आतंक के साये में नन्हीं जान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jun 2016 5:12 AM

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अपराध. जिले के िवभिन्न हिस्सों में घूम रहे नर पिशाच सुपौल : इन दिनों नर पिशाच का आतंक बना हुआ है. इन नर पिशाचों की सक्रियता के कारण नन्हीं जानों पर खतरा मंडरा रहा है. पूर्वी और उत्तरी अनुमंडल के इलाकों में इन दिनों लगातार हो रहे दुष्कर्म के घटना से प्रशासन सहित आम आवाम […]

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अपराध. जिले के िवभिन्न हिस्सों में घूम रहे नर पिशाच

सुपौल : इन दिनों नर पिशाच का आतंक बना हुआ है. इन नर पिशाचों की सक्रियता के कारण नन्हीं जानों पर खतरा मंडरा रहा है. पूर्वी और उत्तरी अनुमंडल के इलाकों में इन दिनों लगातार हो रहे दुष्कर्म के घटना से प्रशासन सहित आम आवाम हतप्रभ है. नर पिशाचों का शिकार सबसे अधिक पांच वर्ष से लेकर 12 वर्ष तक की बच्चियां बन रही हैं. प्रशासनिक सक्रियता के बावजूद गैंग रेप जैसे जघन्य अपराध को यहां अंजाम दिया जा रहा है. महज कुछ महीने के अंदर जिले में दो गैंप रेप सहित आधा दर्जन से अधिक रेप की घटनाओं का मामला महिला थाना पहुंच चुकी है. एसपी डॉ कुमार एकले के सक्रियता के कारण सभी मामलों के अभियुक्त गिरफ्तार कर जेल भेज दिये गये है, लेकिन इन दुष्कर्मियों की इस हालात को देख कर भी नर पिशाच संभलने के लिए तैयार नहीं है.
नन्हीं जान बन रही शिकार
महिला थाना में दर्ज दुष्कर्म के 10 मामलों पर गौर किया जाय तो स्पष्ट है कि हैवानियत की सबसे अधिक शिकार खासकर छोटी उम्र की बच्चियों बन रही हैं. पांच वर्ष की जो बच्ची अपने परिजनों का नाम सही-सही नहीं बोल सके ऐसे बच्चियों को भी अपना शिकार बनाने में दुष्कर्मियों की रूह भी नहीं कांपती है. मंगलवार तक जिला मुख्यालय स्थित महिला थाना में दर्ज आठ दुष्कर्म के मामले में पांच से 16 साल की बच्चियां पीड़ित बनी है. वहीं दो गैंग रेप के मामले में भी पीड़ित दोनों नाबालिग ही हैं. छोटी उम्र की बच्चियां जब हैवानियत का शिकार होती है तो पूरा समाज शर्मसार हो जाता है. बावजूद दुष्कर्म की घटना पर रोक नहीं लग रही है. हालांकि जिले में कई स्वयंसेवी संस्था विकास योजना से लेकर सरकार की नीति को धरातल पर उतारने के प्रयास में जुटे हुए हैं.
बेखौफ देते हैं अंजाम
जिले में दुष्कर्म की बात तो छोडिये, नर पिशाचों की हिमाकत ऐसी है कि बेखौफ होकर यह गैंगरेप की भी घटना को भी अंजाम देते हैं. ताजा मामला छातापुर थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव का है. यहां दो अभियुक्तों ने एक महिला के सहयोग से एक नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया. हालांकि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस दोनों आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है. कुछ दिन पूर्व भी भीमपुर थाना क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान डीजे के आवाज का फायदा उठा कर तीन अभियुक्तों ने एक नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था. लेकिन हैवानियत के इस खेल को रोकने के लिए अशिक्षित समाज में जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी किसी ने अब तक नहीं उठायी है.
फांसी की हो सकती है सजा
दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई कड़े कानून बनाये गये है. जानकार बताते हैं कि अगर इन कानूनों का प्रचार प्रसाद व्यापक पैमाने पर करायी जाये तो इस तरह की घटना पर हद तक अंकुश लगाया जा सकता है. कोसी प्रमंडल में कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में स्थापित अवर निरीक्षक सुमन कुमार सिंह बताते हैं कि नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के आरोपी को न्यायालय से जमानत नहीं मिल सकता है.
ऐसे आरोपियों को आजीवन कारावास के साथ-साथ फांसी की सजा भी न्यायालय से मिल सकती है. पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कानून बनाये हैं. वर्तमान समय में इन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस कार्रवाई कर रही है.
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