दोषियों पर कार्रवाई नहीं
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :13 Aug 2016 8:07 AM
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अनदेखी. अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर शिथिल हो जाती है संचिका जिले के निर्मली प्रखंड में नगर पंचायत द्वारा वर्ष 2012 में स्ट्रीट लाइट की खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की बात सामने आयी थी. खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की पुष्टि […]
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अनदेखी. अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर शिथिल हो जाती है संचिका
जिले के निर्मली प्रखंड में नगर पंचायत द्वारा वर्ष 2012 में स्ट्रीट लाइट की खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की बात सामने आयी थी. खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की पुष्टि हुई. जांचोपरांत आर्थिक अपराध इकाई पटना के पुलिस अधीक्षक के द्वारा जांच में दोषी पाये गये लोगों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया. लेकिन अब तक दोषी लोगों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा सकी है.
सुपौल : आम लोग व कनीय कर्मियों पर सरकारी राशि बकाया रहने अथवा गबन की पुष्टि होने के बाद वरीय पदाधिकारी कार्रवाई करने में तनिक भी विलंब नहीं करते. लेकिन यदि सरकारी राशि के गबन का मामला सरकारी पदाधिकारी से संबंधित हो तो संचिका अपने आप शिथिल हो जाती है.
ऐसा ही एक मामला सामने आया है. जिसमें जांच के बाद सरकारी राशि के गबन की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पायी है. जिले के निर्मली प्रखंड में नगर पंचायत द्वारा वर्ष 2012 में स्ट्रीट लाइट की खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की बात सामने आयी थी. स्थानीय वार्ड पार्षद अनिल कुमार द्वारा शिकायत किये जाने के बाद मामले की की जांच करवायी गयी. जिसमें स्ट्रीट लाइट खरीद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा व सरकारी राशि के गबन की पुष्टि हुई.
जांचोपरांत आर्थिक अपराध इकाई पटना के पुलिस अधीक्षक के द्वारा जांच में दोषी पाये गये लोगों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया. लेकिन उक्त आदेश भी संचिका के साथ ही दब कर रह गया. नतीजतन अब तक दोषी लोगों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा सकी है.
जांच में हुई फर्जीवाड़े व गबन की पुष्टि
अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन कुमार अरुण प्रकाश ने जिला पदाधिकारी को समर्पित जांच प्रतिवेदन में कहा है कि 17 दिसंबर 2012 को 150 अदद सीएफएल लाइट 85 वाट स्ट्रीट लाइट का क्रय नगर पंचायत द्वारा किया गया.लेकिन स्थलीय जांच के दौरान नगर पंचायत निर्मली अंतर्गत चयनित स्थल पर बिजली पोल में सेंसर के साथ एक भी स्ट्रीट लाइट लगा नहीं पाया गया.चयनित स्थल पर 99 अदद एवं अन्य स्थल पर 18 कुल 117 अदद स्ट्रीट लाइट लगा हुआ पाया गया. इनमें कुल 82 लाइट चालू अवस्था में पाया गया.जबकि 35 लाइट खराब पाये गये.शेष 33 लाइट पोल से गायब था.
एडीएम ने जांच प्रतिवेदन में कहा है कि जिस कंपनी से लाइट खरीद किया गया, वह कंपनी सेंसर नहीं बनाती है.उक्त कंपनी के लाइट का वास्तविक मूल्य 1790 रुपये है.जबकि प्रति लाइट 4350 रुपये की दर से भुगतान किया गया है. जांच अधिकारी ने इस गबन मामले में संबंधित फार्म, नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी, नाजिर एवं कर्मी को दोषी मानते हुए कार्रवाई किये जाने की अनुशंसा किया. साथ ही अधिक भुगतान कियेगये राशि की वसूली का भी अनुरोध किया है.
क्या है आर्थिक अपराध इकाई का आदेश
आर्थिक अपराध इकाई बिहार पटना के पुलिस अधीक्षक ने जिला पदाधिकारी सुपौल को पत्र लिख कर कहा है कि निर्मली नगर पंचायत वार्ड नंबर 11 के वार्ड पार्षद अनिल कुमार के आवेदन पत्र पर जांच कर कार्रवाई हेतु इकाई के पत्रांक 3117 (गबन) दिनांक 10 जुलाई 2014 के माध्यम से भेजा गया था.
आपके द्वारा मामले की जांच करायी गयी.जिसमें नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी, नाजिर एवं कर्मी दोषी पाये गये.पुलिस अधीक्षक ने जिला पदाधिकारी को जांच में दोषी पाये गये पदाधिकारी एवं कर्मियों पर आपराधिक मामला दर्ज कराते हुए कृत कार्रवाई से अवगत कराने का आदेश दिया है.लेकिन जारी आदेश के छह माह बाद भी दोषी पाये गये अधिकारी व कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी है.
क्या है मामला
नगर पंचायत के सशक्त स्थायी समिति की 15 नवंबर 2012 को आयोजित बैठक के प्रस्ताव संख्या तीन में हेवल्स कंपनी का 150 सीएफएल लाइट 85 वाट के क्रय हेतु एक अदद लाइट का दर 4350 रुपये कुल 06 लाख 52 हजार 500 रुपये का कोटेशन को स्वीकृत करते हुए रीताश्री इंटरप्राइजेज पटना एवं रिलायबुल इंटरप्राइजेज पटना से क्रय करने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी.
इन लाइटों की खरीद में हुई गड़बड़ी के बाद वार्ड नंबर 11 के वार्ड पार्षद अनिल कुमार द्वारा मामले की शिकायत वरीय अधिकारियों से किया गया.जिसके बाद मामले की जांच करवायी गयी.जिसमें सरकारी राशि के गबन एवं लाइट खरीद में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.
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