पोस्टमार्टम के लिए लगानी पड़ती है गुहार
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :11 Aug 2016 4:21 AM
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हाल सदर अस्पताल का. चिकित्सकों के सामने सीएस भी हो जाते हैं लाचार बीते रविवार को पशु चारा ले आने के क्रम में डूबे एक अधेड़ का शव बुधवार को नदी से बरामद किया गया. लेकिन शव के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सक द्वारा आनाकानी किये जाने के बाद शव के साथ बलवा पंचायत से पहुंचे […]
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हाल सदर अस्पताल का. चिकित्सकों के सामने सीएस भी हो जाते हैं लाचार
बीते रविवार को पशु चारा ले आने के क्रम में डूबे एक अधेड़ का शव बुधवार को नदी से बरामद किया गया. लेकिन शव के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सक द्वारा आनाकानी किये जाने के बाद शव के साथ बलवा पंचायत से पहुंचे दर्जनों ग्रामीण आक्रोशित हो गये और अस्पताल में हंगामा करने लगे लेकिन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने ग्रामीणों को किसी तरह शांत कराया.
सुपौल : सदर प्रखंड के बलवा पंचायत में रविवार को पशु चारा लाने जाने के क्रम में डूबे एक अधेड़ का शव बुधवार को नदी से बरामद किया गया. घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीण, मृतक के परिजन समेत अंचल कार्यालय से भेजे गये गोताखोर गत चार दिनों से शव की खोज में जुटे थे, लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई. बुधवार को पंचायत क्षेत्र के नरहैया गांव स्थित नदी के पानी में शव स्वत: ऊपर आ गया.
जिसके बाद ग्रामीणों को जानकारी मिली और शव को बाहर निकाला. ग्रामीणों ने सदर पुलिस को शव मिलने की जानकारी दी गयी और शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया. जहां काफी मशक्कत के बाद शव का पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सक द्वारा आनाकानी किये जाने के बाद शव के साथ बलवा पंचायत से पहुंचे दर्जनों ग्रामीण आक्रोशित हो गये और अस्पताल में हंगामा करने लगे, लेकिन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एनके चौधरी एवं डॉ कन्हैया प्रसाद सिंह ने आक्रोशित ग्रामीणों शांत कराया.
ज्ञात हो कि रविवार को बलवा पंचायत के वार्ड नंबर नौ निवासी 50 वर्षीय कमल यादव पशु चारा लाने के लिए घर से निकले थे. इसी क्रम में नदी की तेज धारा में बह जाने की वजह से वे डूब गये.स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अंचल कार्यालय व सदर थाना को मामले की जानकारी दी गयी.जिसके बाद से लगातार शव को खोजने का प्रयास जारी था.
लाखों रुपये वेतन के बाद भी चिकित्सक नहीं करते अपनी ड्यूटी
सदर अस्पताल में कार्यरत कई चिकित्सकों की मनमानी इतनी बढ़ गयी है कि इनके सामने स्थानीय अधिकारी की बात तो दूर पूरा स्वास्थ्य महकमा बौना नजर आता है. कई चिकित्सक प्रति माह लाखों रुपये वेतन प्राप्त करने के बावजूद अस्पताल में अपनी ड्यूटी नहीं करते हैं. ऐसे चिकित्सकों में डॉ जितेंद्र कुमार सिंह का नाम आता है.
आइएमए सहरसा के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह गत कई वर्षों से सदर अस्पताल में पदस्थापित हैं. हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थापित इस चिकित्सक के द्वारा आज तक सदर अस्पताल में हड्डी रोग से पीड़ित किसी मरीज का उपचार नहीं किया गया है. डॉ जितेंद्र सिंह के रूतबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनकी ड्यूटी अस्पताल में रात्रि सेवा के दौरान आज तक नहीं लगी है. इसका मुख्य वजह यह है कि इन्हें सहरसा से आना-जाना पड़ता है. बुधवार को इमरजेंसी ड्यूटी में डॉ सिंह ही तैनात थे.इन्हीं को पोस्टमार्टम भी करना था.लेकिन अपनी धौंस जमा कर उन्होंने सीएस व डीएस तक को लाचार बना दिया.
सदर अस्पताल में कार्यरत कई चिकित्सकों की मनमानी इतनी बढ़ गयी है कि इनके सामने स्थानीय अधिकारी की बात तो दूर पूरा स्वास्थ्य महकमा बौना नजर आता है. कई चिकित्सक प्रति माह लाखों रुपये वेतन प्राप्त करने के बावजूद अस्पताल में अपनी ड्यूटी नहीं करते हैं. ऐसे चिकित्सकों में डॉ जितेंद्र कुमार सिंह का नाम आता है.
आइएमए सहरसा के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह गत कई वर्षों से सदर अस्पताल में पदस्थापित हैं. हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थापित इस चिकित्सक के द्वारा आज तक सदर अस्पताल में हड्डी रोग से पीड़ित किसी मरीज का उपचार नहीं किया गया है. डॉ जितेंद्र सिंह के रूतबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनकी ड्यूटी अस्पताल में रात्रि सेवा के दौरान आज तक नहीं लगी है. इसका मुख्य वजह यह है कि इन्हें सहरसा से आना-जाना पड़ता है. बुधवार को इमरजेंसी ड्यूटी में डॉ सिंह ही तैनात थे.इन्हीं को पोस्टमार्टम भी करना था.लेकिन अपनी धौंस जमा कर उन्होंने सीएस व डीएस तक को लाचार बना दिया.
चिकित्सकों को नहीं है कार्रवाई का कोई भय
सदर अस्पताल में पदस्थापित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ जितेंद्र कुमार सिंह अस्पताल से अधिक निजी क्लिनिक को तवज्जो देते हैं. सदर अस्पताल में हड्डी रोग से संबंधित मरीज के आने पर उन्हें निजी क्लिनिक पर आकर इलाज कराने की सलाह देते हैं. डॉ सिंह को वरीय अधिकारियों के कार्रवाई का भी भय नहीं है. इनके इन्हीं मनमानी की वजह से इनके विरुद्ध सिविल सर्जन द्वारा पूर्व में प्रपत्र क गठित कर विभाग को कार्रवाई के लिए भी प्रतिवेदित किया जा चुका है. बुधवार को यदि डीएस द्वारा ग्रामीणों को शांत नहीं कराया जाता तो सदर अस्पताल में एक बार फिर अप्रिय घटना घटित हो सकती थी.
कहते हैं सीएस
सदर अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी नहीं चलेगी. सरकार से लाखों रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले चिकित्सकों को ड्यूटी के प्रति सजग रहना होगा. डॉ जितेंद्र कुमार सिंह के विरुद्ध पूर्व में प्रपत्र क गठित कर कार्रवाई के लिए प्रतिवेदित किया गया था. बुधवार को उनके द्वारा इमरजेंसी ड्यूटी में रहने के बावजूद पोस्टमार्टम कार्य से इनकार किया जाना कर्तव्य के प्रति लापरवाही और वरीय अधिकारियों के आदेश की अवहेलना का द्योतक है. उक्त चिकित्सक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए विभाग को प्रतिवेदित किया जा रहा है.
डॉ रामेश्वर साफी, सिविल सर्जन, सुपौल
करनी पड़ी मशक्कत
बुधवार की सुबह कमल यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया. सभी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शव के साथ आये पंचायत के पूर्व मुखिया जागेश्वर प्रसाद यादव, स्थानीय विनोद कुमार यादव, संतोष यादव सहित अन्य के द्वारा ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ जितेंद्र सिंह से पोस्टमार्टम करने का अनुरोध किया. लेकिन डॉ सिंह ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनका यह काम नहीं है. इसके लिए आप लोग डीएस से संपर्क करें.
इसके बाद स्थानीय ग्रामीण व मृतक के परिजन करीब तीन घंटे तक सदर अस्पताल स्थित विभिन्न कार्यालयों का चक्कर लगाते रहे. कभी डीएस तो कभी सीएस से पोस्टमार्टम करवाने की गुहार लगाते रहे. सीएस डीएस के पास भेज देते तो डीएस नौकरी से त्यागपत्र देने की धमकी दे रहे थे. काफी मशक्कत के बाद सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी ने डॉ कन्हैया प्रसाद सिंह से इस समस्या के समाधान का अनुरोध
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