जाना होगा शहर से बाहर चिंताजनक. शहर में नहीं है पिकनिक स्पॉट

Updated at :01 Jan 2017 3:43 AM
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जाना होगा शहर से बाहर चिंताजनक. शहर में नहीं है पिकनिक स्पॉट

65 हजार से अधिक की आबादी वाले सुपौल शहर में अब तक एक बेहतर पार्क अथवा उद्यान का निर्माण संभव नहीं हो सका है. सुपौल : सूबे के सभी शहरों में पार्क व उद्यान को विकसित किया जा रहा है. करोड़ों की योजनाएं चलायी जा रही हैं. मकसद है शहरवासियों के मनोरंजन के लिए माकुल […]

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65 हजार से अधिक की आबादी वाले सुपौल शहर में अब तक एक बेहतर पार्क अथवा उद्यान का निर्माण संभव नहीं हो सका है.

सुपौल : सूबे के सभी शहरों में पार्क व उद्यान को विकसित किया जा रहा है. करोड़ों की योजनाएं चलायी जा रही हैं. मकसद है शहरवासियों के मनोरंजन के लिए माकुल जगह की उपलब्धता सुनिश्चित करना. लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि सरकार की इस योजना से सुपौल शहर अब तक अलग रहा है. सन‍ 1991 में जिला बनने के बाद से सुपौल के विकास को भी गति मिली है. सड़क, बिजली से लेकर अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास हुआ है. लेकिन 65 हजार से अधिक की आबादी वाले सुपौल शहर में अब तक एक बेहतर पार्क अथवा उद्यान का निर्माण संभव नहीं हो सका है. पार्क व उद्यान के नाम पर शहर में एकमात्र चिल्ड्रेन पार्क अवस्थित है.
लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह भी उपयोग विहीन साबित हो रहा है. स्थानीय लोग बताते हैं कि शुरुआत के दिनों में जब पार्क का निर्माण हुआ था, तब यहां विशेष तौर पर बच्चों के मनोरंजन के लिए कई संसाधन उपलब्ध थे. लेकिन बीतते वक्त के साथ सुविधाएं भी इतिहास बन गयी. आलम यह है कि शहर में अब एक भी पिकनिक स्पॉट नहीं रह गया है. जाहिर है पिकनिक के लिए बच्चे हो या जवान, सभी को शहर से बाहर ही जाना होगा.
दशकों पूर्व हुआ था चिल्ड्रेन पार्क का निर्माण : आजादी के बाद करीब 50 वर्ष पूर्व शहर में लोगों के स्वस्थ मनोरंजन के लिए प्रशासन द्वारा चिल्ड्रेन पार्क का निर्माण कराया गया था. हालांकि क्षेत्रफल की दृष्टि से पार्क बहुत बड़ा नहीं है. लेकिन निर्माण के वक्त प्रशासन द्वारा कई प्रकार के झूले व अन्य मनोरंजन के उपकरण लगाये गये थे. पार्क के बीचोंबीच झरना लगाया गया. लेकिन वक्त बीतता गया और संसाधनों का टोटा होता चला गया. इसके अलावा पूर्व के भी जो संसाधन थे, रखरखाव के अभाव में बेकार होते चले गये. वही कई उपकरण या तो शरारती तत्वों के कारण बरबाद हो गये या फिर चोरों ने चुरा लिया. झरना आज भी लगा हुआ है, लेकिन इससे पानी कभी नहीं निकलता है. हालांकि हाल के दिनों में पार्क के जीर्णोद्धार पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किये गये. लेकिन बाउंड्रीकरण से अधिक अब कुछ नजर नहीं आ रहा है.
50 वर्ष पूर्व बना चिल्ड्रेन पार्क.
नगर परिषद के माध्यम से चिल्ड्रेन पार्क का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. शीघ्र ही कार्य संपन्न कर लिया जायेगा. आवश्यक सुविधाएं भी शीघ्र उपलब्ध करायी जायेंगी.
अरुण कुमार, प्रभारी सदर एसडीएम सह आइसीडीएस डीपीओ, सुपौल
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