इलाज के लिए भटक रहे कार्डधारक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Mar 2017 7:52 AM (IST)
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड धारकों की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने की जिम्मेवारी बिडाल हेल्थ केयर व नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दी गयी. कंपनी की मनमरजी के कारण स्मार्ट बीमा योजना सरजमी पर अपने उद्देश्य से भटका हुआ है. शिवानंद मिश्र सुपौल : जिले भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड […]
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड धारकों की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने की जिम्मेवारी बिडाल हेल्थ केयर व नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दी गयी. कंपनी की मनमरजी के कारण स्मार्ट बीमा योजना सरजमी पर अपने उद्देश्य से भटका हुआ है.
शिवानंद मिश्र
सुपौल : जिले भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड योजना की स्थिति बदतर है. आलम यह है कि जहां स्मार्ट कार्ड धारक परिवार योजना के तहत उपचार कराने के लिए अस्पताल का चक्कर काटने पर विवश हो रहे हैं. वहीं जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा लाभुकों को समुचित लाभ उपलब्ध कराने की गरज से संचालित निजी अस्पताल को सरकारी एजेंसी के कर्मियों द्वारा बेवजह परेशान कर योजना कार्य करने से रोकने का कार्य किया जा रहा है. ताकि निर्धारित अवधि बीते जाने के बाद एजेंसी को मुनाफा हो सके. मालूम हो कि सरकार द्वारा जिले भर में उक्त बीमा योजना के तहत संबंधित कार्ड धारकों के चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने की जिम्मेवारी बिडाल हेल्थ केयर व नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दिया गया. साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति को उक्त कार्य में सहयोग कराये जाने की दायित्व सौंपा गया, लेकिन बिडाल कंपनी की मनमरजी के कारण स्मार्ट बीमा योजना सरजमी पर अपने उद्देश्य से भटका हुआ है.
एक लाख 59 हजार 843 ने कराया स्वास्थ्य बीमा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना गरीबों के लिए एक सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है.
यह जनता को सरकारी अस्पतालों के साथ ही निजी में अस्पताल में भी भरती होने के लिए कैशलेस बीमा सुविधा प्रदान करता है. जिले भर के तीन लाख 61 हजार 361 बीपीएल परिवारों में से इस योजना के तहत एक लाख 59 हजार 843 परिवारों ने पंजीयन करवा कर स्मार्ट कार्ड प्राप्त किया.
तालमेल का अभाव: एजेंसी द्वारा कार्य को समुचित तरीके से कराये जाने के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया, जहां कमेटी के सदस्यों द्वारा उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों का चयन किया गया. जिले भर में छह निजी अस्पतालों का चयन किया गया. साथ ही एजेंसी द्वारा संबंधित अस्पतालों को कार्य करने की अनुमति प्रदान की गयी, लेकिन कंपनी के सदस्यों द्वारा उक्त छह में से चार अस्पतालों को बेवजह शॉ कॉज पूछते हुए कार्ड धारकों के चिकित्सीय कार्य करने से मना कर दिया.
सामाजिक सुरक्षा के तहत सभी के लिए स्वास्थ्य आश्वासन भारत सरकार के आदर्श कार्य है. इस संबंध में सरकार द्वारा विभिन्न कदम उठाये गये हैं. जिनमें केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित असंगठित मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम 2008 सबसे महत्वपूर्ण नीति रही है. इस अधिनियम की सिफारिश केंद्र सरकार द्वारा इस मकसद से की गयी थी कि वे सभी असंगठित मजदूरों को नि:शक्ता, स्वास्थ्य झटके, मातृत्व और बुढ़ापे में उनको सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर सकें. स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का दो तिहाई भाग आउट आफ पॉकेट है, जो स्वास्थ्य पर खर्च करने का सबसे अक्षम और कम से कम जवाबदेह तरीका है. आपूर्ति पक्ष का वित्तपोषण अकेले स्वास्थ्य पर आउट ऑफ पॉकेट व्यय को कम करने में सफल नहीं पाया गया है, इसलिए मांग पक्ष के वित्तपोषण के परीक्षण के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का फैसला किया. स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के स्वास्थ्य पर व्यय को कम करना व स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ाना है.
इस योजना के तहत एजेंसी को सरकार प्रति कार्ड 375 रुपया दिया गया, जहां कंपनी को सरकार द्वारा सुपौल जिले के एक लाख 59 हजार 843 परिवारों द्वारा बनाये गये कार्ड से पांच करोड़ 99 लाख 41 हजार 125 रुपये मिला. कई जानकारों ने एजेंसी द्वारा कार्य को प्रभावित किये जाने का कारण गिनाते हुए बताया कि एजेंसी चाह रही है कि स्मार्ट कार्ड की वैधता तिथि का कुछ ही समय शेष है.
ऐसे में कम अस्पतालों में चिकित्सा का कार्य संचालित कराया जायेगा, तो कंपनी को अधिक राशि वहन नहीं करना होगा. उक्त योजना के तहत जिला कमेटी के निर्णय के अनुसार केयर नर्सिंग होम सुपौल, नीलम हेल्थ केयर, रिसर्च संस्थान त्रिवेणीगंज, सीटी अस्पताल सिमराही, भगवती नर्सिंग होम निर्मली, शांति नर्सिंग होम व सुशीला नर्सिंग होम छातापुर में चिकित्सीय कार्य कराया जा रहा था, लेकिन एजेंसी के कर्मियों द्वारा चार अस्पतालों को कार्य करने से मना कर दिया. मालूम हो कि स्मार्ट कार्ड धारकों को जागरूकता के अभाव व अस्पताल की कमी रहने के कारण दिसंबर माह तक महज एक हजार 620 लाभुकों को ही योजना का लाभ उपलब्ध हो पाया है
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