आप जो बच्चों से चाहते है वैसा पहले स्वयं बनना पड़ेगा : डॉ इ वी स्वामिनाथन

Updated at : 12 Mar 2026 7:49 PM (IST)
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आप जो बच्चों से चाहते है वैसा पहले स्वयं बनना पड़ेगा : डॉ इ वी स्वामिनाथन

वाह जिंदगी वाह समारोह का आयोजन

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– वाह जिंदगी वाह समारोह का आयोजन छातापुर. मुख्यालय स्थित डाकघर के समीप एक होटल में गुरुवार को ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा वाह जिंदगी वाह समारोह का आयोजन किया गया. भव्य एवं दिव्य रूप से आयोजित समारोह का शुभारंभ अतिथि अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशन स्पीकर डॉ इ वी स्वामिनाथन, राजयोगिनी बिमला दीदी व उमा दीदी, पनोरमा ग्रुप के सीएमडी संजीव मिश्रा, केशव कुमार गुड्डू, शालीग्राम पांडेय आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. जिला संचालिका शालिनी दीदी के संचालन में आयोजित समारोह में इलाके के अध्यात्मप्रेमी महिला व पुरुष काफी संख्या में शामिल हुए. बहनों द्वारा सभी अतिथियों का तिलक लगाकर व पुष्प भेंटकर स्वागत किया गया. मुख्य वक्ता डॉ इ वी स्वामिनाथन ने परमात्मा के स्वरूप और ज्ञान, गुण एवं शक्तियों की व्याख्या करते अमृत वाणी की वर्षा की. कहा कि 2008 की त्रासदी उन्हें अभी भी याद है. त्रासदी के बाद टीम के साथ वे इस इलाके में आये थे. लोगों का दर्द महसूस किया था. 2026 में फिर से जब आये हैं तो सबकुछ बदला हुआ देखकर सुंदर लग रहा है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़े दाता परमात्मा हैं. परमात्मा ही मानव के लिए तीन तोहफे ज्ञान, गुण और शक्तियां लेकर लेकर आते हैं. आत्मा उर्जा का केंद्र है और परमात्मा का अंश है. आत्मा शांत स्वरूप, प्रेम स्वरूप, आनंद स्वरूप, ज्ञान स्वरूप है. कहा कि एकाग्रता का ज्ञान लेकर जो बच्चे पढ़ते हैं तो उसका मार्क्स अच्छा आता है. मन स्थिर रखने को एकाग्रता कहते हैं, आप जो बच्चों से चाहते है वैसा पहले स्वयं बनना पड़ेगा. उन्होंने बच्चों को मोबाइल की लत लगने पर चिंता जाहिर की. कहा कि मोबाइल बच्चों का भविष्य खराब कर रहा है. आने वाले समय में उसे नींद नहीं आने की समस्या से जूझना पड़ सकता है, कहा कि माता पिता को अध्यात्म से जुड़ना चाहिए. इससे बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. राजयोगिनी उमा दीदी ने मेडिटेशन को सभी समस्याओं का समाधान और मानसिक बीमारियों का इलाज बताया. कहा कि जब धर्म की अतिग्लानि होती है तब तब ईश्वर धरा पर अवतरित होते हैं. कलह क्लेश का युग कलयुग होता है. अतिकलयुग के समय परमात्मा अवतरित होकर मानव का कल्याण करते हैं, परम आत्मा निराकार अर्थात ज्योति बिंदु हैं. वही शिवलिंग हैं, आत्मा भृकुटि के मध्य निवास कर शरीर का संचालन करते हैं. आत्मा ही मन, बुद्धि और आदतों को सक्रिय करती है. इस दौरान उन्होंने पांच मिनट तक मन एकाग्र और ध्यानचित करवाकर मेडिटेशन करवाया. राजयोगिनी विमला दीदी ने कहा कि ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में 365 दिन क्लास होती है, कोई छुट्टी नहीं होती है, यहां के शिक्षक स्वयं परमपिता परमेश्वर हैं, यहां की शिक्षा नर को नारायण और नारी को लक्ष्मी स्वरूप बनाती है. संजीव मिश्रा ने कहा कि वे जब नोएडा में थे तो 16 -17 साल इस संस्था से जुड़े रहे. वाह जिंदगी वाह समारोह से हमसबों को किसी भी परिस्थिति में खुश रहने की प्रेरणा मिली है. स्थानीय संचालिका किरण बहन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन किया गया. जिसके बाद उपस्थित जनों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. मौके पर ललितेश्वर पांडेय, गौरीशंकर भगत, सुशील कर्ण, सुधीर कर्ण, संजीत कुमार चौधरी, उपेंद्र भगत, पंकज भगत, अरुण सिंह, अशोक भगत, दिनेश चौधरी, अनोज कुमार सिंह, लल्लू सिंह, सत्येन्द्र कुमार सिंह, प्रह्लाद साह, लड्डू पोद्दार, रमेश पोद्दार, सुशीला देवी, इंदु देवी, अर्चना देवी, कुमारी अंजनी, रीमा कुमारी, कुमारी अंजली, वंदना कुमारी आदि मौजूद थे.

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RAJEEV KUMAR JHA

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