टोला, बारियातू, लातेहार
  • सीता देवी (18 वर्ष), बारियातू, लातेहार
  • विनु भुईंयां (30 वर्ष), बारियातू, लातेहार
  • संन्यासी खेरवार रविदास टोला, कोठार, रामगढ़
  • मालिन देवी (42 वर्ष), कोठार, रामगढ़.
  • उपैया खेरवार, बारियातू, लातेहार
  • सोनिया देवी पत्नी उपैया खेरवार, बारियातू, लातेहार

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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