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Bihar: चुनाव हारने के बाद छिन जाएगा तेज प्रताप का बंगला! क्या लालू के लाल पर मेहरबान होगी नीतीश सरकार?

Updated at : 25 Nov 2025 4:04 PM (IST)
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Tej Pratap Yadav

तेज प्रताप यादव

Bihar: महुआ सीट से अपना चुनाव हार चुके लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के सामने अब पटना में स्थित अपने सरकारी बंगले को बचाने की चुनौती है. क्योंकि नियम साफ कहते हैं कि विधायक न रहने पर सरकारी सुविधा स्वतः समाप्त होती है.

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Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव महुआ सीट से चुनाव हार गए. तेज प्रताप के चुनाव हारने के बाद से ही लोगों के मन में एक सवाल चल रहा है कि क्या अब चुनाव हारने के बाद क्या अब तेज प्रताप से  बिहार सरकार द्वारा आवंटित दो एम स्ट्रैंड रोड वाला बंगला खाली कराया जाएगा या नीतीश सरकार उन पर मेहरबान होगी और उन्हें उस बंगले में रहने देगी.   

क्या कहता है सरकारी नियम? 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नियम साफ कहते हैं कि विधायक न रहने पर सरकारी सुविधा स्वतः समाप्त होती है. लेकिन मामला सिर्फ नियम का नहीं सुरक्षा का भी है. तेज प्रताप यादव राजनीतिक रूप से बेहद हाई-प्रोफाइल चेहरा हैं और कई विरोधी भी रखते हैं. इसी वजह से पूरा मुद्दा अब बिहार होम मिनिस्ट्री की टेबल पर जा चुका है. 

खुफिया रिपोर्ट के आने पर होगी कार्रवाई 

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के पास 6 महीनों का समय है यह तय करने के लिए कि तेज प्रताप को अभी भी सिक्योरिटी की जरूरत है या नहीं. इस दौरान अधिकारियों को रिपोर्ट बनानी होगी खतरे का स्तर क्या है? राजनीतिक गतिविधियां जारी है या नहीं? सुरक्षा खतरे की आशंका कितनी मजबूत है? अगर रिपोर्ट में खतरे का स्तर उच्च पाया गया, तो तेज प्रताप की सुरक्षा और बंगले की सुविधा जारी रहेगी भले ही वह विधायक न हों. उच्च अधिकारियों के अनुसार, बंगला खाली कराने की प्रक्रिया भी रिपोर्ट और सुरक्षा फैक्टर्स पर निर्भर करेगी. 

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चुनाव के दौरान सरकार ने दी थी Y+ सिक्योरिटी 

बता दें कि केंद्र सरकार ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर तेज प्रताप यादव को चुनाव के दौरान Y+ श्रेणी की सुरक्षा दी थी. वाई प्लस सिक्योरिटी मिलने के बाद तेज प्रताप की सुरक्षा में CRPF के 11 कमांडो उनके साथ 24 घंटे तैनात रहते हैं. चुनाव के दौरान तेज प्रताप ने दावा किया था कि उनकी जान को खतरा है और उनकी हत्या हो सकती है. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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