शहर चकाचक, वार्डों में लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jun 2016 5:51 AM

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मुसीबत. जल जमाव से परेशान हैं लोग, नगर परिषद का नहीं है इस ओर ध्यान शहर के कई प्रमुख टोले मुहल्ले में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है जिससे लोग परेशान हैं. सुपौल : च्छ व सुंदर नगर निर्माण के प्रयास में जुटे नगर परिषद के लिए चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है. […]

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मुसीबत. जल जमाव से परेशान हैं लोग, नगर परिषद का नहीं है इस ओर ध्यान

शहर के कई प्रमुख टोले मुहल्ले में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है जिससे लोग परेशान हैं.
सुपौल : च्छ व सुंदर नगर निर्माण के प्रयास में जुटे नगर परिषद के लिए चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है. शहर के कई प्रमुख टोले मुहल्ले में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. नगर परिषद प्रबंधन शहर की मुख्य सड़कों को चकाचक एवं लाइटिंग की व्यवस्था करने के बाद भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन मुख्य सड़कों को छोड़ दें तो अन्य वार्डों की कमोवेश यही स्थिति है. क्षेत्र का वार्ड नंबर एक हो अथवा वार्ड नंबर 12,24, 07,06,17 आदि सभी वार्डों की एक जैसी स्थिति है. ऐसा प्रतीत होता है कि नगर परिषद द्वारा इन वार्डों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है.
ऐसा ही एक वार्ड है विद्यापुरी वार्ड नंबर 02 जहां मुहल्ले के बीचोंबीच हो कर गुजरने वाली मुख्य सड़क में जल-जमाव की वजह से स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. यह स्थित तब है जब नगर परिषद द्वारा गत वर्ष लाखों रुपये की लागत से पक्का नाला का निर्माण कराया गया. यह अलग बात है कि इस नाले को निर्माण के तुरंत बाद ही मिट्टी डाल कर नाले को बंद कर दिया गया. नाला से जल निकासी नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर ही बहाया जाता है. बारिश के मौसम की कौन कहे यहां स्थिति यह है कि सालों भार सड़क पर पानी जमा रहता है.
नतीजा है कि लोग जरूरी कार्य से भी बाजार की ओर निकलने से कतराते हैं. जबकि मुहल्ले को मुख्यालय बाजार से जोड़ने वाली यह एक मात्र सड़क है. सबसे अधिक परेशानी का सामना लोगों को रात के समय उठानी पड़ती है. जब अंधेरे में इस गंदे पानी को उन्हें पार कर आना-जाना पड़ता है. वहीं छोटे-छोटे बच्चे इस गंदे पानी की वजह से स्कूल जाने से भी कतराते हैं. मुहल्ला वासियों ने अपना दुखड़ा सुनाते बताया कि बच्चों को उन्हें प्रतिदिन गोद में उठा कर पानी पार कराने की विवशता बनी हुई है. इस समस्या का समाधान नहीं होने के कारण मुहल्ले वासियों में काफी आक्रोश का माहौल व्याप्त है.
एक दिन भी नहीं निकला नाले से पानी : स्थानीय लोगों की समस्या को ध्यान में रख कर नगर परिषद द्वारा गत वर्ष लाखों रूपये की लागत से पक्का नाला का निर्माण कराया गया. इसके लिये तैयार प्राक्कलन में बढ़ोतरी कर इसे गजना धार तक ले जाया गया. ताकि घरों से निकलने वाले गंदा पानी व बारिश के पानी का समुचित रूप से बहाव हो सके. साथ ही लोगों को जल-जमाव की समस्या से छुटकारा मिल सके. लेकिन नाला निर्माण के कुछ ही दिन बाद इसे मिट्टी डाल कर बंद कर दिया गया. नाला को बंद कर दिये जाने की वजह से स्थानीय निवासियों को जल-जमाव की समस्या से जूझना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों ने डीएम से लगायी गुहार
जल जमाव के कारण आवागमन की समस्या से जूझ रहे वार्ड नंबर 02 निवासी चंद्रशेखर चौधरी ने बीते 16 मई को जिला पदाधिकारी एवं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन देकर इस समस्या से अवगत कराते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया था, लेकिन स्थिति यह है कि आज भी उक्त समस्या जस की तस बनी हुई है. आवेदन में श्री चौधरी ने बताया है कि वार्ड नंबर 02 स्थित उनके घर के समीप राम लखन साह द्वारा सरकारी पक्का नाला में मिट्टी डाल कर पानी का बहाव अवरूद्ध कर दिया गया है. इस वजह से लोगों को आवागमन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने जन हित की इस समस्या को ध्यान में रख कर अविलंब इसके निदान की मांग की है.
एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
नाला निर्माण के बाद इसे बंद कर दिये जाने के लिये नगर परिषद द्वारा पथ निर्माण विभाग को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. उनका कहना है कि उक्त सड़क पथ निर्माण विभाग के हवाले किया गया है. जिसके बाद उनके द्वारा सड़क निर्माण के क्रम में नालों को भर दिया गया. जबकि पथ निर्माण विभाग का कहना है कि स्थानीय लोगों द्वारा इस नाले में मिट्टी डाल कर बहाव को अवरूद्ध कर दिया गया है. जबकि स्थानीय लोग इसके लिये नगर परिषद को दोषी ठहरा रहे हैं. लोगों का कहना है कि नगर परिषद की अदूरदर्शिता के कारण लाखों रुपये की लागत से बना नाला बेकार साबित हो रहा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि नाला निर्माण के बाद यह कह कर इसे बंद कर दिया गया कि अब सड़क के बीचो-बीच नाला का निर्माण किया जायेगा. अब सवाल यह उठता है कि यदि उक्त योजना गलत थी तो फिर किस परिस्थिति में इस पर लाखों रुपये व्यय किये गये.
कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में पूछे जाने पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी एसके मिश्रा ने बताया कि लोगों की सुविधा हेतु नाले का निर्माण किया गया था. बाद में पीडबलूडी द्वारा सड़क का निर्माण किया गया. इस क्रम में सड़क की चौड़ाई बढ़ायी गयी. नगर परिषद द्वारा शहर के सड़क व गली आदि का सर्वे कराया जा रहा है. जिसके बाद उक्त सड़क में जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के उद्देश्य से नाले का निर्माण किया जायेगा.
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