एक बार फिर तिहाड़ जेल पहुंचा जल्लाद पवन, आज करेगा अभ्यास,कल होनी है फांसी
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 02 Mar 2020 1:42 PM
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में दोषी पवन गुप्ता के क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया. इस जघन्य अपराध के लिए पवन समेत चार दोषियों को मौत की सजा सुनायी गयी है. सभी दोषियों को मंगलवार को फांसी दी जानी है.
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में दोषी पवन गुप्ता के क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया. इस जघन्य अपराध के लिए पवन समेत चार दोषियों को मौत की सजा सुनायी गयी है. सभी दोषियों को मंगलवार को फांसी दी जानी है.
कोर्ट द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन खारिज किये जाने के बाद ऐसा लग रहा है कि कल चारों दोषियों को फांसी हो जाये. तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी तैयारी भी कर ली है. जानकारी के अनुसार दोषियों को फांसी देने के लिए मेरठ के जल्लाद पवन को तिहाड़ जेल बुला लिया गया है. बताया जा रहा है कि वह तिहाड़ के गेस्ट हाउस में ठहरा है. ऐसी सूचना भी है कि वह आज डमी पुतलों को फांसी पर लटकायेगा.
रविवार को तिहाड़ जेल के सहायक अधीक्षक नवीन दहिया और अन्य दो जेलकर्मी मेरठ जेल गये थे और वहां जाकर उन्होंने जेल के अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय से मुलाकात की और पवन जल्लाद को साथ लेकर आये.
गौरतलब है कि इससे पहले भी पवन जल्लाद को जनवरी माह में तिहाड़ जेल बुलाया गया था और उसने वहां फांसी देने का अभ्यास भी किया था, लेकिन उस वक्त फांसी टल गयी थी. अगर इस बार आज फांसी नहीं टली तो कल पवन जल्लाद निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका देगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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