आईटीआई में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर कार्यशाला, कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने का आह्वान

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभ, प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और अन्य प्रोत्साहनों के बारे में जानकारी दी
वीरपुर. पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत बुधवार को आईटीआई वीरपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन सहायक निदेशक एमएसएमई आरके माधव, जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) नाबार्ड मो नेयाज, अग्रणी बैंक प्रबंधक सुपौल राजीव कुमार झा, जिलेबिया के सचिव ब्रजेश कुमार राय व जगदीश बुद्धा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम में अधिकारियों ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए कारीगरों और शिल्पकारों से इससे जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया. कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, राजमिस्त्री, नाई, दर्जी, टोकरी बनाने वाले, मूर्तिकार समेत अन्य पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कारीगरों ने भाग लिया. जिन्हें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभ, प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और अन्य प्रोत्साहनों के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक एमएसएमई आरके यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है. इस योजना के माध्यम से सरकार पारंपरिक हुनर को पहचान देने के साथ उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रही है. इससे कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान मिल सकेगी. जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) नाबार्ड मो नेयाज ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पारंपरिक कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उन्होंने बताया कि योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण के साथ-साथ आसान ऋण सुविधा भी प्रदान की जा रही है. योजना के अंतर्गत पहले चरण में एक लाख रुपये तक का ऋण तथा बाद में दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है. इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान दैनिक भत्ता और आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए टूलकिट सहायता भी दी जाती है. अग्रणी बैंक प्रबंधक सुपौल राजीव कुमार झा ने कहा कि बैंक इस योजना को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने बताया कि लाभुकों को बिना जटिल प्रक्रिया के आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे अपने व्यवसाय को आधुनिक तरीके से संचालित कर सकें. कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने योजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी. प्रतिभागियों को बताया गया कि इस योजना के अंतर्गत कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह के सदस्य तथा बड़ी संख्या में कारीगर और शिल्पकार उपस्थित थे.
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