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झारखंड में 1,28,900 करोड़ का बजट पेश, वित्त मंत्री बोले- हमारे पांव जमीन पर मजबूती से टिके हैं…

Updated at : 28 Feb 2024 8:08 AM (IST)
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झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने पेश किया 1,28,900 करोड़ का बजट.

झारखंड की चंपाई सोरेन सरकार ने मंगलवार (27 फरवरी) को विधानसभा में 1,28,900 करोड़ रुपए का बजट पेश किया. वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने बजट भाषण की शुरुआत एक कविता से की. इस कविता में उन्होंने पिछले चार साल की स्थिति का जिक्र किया.

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झारखंड की चंपाई सोरेन सरकार ने मंगलवार (27 फरवरी) को विधानसभा में 1,28,900 करोड़ रुपए का बजट पेश किया. वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार बजट भाषण की शुरुआत एक कविता से की. इस कविता में उन्होंने पिछले चार साल की स्थिति का जिक्र किया. इसके बाद वित्तीय संकल्पना के बारे में सदन को बताते हुए कहा, ‘हमारे पांव जमीन पर हैं मजबूती से टिके हैं और विकास के आसमान को छूने का हौसला भी हम रखते हैं.’

झारखंड बजट का आकार 8.5 फीसदी बढ़ा

वित्त मंत्री ने वर्ष 2024-25 के लिए 1,28,900 करोड़ रुपए का बजट सदन में प्रस्तुत किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.5 प्रतिशत अधिक है. पिछले साल सरकार ने 91,832 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था. वित्त मंत्री ने 9 फीसदी वृद्धि के साथ 37,068 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव किया है.

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टैक्स से सरकार ने कमाए 34,200 रुपए

वित्त मंत्री ने झारखंड सरकार की कमाई के स्रोतों के बारे में भी विधानसभा को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार को टैक्स से 34,200 करोड़ रुपए की कमाई हुई, जबकि 19,301 करोड़ रुपए नॉन-टैक्स से मिले. केंद्रीय सहायता के रूप में उन्हें 16,961 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई. सेंट्रल टैक्सेज में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में झारखंड सरकार को 40,338 करोड़ रुपए मिले. उन्होंने कहा है कि लोक ऋण से 18,000 करोड़ रुपए और उधार एवं अग्रिम वसूली से 100 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है.

राजकोषीय घाटा 9,500 करोड़ रहने का अनुमान

डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा 9,500 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो अनुमानित जीएसडीपी का 2.02 फीसदी है. उन्होंने कहा कि राज्य का आर्थिक विकास दर 9.8 फीसदी रहने का अनुमान है. इतना ही नहीं, वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक झारखंड को 10 ट्रिलियन रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है. वर्ष 2022-23 में झारखंड का जीएसडीपी 4 ट्रिलियन (3,93,722 करोड़ रुपए) रहा.

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मजबूत अर्थव्यवस्था बनने के सभी कारक झारखंड में मौजूद

वित्त मंत्री ने कहा कि बड़ी जीएसडीपी सुनिश्चित करने के सभी कारक झारखंड में मौजूद हैं. हमारा प्रदेश संसाधन संपन्न राज्य है. देश का लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार यहां है. 30 फीसदी भाग वन से आच्छादित है. यह कई मूल्यवान लघु वन उत्पादों का स्रोत है. पर्यटकों की रुचि के कई स्थल हैं. हमारे राज्य में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने की क्षमता है. इसे विकसित करके अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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