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एचआईवी रोकथाम को लेकर पी-एमपीएसई सर्वे का दूसरा चरण शुरू

Updated at : 25 Nov 2025 6:07 PM (IST)
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एचआईवी रोकथाम को लेकर पी-एमपीएसई सर्वे का दूसरा चरण शुरू

651 जिलों में पहले चरण का सफल संचालन

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– 29 हॉटस्पॉट की पहचान उच्च जोखिम समूहों पर विशेष फोकस सुपौल. जिले में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम तथा उच्च जोखिम समूहों की सटीक पहचान के उद्देश्य से प्रोग्रामेटिक मैपिंग और जनसंख्या आकार अनुमान (पी- एमपीएसई) कार्यक्रम के तहत गठित कम्युनिटी एडवाइजरी बोर्ड (सीएबी) की दूसरी बैठक जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ चंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक का आयोजन बीजीजेएएस के सहयोग से जिला संचारी रोग नियंत्रण कार्यालय में किया गया. बैठक को संबोधित करते हुए डॉ कुमार ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और यूएन एड्स ने एचआईवी, एड्स महामारी प्रभावित क्षेत्रों में पब्लिक हेल्थ सर्विलांस एंड रिस्पॉन्स प्रणाली के अंतर्गत उच्च जोखिम समुदायों का अनुमान लगाने की अनुशंसा की है. उन्होंने कहा कि अब तक सुपौल जिले में 29 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है और यहां मौजूद चारों उच्च जोखिम समूहों के बारे में संस्थाओं द्वारा विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है. पी एमपीएसई कैसे काम करता है? जिला एड्स नियंत्रण एवं बचाव इकाई के डीपीएम डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि पी-एमपीएसई एक व्यवस्थित एवं स्थायी दृष्टिकोण है, जिसके माध्यम से उन स्थानों की पहचान होती है जहां उच्च जोखिम समुदाय अक्सर एकत्रित होते हैं. इन स्थानों को हॉटस्पॉट कहा जाता है. उन्होंने कहा कि यह पद्धति विश्वभर में प्रभावी कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिए अनुशंसित है और भारत में भी इसका उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है. जिला समन्वयक निशात अहमद ने कहा कि राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) के अनुसार भारत में निम्नलिखित समूह एचआईवी संक्रमण के लिए उच्च जोखिम समूह माने जाते हैं. 651 जिलों में पहले चरण का सफल संचालन प्रभारी डीआईएस बंधु नाथ झा ने कहा कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच देश के 651 जिलों में पी-एमपीएसई का पहला चरण पूरा किया गया. इससे देश में उच्च जोखिम समुदायों के आकार का महत्वपूर्ण डाटाबेस तैयार हुआ और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिली. कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति के कार्यपालक निदेशक इं कौशलेंद्र कुमार ने बताया कि दिसंबर माह तक सुपौल जिले में सभी हॉटस्पॉट का आकलन तथा संभावित उच्च जोखिम समूहों की संख्या का पता लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. संस्था यह काम सुपौल के साथ-साथ सहरसा, बेगूसराय और समस्तीपुर में भी संचालित कर रही है. बैठक में बंधुनाथ झा, परियोजना प्रबंधक पुष्पम कुमार समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया और जिले में एचआईवी रोकथाम के लिए आपसी समन्वय और मजबूत कार्ययोजना पर जोर दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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