कोसी बराज पर कम होगा पानी का दबाव, 15 मई से एक्टिव होगा सेंट्रल पायलट चैनल

कोसी बराज पर लगातार बढ़ते जल दबाव से सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने बड़ी पहल की है.
पहल. बढ़ते जल दबाव के बीच कोसी की मुख्य धारा को नदी के बीच लाने की कवायद – 3.04 करोड़ की लागत से तैयार हुआ विशेष चैनल वीरपुर. कोसी बराज पर लगातार बढ़ते जल दबाव से सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने बड़ी पहल की है. वर्ष 2024 और 2025 में कोसी बराज पर रिकॉर्ड 6.61 लाख क्यूसेक जलप्रवाह दर्ज होने के बाद सेंट्रल हाई लेवल कमेटी ने बराज की जर्जर होती स्थिति पर गंभीर चिंता जतायी थी. इसी के मद्देनजर अब कोसी नदी की मुख्य धारा को नियंत्रित करने और पूर्वी तटबंध पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से ‘सेंट्रल पायलट चैनल’ का निर्माण कराया गया है. जिसे आगामी 15 मई से सक्रिय किया जायेगा. 28 फाटकों के बीच बनाया गया विशेष चैनल कोसी बराज के 28 फाटकों के बीचों-बीच बनाये गये इस सेंट्रल पायलट चैनल का निर्माण 3 करोड़ 4 लाख रुपये की लागत से किया गया है. चैनल की लंबाई 2.5 किलोमीटर, चौड़ाई 30 मीटर और गहराई नदी के बेड लेवल से लगभग दो मीटर रखी गयी है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह चैनल कोसी नदी की तेज धारा को नियंत्रित कर उसे नदी के मध्य भाग में प्रवाहित करने में सहायक होगा. जिससे दोनों तटबंधों और स्परों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम किया जा सकेगा. अभियंताओं ने किया निरीक्षण गुरुवार को कोसी योजना के अभियंताओं की टीम ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि विभागीय आदेश मिलते ही 15 मई से चैनल को एक्टिवेट कर दिया जायेगा. इस मौके पर कोसी योजना के एसडीओ प्रशांत कुमार, जूनियर इंजीनियर संजय कुमार, मुकेश कुमार तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि बसंत भगत मौजूद रहे. बोले चीफ इंजीनियर कोसी योजना के चीफ इंजीनियर संजीव शैलेश ने बताया कि सेंट्रल पायलट चैनल एक वैकल्पिक तकनीकी व्यवस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी की धारा को बीच में बनाए रखना है. उन्होंने कहा कि कोसी बराज, स्पर और स्टर्ड स्थायी संरचनाएं हैं, लेकिन अत्यधिक जलप्रवाह के समय नदी की धारा किसी एक तटबंध की ओर अधिक दबाव बनाती है. ऐसे में इस चैनल के जरिए पानी की मुख्य धारा को नदी के मध्य भाग में लाने का प्रयास किया जायेगा. ताकि दोनों तटबंध सुरक्षित रह सकें. बताया कि निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. विभागीय निर्देश मिलते ही इसे विधिवत चालू कर दिया जायेगा. बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में कोसी नदी के कटाव और तटबंधों पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलेगी. हर वर्ष बाढ़ और कटाव की समस्या से जूझने वाले कोसी क्षेत्र के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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