न्यायालय के आदेश पर हटाया गया अतिक्रमण, महादलित समुदाय के लोगों ने किया विरोध

Published by : RAJEEV KUMAR JHA Updated At : 26 Apr 2026 7:48 PM

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इस दौरान महादलित समुदाय के लोगों ने इसका विरोध भी किया

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राघोपुर. थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत सिमराही के वार्ड नंबर 03 में रविवार को वीरपुर न्यायालय के आदेश पर प्रशासन द्वारा भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई. इस दौरान महादलित समुदाय के लोगों ने इसका विरोध भी किया. हालांकि बाद में अधिकारियों ने बीच में ही मुहिम को बंद कर दिया और वापस चले गए. दरअसल, भूमि विवाद से जुड़े इस मामले में मिली जानकारी अनुसार, सिमराही निवासी मो अख्तर की रैयती भूमि पर कुछ महादलित परिवारों द्वारा अवैध रूप से घर बनाकर रहने का आरोप है. मो अख्तर ने वर्ष 2011 में वीरपुर न्यायालय में टाइटिल सूट दायर किया था. लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में न्यायालय ने उनके पक्ष में डिग्री पारित की और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया. 21 दिसंबर को भी न्यायालय के आदेश पर मजिस्ट्रेट सह बसंतपुर सीओ हेमंत अंकुर की नेतृत्व में तीन सदस्यीय न्यायलीय टीम, सीओ, थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस बलों द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई थी. लेकिन पूर्णरूपेण खाली नहीं के कारण पुनः रविवार को पुनः अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई. जहां बीडीओ सत्येंद्र कुमार यादव के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था. अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर की मदद से संरचनाओं को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई. लेकिन जैसे ही प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की, अतिक्रमणकारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया. बाद में कुछ संरचना को तोड़ने के बाद अभियान को स्थगित कर दिया गया. इस संबंध में भूमि स्वामी मो अख्तर ने बताया कि उक्त जमीन उनकी मरोसी जमीन है. जो पहले उनके दादा के नाम पर थी. वर्ष 2007 में उनके दादा ने यह जमीन उन्हें दान में दे दी थी. जिसके बाद वे इसके वैध स्वामी बने. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 में श्यामली सादा, बद्री सादा और उनके परिजनों ने गुट बनाकर उनकी जमीन पर बांस का खूंटा गाड़ दिया था. इस मामले में कानूनी नोटिस भी भेजा गया कुछ लोग जेल भी गए. लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2011 में उन लोगों ने जमीन पर घर बना लिया. मो अख्तर ने बताया कि संबंधित लोगों को उनके स्वयं के जमीन पर इंदिरा आवास योजना के तहत घर भी मिल चुका है. बावजूद इसके वे जबरन उनकी जमीन पर कब्जा कर रह रहे थे. न्यायालय से डिग्री मिलने के बाद उन्होंने दखल-देहानी का केस दायर किया. 19 अक्टूबर को भी प्रशासन जमीन खाली कराने पहुंचा था, लेकिन तब भी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी. इसके बाद 21 दिसंबर को भी कार्रवाई की गई. इसके बाद रविवार को पुनः कार्रवाई की जा रही है.

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