नदी-नाले में बहायी जा रही है करोड़ों रुपये की दवा

Updated at :11 Aug 2016 4:20 AM
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नदी-नाले में बहायी जा रही है करोड़ों रुपये की दवा

सुपौल : जिले के सभी सरकारी अस्पताल व पीएचसी में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जहां खुले बाजार से दवा खरीद कर उपचार करवाने की विवशता बनी हुई है. वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये मूल्य की जीवन रक्षक दवाएं नदी और नाले में बहायी जा रही […]

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सुपौल : जिले के सभी सरकारी अस्पताल व पीएचसी में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जहां खुले बाजार से दवा खरीद कर उपचार करवाने की विवशता बनी हुई है. वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये मूल्य की जीवन रक्षक दवाएं नदी और नाले में बहायी जा रही है. नदी-नाला में बहाये जा रहे इन सभी दवाओं को एक्सपायर बताया जा रहा है. अधिकारी पूर्व में दवा खरीद के दौरान हुए घोटाले व धांधली को छुपाने के उद्देश्य से सभी एक्सपायर दवाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर सबूत मिटाने की जुगाड़ में लगे हुए हैं. ज्ञात हो कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा पूर्व में दवा खरीदने के मामले में नियम-कानून की अनदेखी कर भारी मात्रा में ऐसी दवा खरीदी गयी थी ,

जो क्रय करने के चार से छह माह के भीतर एक्सपायर हो गया. इस प्रकार की कई जीवन रक्षक दवाओं की खरीदारी में करोड़ों रुपये का बंदरबांट अधिकारी व कर्मियों द्वारा किया गया. सूत्र बताते हैं कि दवा वितरण के दौरान जब भारी मात्रा में दवा एक्सपायर होकर बच गया, तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तत्काल सभी दवाओं को सदर अस्पताल परिसर स्थित कई खाली कमरे में गोदाम बना कर एक्सपायर दवा को दबा दिया, लेकिन इस मामले में जांच शुरू होने के बाद अब कर्मी सबूत मिटाने के गरज से दवाओं को नदी-नाला में बहा रहे हैं.

रात के समय नष्ट किया जाता है दवा : दवा घोटाले में लिप्त अधिकारी व कर्मियों द्वारा रात के समय एक्सपायरी दवा को नष्ट किया जाता है. अंधेरे में इस कृत्य को अंजाम दिये जाने के कारण लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगती. अस्पताल के कई कर्मी बताते हैं कि अक्सर देर रात लग्जरी वाहनों से एक्सपायर दवा की खेप अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया जाता है. यही वजह है कि देर रात तक इस कार्य में लिप्त कर्मी अस्पताल परिसर में मंडराते रहते हैं, जबकि उनकी ड्यूटी कार्यालय बंद होने के बाद ही समाप्त हो जाती है. गत रविवार की रात सदर अस्पताल स्थित एक नाला में हजारों बोतल सीरप को खोल कर बहाया जा रहा था. भारी मात्रा में दवा बहाये जाने के कारण उससे निकलने वाली दुर्गंध से आसपास के लोगों को परेशानी महसूस हुई और उन लोगों के विरोध के बाद तत्काल बहाये गये दवा पर पानी और फिनाइल आदि छिड़का गया.

सदर अस्पताल स्थित एक कमरे में रखा गया एक्सपायरी दवा. फोटो। प्रभात खबर

स्टॉक के लिए सदर अस्पताल में है छह गोदाम

यूं तो दवा के स्टॉक के लिए सदर अस्पताल परिसर में पूर्व से एक गोदाम आवंटित है, लेकिन दवा खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये लूटने वाले अधिकारी एवं कर्मियों की मिलीभगत से इस समय सदर अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर एक्सपायर दवा रखने के लिए छह गोदाम बनाये गये हैं. सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर जेनरिक दवाओं की बिक्री के लिए बनाये गये दुकान सह गोदाम में लाखों रुपये मूल्य की एक्सपायर दवा रखी गयी है. वहीं रेड क्रॉस भवन के एक कमरे को गोदाम बना कर उसमें भी दवा भर कर रखा गया है. इसके अलावा महिला चिकित्सक डॉ नूतन वर्मा के आवास से सटे पूरब स्थित एक कमरे में भी लाखों रुपये की दवा रखी गयी है. वहीं सदर अस्पताल भवन के दूसरे तल पर भी कई कमरों में एक्सपायरी दवा के रूप में अधिकारियों के लूट-खसोट की कहानी बंद है.

करोड़ों रुपये के बंदरबांट को छुपाने के लिए नष्ट किया जा रहा एक्सपायर दवा

सदर अस्पताल स्थित छह गोदामों में रखा गया है करोड़ों रुपये की एक्सपयर दवा

अस्पताल के उपाधीक्षक को नहीं है इन दवाओं के बारे में जानकारी

कहते हैं उपाधीक्षक

जेनरिक दवा काउंटर सहित अस्पताल के अन्य जगहों पर रखे गये दवा से सदर अस्पताल का कोई लेना-देना नहीं है. मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि किसने और क्यों भारी मात्रा में इन दवाओं का भंडारण कर रखा है. अपने स्तर से पता करवा रहे हैं.

डॉ एनके चौधरी, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल

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