सुपौल के वीरपुर-भीमनगर को मिलेगा पर्यटन का नया नक्शा? कोसी बराज से इंडो-नेपाल बॉर्डर तक प्रशासन ने शुरू किया सर्वे

सांकेतिक तस्वीर
सुपौल प्रशासन ने वीरपुर और भीमनगर को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरीक्षण किया. इससे स्थानीय रोजगार और विकास की नई संभावनाएं बढ़ेंगी.
Supaul News: सुपौल जिले के वीरपुर और भीमनगर क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है. भारत-नेपाल सीमा से सटे इस इलाके में जिला प्रशासन ने पर्यटन विकास की संभावनाओं की तलाश के लिए व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू किया है. कोसी बराज, नो मैंस लैंड, भीमनगर कस्टम क्षेत्र और पुरानी रेलवे भूमि का सर्वे कर यह देखा जा रहा है कि किन स्थानों को पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय रोजगार से जोड़ा जा सकता है. यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो कोसी क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों का नया अध्याय खुल सकता है.
इंडो-नेपाल बॉर्डर से भीमनगर तक हुआ निरीक्षण
गुरुवार को सुपौल के उप विकास आयुक्त (DDC) इंद्रवीर कुमार और वीरपुर एसडीएम विनय कुमार ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया.
निरीक्षण की शुरुआत नो मैंस लैंड से हुई और उसके बाद अधिकारियों ने भीमनगर क्षेत्र तथा पूर्व कोसी रेलवे की भूमि का भी जायजा लिया.
इस दौरान खाली और अतिक्रमित भूमि, पुरानी संरचनाएं, आवासीय परिसर तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत आकलन किया गया.
अमीन को बुलाकर कराई गई जमीन की मापी
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने एसएसबी अधिकारियों, बसंतपुर बीडीओ सुजीत कुमार मिश्रा और सीओ ब्रजेश कुमार सिंह से क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली.
इसके बाद मौके पर अमीन को बुलाकर भूमि की मापी कराने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया.
प्रशासन यह समझना चाहता है कि पर्यटन विकास के लिए उपलब्ध सरकारी भूमि और अन्य संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है.
पैदल पहुंचे कस्टम कार्यालय तक
डीडीसी और एसडीएम ने नो मैंस लैंड क्षेत्र से पैदल चलते हुए भीमनगर कस्टम कार्यालय तक निरीक्षण किया.
इस दौरान सड़क के दोनों ओर स्थित वैध-अवैध, सामान्य और क्षतिग्रस्त संरचनाओं का भी निरीक्षण किया गया और उनके उपयोग तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई.
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़ा है प्रस्ताव
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत की जा रही है.
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.
इसी के तहत वीरपुर और भीमनगर क्षेत्र में पर्यटन आधारित विकास योजनाओं की संभावनाएं चिन्हित की जा रही हैं.
कोसी बराज से आगे भी रुकें पर्यटक
डीडीसी इंद्रवीर कुमार ने कहा कि वर्तमान में वीरपुर आने वाले अधिकांश पर्यटक कोसी बराज देखने के बाद सीधे नेपाल चले जाते हैं.
यदि वीरपुर और भीमनगर के आसपास के क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए, तो पर्यटक यहां ठहरकर प्राकृतिक सौंदर्य, सीमावर्ती संस्कृति और अन्य स्थानीय आकर्षणों का अनुभव कर सकेंगे.
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
प्रशासन का मानना है कि पर्यटन को बढ़ावा मिलने से होटल, भोजनालय, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड सेवा और अन्य व्यवसायों को नई गति मिल सकती है.
इससे सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
Supaul News: अधिकारियों को दिए गए आगे के निर्देश
डीडीसी ने बताया कि बीडीओ और सीओ को पर्यटन से संबंधित संभावित स्थलों की पहचान, भूमि उपलब्धता और अन्य संसाधनों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं.
निरीक्षण के दौरान एसएसबी के उपकमांडेंट हरजीत राव, असिस्टेंट कमांडेंट राहुल कुमार, जिला प्रशासन के कर्मी, एसएसबी जवान, स्थानीय मुखिया बबलू यादव और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
यदि प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो वीरपुर-भीमनगर क्षेत्र भविष्य में भारत-नेपाल सीमा पर एक महत्वपूर्ण पर्यटन और रोजगार केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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