12वीं के बाद हाथों में रची मेहंदी, शादी के 21 साल बाद बनीं BPSC अफसर

पुनीता कुमारी, बैकग्राउंड में सांकेतिक तस्वीर (PC- इंस्टाग्राम)
Success Story: सुपौल की पुनीता कुमारी ने शादी और दो बच्चों की जिम्मेदारी के साथ BPSC की तैयारी शुरू की. उनकी शादी 12वीं के बाद 1997 में हो गई थी. उन्होंने अपने बच्चों के साथ पढ़ाई की और BPSC में सफलता हासिल की. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.
Success Story: अगर इरादे मजबूत हो तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल हासिल की जा सकती है. बिहार के सुपौल जिले की पुनीता कुमारी की कहानी पर ये स्टेटमेंट बिलकुल फिट बैठता है. घर वालों ने 12वीं के बाद उनकी पढ़ाई छुड़ाकर शादी कर दी. लेकिन पुनीता की लगन और मेहनत ने उन्हें शादी के 21 साल बाद असिस्टेंट कमिश्नर बना दिया. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.
1997 में हो गई थी शादी
पुनीता की 6वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई सुपौल के जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई थी. उन्होंने 1997 में 12वीं पास किया था. 12वीं पास करने के बाद ही उन पर परिवार की ओर से शादी का प्रेशर बनने लगा और इसी साल उनकी शादी हो गई. शादी के साथ ही पुनीता के सारे सपने मर गए.
बच्चे होने के बाद 2010 में किया ग्रेजुएशन
माता-पिता ने तो पुनीता की शादी करा दी लेकिन उन्हें हमेशा ये लगता था कि वो कुछ बेहतर कर सकती हैं. घर, परिवार और बच्चों की सारी जरूरतें पूरी करते हुए उन्होंने 2010 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. बीएन मंडल यूनिवर्सिटी से बीए करने के बाद उनके मन में BPSC परीक्षा में बैठने का मन बनाया.
UPSC के लिए निकली उम्र तो BPSC के लिए ट्राई किया
पुनीता ने 33 साल की उम्र में सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करने का मन बनाया. UPSC के लिए तो उनकी उम्र निकल गई थी तो उन्होंने BPSC और पारा जूडिशियरी के लिए फॉर्म भरा. पारा जूडिशियरी में उनकी नौकरी लग गई. लेकिन पुनीता यहीं नहीं रूकी उन्होंने BPSC की तैयारी जारी रखी.
घर परिवार की जिम्मेदारी और नौकरी के साथ की BPSC की तैयारी
पुनीता के लिए ये इतना आसान नहीं था. घर परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों को स्कूल पहुंचाना, पति के लिए टिफिन बनाना, सास-ससुर का ध्यान रखना, कोर्ट का काम करना और फिर तैयारी करना. कई रातें वे जागकर BPSC का सवाल हल करती थीं. 2012 से 2018 तक का उनकी लाइफ में यही स्ट्रगल चला.
पड़ोसियों ने दिया ताना, बच्चे हुए शर्मिंदा फिर भी नहीं रोकी पढ़ाई
जब पुनीता कोर्ट में नौकरी पर चली जाती थीं तो उनके पड़ोसी बच्चों को ताना देते थे कि तुम्हारी मां अच्छी मां नहीं है. बच्चे भी पुनीता से सवाल किया करते थे कि किसी की मां नहीं पढ़ती है, तुम क्यों पढ़ती हो. लेकिन पुनीता ने इन बातों की परवाह नहीं की. वे बच्चों को बैठाकर उन्हें पढ़ाती थीं और खुद भी रिवीजन करती थीं.
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By शाम्भवी शिवानी
शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं.
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