साहिबगंज की बेटी निहारिका ने रचा इतिहास, UPSC में 365 रैंक

Author Smita dey
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Niharika Sinha UPSC Rank 365

Niharika Sinha UPSC Rank 365 (Social Science)

Niharika Sinha UPSC Rank 365: यूपीएससी 2025 का रिजल्ट जारी हो गया है. साहिबगंज की निहारिका सिन्हा ने UPSC 2025 में 365 रैंक लाकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रौशन किया. यह अपने दूसरे प्रयास में एग्जाम पास किया है.

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Niharika Sinha UPSC Rank 365: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) की सिविल सर्विस एग्जाम में सफलता हासिल करना हर साल लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन यह मुकाम बहुत कम लोग ही हासिल कर पाते हैं. झारखंड के साहिबगंज की रहने वाली निहारिका सिन्हा ने इसी कठिन परीक्षा में 365वीं रैंक हासिल किया है. इन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनते हैं. टेलर मास्टर की बेटी निहारिका की यह सफलता आज पूरे साहिबगंज और झारखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है. आइए इनकी जर्नी (Niharika Sinha UPSC Rank 365) को करीब से जानते हैं. 

साधारण परिवार से निकलकर पाई बड़ी सफलता

साहिबगंज के कुली पाड़ा निवासी Niharika Sinha के पिता निरंजन सिन्हा टेलर मास्टर हैं और उनकी मां शबनम एएनएम के पद पर कार्यरत हैं. निहारिका घर में सबसे बड़ी हैं. साधारण परिवार में पली-बढ़ीं निहारिका ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की. 

Niharika Sinha UPSC Rank 365: पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल

निहारिका सिन्हा शुरू से ही होनहार स्टूडेंट्स रही हैं. साल 2018 में उन्होंने साहिबगंज के सेंट जेवियर्स स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की और स्कूल के टॉपरों में शामिल रहीं.  इसके बाद उन्होंने रांची के जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से साल  2023 में ग्रेजुएशन किया था. इसी दौरान उन्होंने सिविल सर्विस एग्जाम सेवा की तैयारी भी शुरू कर दी. 

पहले प्रयास में असफलता, दूसरे में मिली सफलता

Niharika Sinha ने साल 2024 में अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की प्रीलिम्स एग्जाम पास कर ली थी, लेकिन वह मेंस परीक्षा तक नहीं पहुंच सकीं. हालांकि इस असफलता से उन्होंने हार नहीं मानी. माता-पिता के प्रोत्साहन और अपने मोटिवेशन के साथ उन्होंने दोबारा तैयारी की. उन्होंने दूसरे प्रयास में 365वीं रैंक हासिल किया. इस दौरान उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट पॉलिटिकल साइंस एंड इंटरनेशनल रिलेशंस था. 

बचपन की जिद बनी सफलता की प्रेरणा

निहारिका की सफलता के पीछे एक दिलचस्प और इंस्पिरेशनल स्टोरी भी जुड़ी है. उनके पिता निरंजन सिन्हा बताते हैं कि साल 2008 में जब निहारिका छोटी थीं, तब साहिबगंज के तत्कालीन डीएम दुर्गा मंदिर पहुंचे थे. उस समय निहारिका ने उन्हें सुरक्षा गार्डों के बीच देखा और अपने पिता से उनके बारे में पूछा.  पिता ने बताया कि वे जिले के डीएम हैं और इस पद तक पहुंचने के लिए कड़ी पढ़ाई करनी पड़ती है. उसी समय निहारिका ने ठान लिया था कि वह भी एक दिन इस पद तक पहुंचेंगी. 

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स्मिता दे

लेखक के बारे में

By स्मिता दे

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग इनकी रुचि है. ये लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ और ट्रेंडिंग टॉपिक्स कवर करती है. रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी उपयोगी और रोचक जानकारी रीडर्स तक पहुंचाना इन्हें पसंद है.

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