ePaper

झारखंड की एक ऐसी जगह जहां हर साल लगता है महिलाओं का मेला, पुरुषों की एंट्री बैन

Updated at : 18 Jan 2026 7:21 AM (IST)
विज्ञापन
झारखंड की एक ऐसी जगह जहां हर साल लगता है महिलाओं का मेला, पुरुषों की एंट्री बैन
सरायकेला-खरसावां की खरकई नदी के किनारे लगा महिलाओं का मेला.

Saraikela-Kharsawan: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित मिर्गी चिगड़ा एक अनोखी जगह है, जहां हर साल मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को केवल महिलाओं का मेला लगता है. परंपरागत रूप से पुरुषों की एंट्री बैन रहती है. इस मेले में झारखंड के साथ-साथ ओडिशा से भी महिलाएं पहुंचती हैं. महिलाएं बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा कर पिकनिक का आनंद लेती हैं. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

विज्ञापन

शचिंद्र कुमार दाश/धीरज कुमार

Saraikela-Kharsawan: झारखंड के सरायकेला-खरसांवा जिले में एक जगह ऐसी है, जहां पर मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को सिर्फ और सिर्फ महिलाओं का मेला लगता है. खास बात यह है कि महिलाओं के इस मेले में पुरुषों की एंट्री बैन है. इस मेले में झारखंड ही नहीं, ओडिशा से भी महिलाएं आती हैं. यह जगह सरायकेला-खरसावां की खरकई नदी के बीचोंबीच स्थित मिर्गी चिगड़ा जगह है, जहां पर शनिवार को भी महिलाओं का मेला लगा.

मेले में कहां-कहां से आईं महिलाएं

इस मेले में सरायकेला, खरसावां, राजनगर, जमशेदपुर, सीनी के साथ ही पड़ोसी राज्य ओड़िशा से भी महिलाएं पहुंची थीं. मेला में पहुंची महिलाओं ने पारंपरिक रूप से पिकनिक का आनंद उठाया. खरकई नदी के बीचों बीच स्थित चट्टानों पर महिलाओं ने मनपसंद व्यंजन का स्वाद चखा. यहां अलग-अलग ग्रुप में महिलाएं पहुंची थी. कई महिलाओं को यहां के मनोरम वादियों के बीच खाना बनाकर खाते देखा गया. तो कई महिलाएं अपने घर से ही खाना तैयार करके लाई थीं.

मेला में महिलाओं ने पकाया शाकाहारी भोजन

मेला में पहुंची महिलाओं ने शाकाहारी खाना खाया. यहां मांसाहारी भोजन करना बंद है. मेला में लगाए गए अधिकांश दुकानदार भी महिलाएं ही थीं. शनिवार को सुबह से शाम तक बच्चों के साथ महिलाओं का मिर्गी चिगड़ा में आना-जाना लगा रहा. हर साल मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को खरकई नदी के बीच में स्थित मिर्गी चिगड़ा में महिलाओं का मेला लगता है. मेला में अपने बच्चों के साथ जाकर पिकनिक मनाती हैं. दिन भर आनंद उठाते हुए शाम को घर वापस लौट जाती हैं.

बाबा गर्भेश्वर की हुई पूजा अर्चना

मिर्गी चिगड़ा में शनिवार को बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की गई. यहां पहुंची महिलाएं पहले नदी के बीचोंबीच स्थित बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की. फिर मेला में घुमने के साथ साथ पारंपररिक भोजन का लुफ्त उठाया. बड़ी संख्या में बच्चे खरकई नदी के साफ पानी में डूबकी लगाते भी देखे गए. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. स्थानीय किंवदंती के अनुसार, महाभारत में पांडव पुत्र के अज्ञातवास के समय यहां पहुंचे थे और विश्राम किया था. पत्थरों पर उभरे उनके पैरों के निशान आज भी दिखाई देते हैं.

मेला में पुरुषों की एंट्री बैन

क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि महिला मेला में पुरुषों का प्रवेश हमेशा से बैन रहा है. लेकिन वर्तमान समय में महिलाओं के इस मेला में कुछ पुरुष भी पहुंच रहे हैं. इस बार भी भी मेला में इक्का-दुक्का पुरुषों को भी देखा गया. हालांकि, अब भी महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी.

क्या कहती हैं श्रद्धालु

मेले में आई कन्या कुमारी साहू ने कहा, ‘मिर्गी चिंगडा का मेला हमारी परंपरा से जुड़ा हुआ है.पहले यहां बचपन से आ रहे हैं. पहले बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना करते है, उसके बाद पिकनिक का आनंद लेते हैं.’ एक अन्य श्रद्धालु कल्पना दास कहती हैं, ‘मिर्गी चिंगडा का मेला हमारी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है. ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.’ वहीं, रानी कुमारी कहती हैं कि मेला का ऐतिहासिक महत्व है. इस मेले में पहले केवल महिलाएं ही आती थीं, लेकिन अब पुरुष भी मेला में पहुंचने लगे है.

इसे भी पढ़ें: Gambling Website Ban: सरकार का बड़ा एक्शन, 242 अवैध सट्टेबाजी और जुआ वेबसाइट बैन

बाबा गर्भेश्वर की पूजा से मिलते हैं सुयोग्य वर

सुरमा साहू ने कहा कि मिर्गी चिंगडा के मेले में हर वर्ष पहुंचना रोमांचित करता है. जिन महिलाओं से पूरे साल कभी कभार मुलाकात नहीं होती है, मेला में उनसे मिलकर अच्छा लगता है. ज्योति जामुदा का कहना है कि यहां की प्राकृतिक सौंदर्यता काफी सुकुन देता है. यहां अपनों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है. सुषमा पति ने कहा कि मकर संक्रांति के बाद मिर्गी चिंगड़ा में मेला आयोजित होता है. यह मेला राजराजवाड़े के समय से चला आ रहा है. माधुरी पति के अनुसार, मिर्गी चिंगड़ा मेला के दौरान बाबा गर्भेश्वर महादेव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं द्वारा बाबा की पूजा करने से सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है.

इसे भी पढ़ें: नशे का कारोबार करने वाले सावधान! खरसावां में आसमान से होगी अफीम की खेती की निगहबानी

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola