अब तक नहीं हुई करोड़ों रुपये की वसूली

Updated at :29 Jul 2016 7:12 AM
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अब तक नहीं हुई करोड़ों रुपये की वसूली

सुपौल : सरकार भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से भले ही नित नये आदेश जारी कर रही है. लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारी सरकार के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल कर चैन की नींद सो जाते हैं.ऐसे ही एक मामले का खुलासा बुधवार को हुआ है. जिसमें ग्रामीण कार्य प्रमंडल […]

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सुपौल : सरकार भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से भले ही नित नये आदेश जारी कर रही है. लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारी सरकार के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल कर चैन की नींद सो जाते हैं.ऐसे ही एक मामले का खुलासा बुधवार को हुआ है. जिसमें ग्रामीण कार्य प्रमंडल सुपौल के कार्यपालक अभियंता द्वारा विगत तीन वर्ष तक सरकार के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित नहीं कराया गया और उक्त आदेश को दबा कर रखा गया.

सामाजिक कार्यकर्ता स्थानीय विद्यापुरी वार्ड नंबर दो निवासी अनिल कुमार सिंह द्वारा दायर परिवाद के आलोक में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अजय कुमार झा ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित प्रतिवेदन पर काफी नाराजगी व्यक्त करते हुए मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की अगली तिथि आठ अगस्त निर्धारित करते हुए सभी साक्ष्य सहित स्पष्ट प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है.

क्या है मामला : ज्ञात हो कि ग्रामीण कार्य प्रमंडल सुपौल में निर्मली-हटवरिया एवं जीवछपुर-दुबियाही पथ में प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना में संवेदक एवं अभियंताओं की मिलीभगत से व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गयी थी. सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह द्वारा इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री, आर्थिक अपराध इकाई सहित ग्रामीण कार्य विभाग के सभी वरीय पदाधिकारी को साक्ष्य के साथ शिकायत पत्र समर्पित किया गया था. समर्पित शिकायत पत्र के आलोक में जांचोपरांत मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता को निलंबित करते हुए इनके विरुद्ध सरकारी राशि के गबन को लेकर पिपरा थाना में प्राथमिकी दर्ज करवायी गयी थी.साथ ही साथ सरकारी राशि के क्षति के रूप में एक करोड़ 63 लाख रुपये की वसूली दोषी अभियंताओं से ही करने का आदेश दिया गया था. लेकिन सरकार के आदेश के बाद दोषी अभियंताओं के विरुद्ध प्राथमिकी तो दर्ज की गयी. लेकिन आदेश के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकारी राशि की वसूली नहीं की जा सकी है.
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