देहरादून में बरसाती नाले में डूबने से खगड़िया के मजदूर की दो बेटियों की मौत, पहले भी खो चुका है एक बेटी

परिजनों में कोहराम मच गया
उत्तराखंड के देहरादून में मजदूरी कर रहे खगड़िया के एक गरीब मजदूर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बरसाती नाले में डूबने से परिवार की दो मासूम बेटियों की मौत हो गई. यह परिवार पहले भी ऐसी त्रासदी झेल चुका है/
चौथम (खगड़िया) से धीरज सिंह बन्टू की रिपोर्ट
Khagaria News: खगड़िया जिले के चौथम प्रखंड के एक गरीब मजदूर परिवार पर ऐसा दुख टूटा है, जिसने पूरे गांव को गम में डुबो दिया. उत्तराखंड के देहरादून में बरसाती नाले में डूबने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई. दोनों बच्चियां अपने माता-पिता के साथ मजदूरी के लिए देहरादून में रह रही थीं. घटना की सूचना जैसे ही चौथम के पिपरा केशवनगर मुसहरी पहुंची, पूरे मुसहरी टोला में मातमी सन्नाटा छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. इस परिवार ने पहले भी डूबने की एक ऐसी ही त्रासदी झेली थी.
मजदूरी करने देहरादून गया था परिवार
मृत बच्चियों की पहचान सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के रूप में हुई है. दोनों के पिता रुदल सदा चौथम थाना क्षेत्र के पिपरा केशवनगर मुसहरी के निवासी हैं.
ग्रामीणों के अनुसार, रुदल सदा पिछले करीब एक वर्ष से अपने परिवार के साथ देहरादून में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे. इसी दौरान दोनों बच्चियां बरसाती नाले में डूब गईं, जिससे उनकी मौत हो गई.
गांव पहुंची खबर, पूरे टोले में छाया मातम
जैसे ही घटना की सूचना गांव पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया. पिपरा केशवनगर मुसहरी में लोगों की भीड़ जुट गई और पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया.
गुरुवार शाम गांव स्थित रुदल सदा के घर पर ताला लटका मिला, क्योंकि पूरा परिवार देहरादून में रह रहा था.
पहले भी डूबने से खो चुके हैं एक बेटी
ग्रामीणों ने बताया कि यह परिवार पहले भी ऐसी ही दर्दनाक त्रासदी का सामना कर चुका है.
कुछ वर्ष पूर्व रुदल सदा की एक अन्य बेटी की चौथम प्रखंड के पछहत्तर क्षेत्र में कोसी नदी में डूबने से मौत हो गई थी. अब दो और बेटियों की असमय मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बताया जाता है कि रुदल सदा के परिवार में अब तीन बेटे और तीन बेटियां हैं, जिनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है.
उनके तीन भाई अभी भी पिपरा केशवनगर मुसहरी में रहते हैं. लगातार बेटियों को खोने की इस त्रासदी ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
प्रवासी मजदूर परिवारों की असुरक्षा फिर सामने आई
यह घटना एक बार फिर उन प्रवासी मजदूर परिवारों की कठिन परिस्थितियों को सामने लाती है, जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं. ऐसे परिवार अक्सर अस्थायी बस्तियों और असुरक्षित इलाकों में रहने को मजबूर होते हैं, जहां बरसात के दौरान नाले, नदी और जलभराव जानलेवा साबित हो सकते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब मजदूर परिवारों के बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और राहत व्यवस्था की जरूरत है.
Khagaria News: ग्रामीणों ने प्रशासन से की सहायता की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता, आपदा राहत और अन्य सरकारी मदद उपलब्ध कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि लगातार बेटियों को खोने वाले इस परिवार को तत्काल राहत और पुनर्वास सहायता मिलनी चाहिए.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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